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धुआं हुए प्रतिबंध, हवा हुई जहरीली
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शाहजहांपुर में दिवाली के दिन आतिशबाजी के दौरान उठता धुआं। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। पटाखे छोड़ने के लिए जो भी नियम कायदे प्रशासन ने बनाए थे। देर रात तक हुई आतिशबाजी में सब धुआं हो गए। लोगों ने करोड़ों के पटाखे फूंक डाले। नतीजा यह रहा कि शहर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार सुबह धुंध छाई रही। प्रदूषण की वजह से शुक्रवार सुबह लोग टहलने के लिए भी नहीं निकले।
दिवाली के दिन बृहस्पतिवार को लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। ईको-फ्रैंडली पटाखों से कहीं ज्यादा तेज आवाज और रोशनी करने वाले पटाखे चलाए गए। दिवाली पर घंटाघर इलाके की हवा सबसे ज्यादा जहरीली हो गई। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सुबह छह बजे 594 पर पहुंच गया। घटंाघर ही नहीं कई स्थानों का एक्यूआई 500 के ऊपर रहा। गनीमत रही कि पूर्वाह्न 11 बजे तक कम हो गया।
एसएस कॉलेज के रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पृथ्वी संस्था के निदेशक (शोध) डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि शाहजहांपुर में कुछ दिन पूर्व हुई बारिश के चलते हवा की गुणवत्ता बहुत अच्छी थी। 24, 25 और 26 अक्तूबर को वायु की गुणवत्ता का स्तर क्रमश: 67, 65, 27 एक्यूआई रहा, जबकि 30, 31 अक्तूबर और एक नवंबर को यह 166, 174, 272 दर्ज किया गया। यानी 26 अक्तूबर को हवा की दशा सबसे अच्छी और एक नवंबर को सबसे खराब थी। एक नवंबर को यह 272 सबसे खराब था। दिवाली के दिन दोपहर 12 बजे एक्यूआई 120 था। इसके बाद यह बढ़ना शुरू हुआ और शाम छह बजे तक यह 175 पहुंच गया था।
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स्थान बृहस्पतिवार शाम 7 बजे रात 10.30 बजे शुक्रवार सुबह 6 बजे पूर्वाह्न 11 बजे एक्यूआई
घंटाघर 350 425 594 280
चौक 315 416 546 265
सदर बाजार 296 405 546 240
कैंट 225 415 506 221
रामनगर 306 447 550 219
यह है मानक
शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 के बीच को मध्यम, 201 से 300 के बीच को खराब, 301 से 400 के बीच को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच को गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
फोटो--22
ध्वनि प्रदूषण का स्तर शहर में 80-100 डेसिमल तक रहा, आदर्श मानक के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में यह 35-45 डेसिबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अधिक ध्वनि प्रदूषण से जहां जीव जंतुओं और कीट, पक्षियों के लिए नुकसानदायक है। वहीं मानव में चिड़चिड़ापन, हृदय आघात का खतरा बढ़ सकता है। पिछले साल देश में पटाखों के कारण छह हजार लोगों को बहरापन होने की शिकायत दर्ज की गई थी।
- डॉ. विकास खुराना, पर्यावरण चिंतक
पटाखों से निकलने वाले धुएं से सांस के मरीजों को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। जब बाहर आतिशबाजी हो रही हो तो बुजुर्गों और मरीजों को अपने घर के दरवाजे और खिड़की बंद कर लेना चाहिए। धुएं से आंखों में जलन पड़ने लगती है। धुएं को छंटने और पहले जैसा वातावरण आने में करीब एक सप्ताह लग जाता है। - डॉ. एमएल अग्रवाल, मेडिसिन विभागाध्यक्ष, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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दिवाली के दिन बृहस्पतिवार को लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। ईको-फ्रैंडली पटाखों से कहीं ज्यादा तेज आवाज और रोशनी करने वाले पटाखे चलाए गए। दिवाली पर घंटाघर इलाके की हवा सबसे ज्यादा जहरीली हो गई। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सुबह छह बजे 594 पर पहुंच गया। घटंाघर ही नहीं कई स्थानों का एक्यूआई 500 के ऊपर रहा। गनीमत रही कि पूर्वाह्न 11 बजे तक कम हो गया।
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एसएस कॉलेज के रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पृथ्वी संस्था के निदेशक (शोध) डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि शाहजहांपुर में कुछ दिन पूर्व हुई बारिश के चलते हवा की गुणवत्ता बहुत अच्छी थी। 24, 25 और 26 अक्तूबर को वायु की गुणवत्ता का स्तर क्रमश: 67, 65, 27 एक्यूआई रहा, जबकि 30, 31 अक्तूबर और एक नवंबर को यह 166, 174, 272 दर्ज किया गया। यानी 26 अक्तूबर को हवा की दशा सबसे अच्छी और एक नवंबर को सबसे खराब थी। एक नवंबर को यह 272 सबसे खराब था। दिवाली के दिन दोपहर 12 बजे एक्यूआई 120 था। इसके बाद यह बढ़ना शुरू हुआ और शाम छह बजे तक यह 175 पहुंच गया था।
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स्थान बृहस्पतिवार शाम 7 बजे रात 10.30 बजे शुक्रवार सुबह 6 बजे पूर्वाह्न 11 बजे एक्यूआई
घंटाघर 350 425 594 280
चौक 315 416 546 265
सदर बाजार 296 405 546 240
कैंट 225 415 506 221
रामनगर 306 447 550 219
यह है मानक
शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 के बीच को मध्यम, 201 से 300 के बीच को खराब, 301 से 400 के बीच को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच को गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
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ध्वनि प्रदूषण का स्तर शहर में 80-100 डेसिमल तक रहा, आदर्श मानक के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में यह 35-45 डेसिबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अधिक ध्वनि प्रदूषण से जहां जीव जंतुओं और कीट, पक्षियों के लिए नुकसानदायक है। वहीं मानव में चिड़चिड़ापन, हृदय आघात का खतरा बढ़ सकता है। पिछले साल देश में पटाखों के कारण छह हजार लोगों को बहरापन होने की शिकायत दर्ज की गई थी।
- डॉ. विकास खुराना, पर्यावरण चिंतक
पटाखों से निकलने वाले धुएं से सांस के मरीजों को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। जब बाहर आतिशबाजी हो रही हो तो बुजुर्गों और मरीजों को अपने घर के दरवाजे और खिड़की बंद कर लेना चाहिए। धुएं से आंखों में जलन पड़ने लगती है। धुएं को छंटने और पहले जैसा वातावरण आने में करीब एक सप्ताह लग जाता है। - डॉ. एमएल अग्रवाल, मेडिसिन विभागाध्यक्ष, राजकीय मेडिकल कॉलेज