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नैनो साइंस और ग्रीन कैमेस्ट्री पर दो दिवसीय सेमिनार में पहुंचे शिक्षाविद
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शाहजहांपुर। जीएफ कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग और उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को ‘रीसेंट डेवलपमेंट इन नैनो साइंस एंड ग्रीन केमिस्ट्री’ विषय पर दो दिवसीय नेशनल सेमिनार शुरू हुआ। सेमिनार में छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि चीजों को सुलभ और आसानी से सूक्ष्म करके उनमें वही गुण संजोए रखना ही नैनो टेक्नोलॉजी कहलाती है।
उन्होंने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री का अर्थ प्रदूषण मुक्त वातावरण देना और विषैले रसायनों से मुक्ति दिलाना है। जल प्रदूषण से खत्म होती नदियों की पवित्रता और आसमान की कम होती नीलिमा से प्रदूषण की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जहरीले रसायनों से पेड़-पौधे, जीव-जंतु नष्ट हो रहे हैं। आज जब पूरा विश्व प्रदूषण से ग्रस्त हो चुका है, तब हमें ग्रीन केमिस्ट्री की याद आ रही है। समय रहते यदि इस पर चिंता जताई गई होती और रोकथाम के प्रयास किए होते तो आज यह स्थिति ही पैदा नहीं होती।
प्राचार्य प्रो. जमील अहमद ने कहा कि लगातार बढ़ते वायु एवं जल प्रदूषण से पर्यावरण संतुलन पर संकट बढ़ा है। नई तकनीक और ग्रीन केमिस्ट्री के विकास से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। तकनीकी सत्र के अतिथि प्रो. आईआर सिद्दीकी और सुशील कुमार ने नैनो साइंस और टेक्नालॉजी का अंतर समझाया। पूर्व प्राचार्य डॉ. इशरत अल्ताफ ने तिलावत ए कुरान के पाठ से सेमिनार का शुभारंभ किया। प्राचार्य ने आयोजन सचिव डॉ. नईमुद्दीन सिद्दीकी के साथ अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. मोहसिन हसन खां, डॉ. फैयाज अहमद, डॉ. युक्ति माथुर, डॉ. मोहसिन, डॉ. मोहिमन, डॉ. रियाज, सैयद मोहम्मद नोमान, सैयद अनीस अहमद, डॉ. रईस अहमद आदि मौजूद रहे।
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तकनीकी सत्र में प्रस्तुत हुए 20 शोधपत्र
सेमिनार के अंतर्गत तीन तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसमें 20 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। साथ ही रिसर्च पेपर पोस्टर के रूप में प्रदर्शित किए गए।
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उन्होंने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री का अर्थ प्रदूषण मुक्त वातावरण देना और विषैले रसायनों से मुक्ति दिलाना है। जल प्रदूषण से खत्म होती नदियों की पवित्रता और आसमान की कम होती नीलिमा से प्रदूषण की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जहरीले रसायनों से पेड़-पौधे, जीव-जंतु नष्ट हो रहे हैं। आज जब पूरा विश्व प्रदूषण से ग्रस्त हो चुका है, तब हमें ग्रीन केमिस्ट्री की याद आ रही है। समय रहते यदि इस पर चिंता जताई गई होती और रोकथाम के प्रयास किए होते तो आज यह स्थिति ही पैदा नहीं होती।
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प्राचार्य प्रो. जमील अहमद ने कहा कि लगातार बढ़ते वायु एवं जल प्रदूषण से पर्यावरण संतुलन पर संकट बढ़ा है। नई तकनीक और ग्रीन केमिस्ट्री के विकास से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। तकनीकी सत्र के अतिथि प्रो. आईआर सिद्दीकी और सुशील कुमार ने नैनो साइंस और टेक्नालॉजी का अंतर समझाया। पूर्व प्राचार्य डॉ. इशरत अल्ताफ ने तिलावत ए कुरान के पाठ से सेमिनार का शुभारंभ किया। प्राचार्य ने आयोजन सचिव डॉ. नईमुद्दीन सिद्दीकी के साथ अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. मोहसिन हसन खां, डॉ. फैयाज अहमद, डॉ. युक्ति माथुर, डॉ. मोहसिन, डॉ. मोहिमन, डॉ. रियाज, सैयद मोहम्मद नोमान, सैयद अनीस अहमद, डॉ. रईस अहमद आदि मौजूद रहे।
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तकनीकी सत्र में प्रस्तुत हुए 20 शोधपत्र
सेमिनार के अंतर्गत तीन तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसमें 20 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। साथ ही रिसर्च पेपर पोस्टर के रूप में प्रदर्शित किए गए।