{"_id":"618973db16de08338c1d2c85","slug":"chhathha-puja-shahjahanpur-news-bly465491175","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहाय खाय के साथ शुरू हुआ सूर्य उपासना का महापर्व छठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहाय खाय के साथ शुरू हुआ सूर्य उपासना का महापर्व छठ
विज्ञापन
शाहजहांपुर में नहाया खया को लेकर हाथ की चक्की से अनाज पिसती पूर्वाचंल की महिलाएं । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। महापर्व छठ की सोमवार को नहाय खाय के साथ शुरुआत हो गई। पहले दिन नहाय खाय की परंपरा का निर्वहन किया गया। सुबह उठकर घरों में साफ सफाई की गई, उसके बाद नहा-धोकर भोजन तैयार किया गया। इसमें लौकी की सब्जी, दाल आदि शामिल रहीं। तैयार भोजन का सभी ने साथ बैठकर सेवन किया। मंगलवार को खरना होगा। 11 नवंबर तक छठ पर्व मनाया जाएगा।
छठ पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है। जोकि सोमवार को होने की वजह से महापर्व का शुभारंभ हो गया। यह पर्व बिहार और उत्तर भारत के लोग बड़ी धूमधाम के साथ मनाते हैं। इन राज्यों के बहुत से लोग जिले में रेलवे के साथ ही अन्य विभागों में तैनात हैं और परिवार के साथ यहां पर रह रहे हैं। यह लोग अपने घर न जाने के कारण यहीं पर अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हैं।
सभी ने सोमवार को छठ पर्व के पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा को निभाया। शाम को सात्विक भोजन में चने की दाल, चावल, लौकी सब्जी बनाई, फिर सभी ने एक साथ मिल बैठकर भोजन किया। अब बुधवार केे खरना होगा। बृहस्पतिवार को डूबते और शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती 36 घंटे के निर्जला उपवास का परायण करेंगे।
विज्ञापन
आज खरना के बाद शुरू होगा 36 घंटे का व्रत
मंगलवार केे छठ पर्व के दूसरे दिन खरना होगा। इस दिन व्रत रखा जाता है और व्रती रात को पूजा करने के बाद गुड़ से बनी खीर खाकर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं। इसी दिन छठ पूजा का प्रसाद तैयार किया जाता है। मंगलवार शाम 5:45 से 6:25 बजे तक खरना है।
हमारा परिवार हर साल छठ पर्व मनाता है। इस बार भी धूमधाम से मनाएंगे। इसकी शुरुआत सोमवार से हो गई है। पहले दिन नहाय खाय की परंपरा का निर्वहन किया। - संध्या
सुबह उठकर सबसे पहले घर की साफ-सफाई की उसके बाद नहा-धोकर भोजन की तैयारी शुरू कर दी। लौकी की सब्जी, दाल आदि बनाया और सभी ने साथ में खाया - रोशनी
छठ पूजा के 36 घंटे का व्रत रखना सबसे कठिन कार्य होता है। जोकि खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ शुरू होगा। सोमवार को नहाय खाय की परंपरा को निभाया गया। - प्रीति
पूर्वांचल के लोगों में छठ पूजा का बड़ा महत्व है। यह हमारा प्रमुख त्योहार है, जिसको पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। सूर्य भगवान का पूजन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। - बच्ची सिंह
विज्ञापन
छठ पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है। जोकि सोमवार को होने की वजह से महापर्व का शुभारंभ हो गया। यह पर्व बिहार और उत्तर भारत के लोग बड़ी धूमधाम के साथ मनाते हैं। इन राज्यों के बहुत से लोग जिले में रेलवे के साथ ही अन्य विभागों में तैनात हैं और परिवार के साथ यहां पर रह रहे हैं। यह लोग अपने घर न जाने के कारण यहीं पर अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हैं।
विज्ञापन
सभी ने सोमवार को छठ पर्व के पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा को निभाया। शाम को सात्विक भोजन में चने की दाल, चावल, लौकी सब्जी बनाई, फिर सभी ने एक साथ मिल बैठकर भोजन किया। अब बुधवार केे खरना होगा। बृहस्पतिवार को डूबते और शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती 36 घंटे के निर्जला उपवास का परायण करेंगे।
विज्ञापन
आज खरना के बाद शुरू होगा 36 घंटे का व्रत
मंगलवार केे छठ पर्व के दूसरे दिन खरना होगा। इस दिन व्रत रखा जाता है और व्रती रात को पूजा करने के बाद गुड़ से बनी खीर खाकर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं। इसी दिन छठ पूजा का प्रसाद तैयार किया जाता है। मंगलवार शाम 5:45 से 6:25 बजे तक खरना है।
हमारा परिवार हर साल छठ पर्व मनाता है। इस बार भी धूमधाम से मनाएंगे। इसकी शुरुआत सोमवार से हो गई है। पहले दिन नहाय खाय की परंपरा का निर्वहन किया। - संध्या
सुबह उठकर सबसे पहले घर की साफ-सफाई की उसके बाद नहा-धोकर भोजन की तैयारी शुरू कर दी। लौकी की सब्जी, दाल आदि बनाया और सभी ने साथ में खाया - रोशनी
छठ पूजा के 36 घंटे का व्रत रखना सबसे कठिन कार्य होता है। जोकि खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ शुरू होगा। सोमवार को नहाय खाय की परंपरा को निभाया गया। - प्रीति
पूर्वांचल के लोगों में छठ पूजा का बड़ा महत्व है। यह हमारा प्रमुख त्योहार है, जिसको पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। सूर्य भगवान का पूजन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। - बच्ची सिंह