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Shahjahanpur News: भार वहन क्षमता की जांच शुरू, पहले दिन कुछ पैदल यात्रियों को मिली छूट

Sun, 15 Sep 2024 03:54 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 15 Sep 2024 03:54 AM IST
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Checking of load carrying capacity started, some pedestrians got exemption on the first day
कोलाघाट पुल के नीचे दूसरे पिलर तक पहुंचने के लिये जगह बनाती जेसीबी। संवाद
जलालाबाद। कोलाघाट पुल की भार वहन क्षमता की जांच (लोड टेस्टिंग) करने वाराणसी से आई बीएचयू से संबद्ध आईआईटी की तकनीकी टीम ने शनिवार से काम शुरू कर दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर अश्विनी कुमार के निर्देशन में टीम ने प्रोसेसिंग वर्क किया। लोड टेस्टिंग का कार्य रविवार से होगा। पहले दिन कुछ पैदल यात्रियों को निकलने की अनुमति दी गई। वहीं, बाइकों का आवागमन बिल्कुल बंद रहा।
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टीम ने पुल पर जलालाबाद की तरफ से काम की शुरुआत की है। रविवार को पुल के पहले पिलर व पियर कैप से तकनीकी जानकारी जुटाने के लिए कई जगह ड्रिल मशीन से सुराख किए गए। इंजीनियर अश्वनी कुमार ने बताया कि वाराणसी से अभी तीन मशीनें आना शेष हैं, जो रात तक पहुंच जाएंगी। इन मशीनों के जरिये पता लगाया जाएगा कि किस पिलर पर कितना लोड रखकर टेस्टिंग की जाए। पिलर की अंदरूनी भौतिक स्थिति का पता लगाने के लिए सुराख किए गए हैं। बताया कि विभागीय अधिकारियों की यहां पहुंचने वाली टीम के दिशा-निर्देश में लोड टेस्टिंग का कार्य आगे बढ़ेगा।
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उन्होंने बताया कि पहले पिलर की तरह ही पुल के अन्य चिह्नित किए गए सभी 17 पिलर पर भी इसी तरह के कार्य होंगे। जिस पिलर पर यह कार्य पूरा हो जाएगा, उसकी भार वहन क्षमता का आकलन करने के लिए पुल के ऊपरी हिस्से में पिलर पर करीब पचास टन वजन के लोडेड ट्रक 24 घंटे के लिए अलग-अलग समय खड़े किए जाएंगे। इसके लिए मौके पर गिट्टी से भरे पांच ट्रक पहुंच गए हैं।
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पियर कैप तक पहुंचने के लिए बन रहे बेस

आम दिनों में पुल के दोनों तरफ के आठ से दस पिलर के नीचे और आसपास बालू या मिट्टी रहती है। केवल नदी वाले पिलर ही पानी में डूबे रहते हैं। बरसात के कारण इन दिनों पुल के दूसरे पिलर के आसपास पानी भरा हुआ है और आगे अन्य पिलर गहरे पानी में डूबे हैं। सुराख सहित अन्य तरह के कार्य सभी पिलर पर होने हैं। शनिवार को दूसरे पिलर के पियर कैप तक पहुंच बनाने के लिए जेसीबी से मिट्टी डालकर बेस तैयार किया गया। इंजीनियर ने बताया कि यह व्यवस्था भी की जा रही है कि पानी में डूबे पिलर कार्य में बाधक न बनें। इस दौरान सेतु निगम के जिला परियोजना प्रबंधक बृजेंद्र मौर्य विभागीय इंजीनियर के साथ मौजूद रहे। लोड टेस्टिंग की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले रामकुमार राठौर, जिला पंचायत सदस्य रामदास, सपा नेता व पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामवीर सोमवंशी, समाजवादी छात्र सभा के अध्यक्ष तस्लीम अंसारी, सूरज पाल सिंह आदि भी माैके पर डटे रहे।

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दस दिन के काम की एक माह बाद आएगी रिपोर्ट

इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर ने बताया कि लोड टेस्टिंग का कार्य दस दिन में पूरा कर लेने का पूरा प्रयास रहेगा। टेस्टिंग से मिलने वाली जानकारी का विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे। बताया कि पुल चार पहिया वाहनों के आवागमन लायक है या नहीं, इस बारे में पूरी रिपोर्ट मिलने में 30 से 40 दिन लगने का अनुमान है।


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राहगीर बोले-बरसात के बाद होना चाहिए था कार्य
लोड टेस्टिंग के लिए बाइक व पैदल यात्रियों के आवागमन पर प्रतिबंध रहने के कारण शनिवार सुबह कोला मोड़ और रामगंगा पार जरियनपुर तिराहे पर पुलिस तैनात रही। पुल से पहले भी दोनों तरफ पुलिस तैनात रहने से बाइक व डग्गामार वाहन पूरी तरह बंद रहे। हालांकि, मजबूरी के हालात अथवा बीमारी का हवाला देने वाले कुछ पैदल यात्रियों को पुल पार कर आने-जाने की छूट दे दी गई। कई राहगीरों का कहना था कि यह कार्य बरसात के बाद होता तो उस समय आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्ते मिल जाते।
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