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Shahjahanpur News: तटीय गांवों के किनारे अब भी जलमग्न, घरों में कैद ग्रामीण

Sat, 31 Aug 2024 04:50 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sat, 31 Aug 2024 04:50 AM IST
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Coastal villages still under water, villagers confined to their homes
शाहजहांपुर/मिर्जापुर/परौर। गंगा समेत रामगंगा के जलस्तर में शुक्रवार को तीसरे दिन भी गिरावट जारी रही। कलान के भैंसार बांध पर गंगा 15 सेमी. घट गई। रामगंगा में 16 सेमी. पानी कम हो गया। इससे नदियों के तटीय इलाकों में बाढ़ से बिगड़े हालात थोड़े सुधरे हैं। अब भी गांवों के किनारे जलमग्न हैं। इस कारण ग्रामीण घरों में कैद हैं।
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फर्रुखाबाद जिले में शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाईवे पर भरा बाढ़ का पानी देर रात निकल गया। इससे सुबह से हाईवे पर यातायात बहाल है। नरौरा बैराज से सुबह अतिरिक्त पानी की खेप में 17 हजार 328 क्यूसेक कटौती कर दी गई है। अब वहां से 40 हजार 349 क्यूसेक पानी निकल रहा है। बताया गया कि रामगंगा में लालपुर कोसी डाम से पानी की थोड़ी मात्रा बढ़ने के बावजूद अन्य बैराजों से बहाए जा रहे पानी की मात्रा 337 क्यूसेक कम हुई है। अब रामगंगा में बैराजों से 11 हजार 215 क्यूसेक पानी निकल रहा है।
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सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा 16 सेमी घटकर 159.60 मीटर पर बह रही है। वहां जलस्तर में आई कमी के कारण जिले के जैतीपुर, जलालाबाद, परौर और अल्हागंज क्षेत्र में रामगंगा के तटीय गांवों से बाढ़ का खतरा टल गया है। गंगा के किनारे बसे पैलानी उत्तरी, आजादनगर, इस्लामनगर, कमथरी, नगला बसोला, चितार आदि गांवों के आसपास पानी भरा हुआ है। इससे ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों से घिरने का खतरा महसूस हो रहा है।
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उधर, परौर क्षेत्र में तीन दिन तक उफनाई रही रामगंगा अब सिमटने से नारायणनगर पश्चिमी, मोहनपुर और बिचपुरी गांव के हो रहा भूमि कटान धीमा हो गया है, लेकिन किनारे के खेतों में बोई गईं धान, गन्ना, तिल, शकरकंद, मूंगफली आदि फसलें अभी तक डूबी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए तीन साल पहले बनाई गईं जिओ ट्यूब की जो ठोकरें अवधि पूरी होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उनके स्थान पर सिंचाई विभाग पक्की ठोकरें बनवाए ताकि भूमि कटान से स्थायी तौर पर निजात मिल सके।
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