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चैत्र नवरात्र आज से, सज गए मइया के दरबार

Fri, 20 Mar 2015 11:37 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Fri, 20 Mar 2015 11:37 PM IST
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Chaitra Navratri today, the court has dressed maiya
आदिशक्ति मां भगवती की पूजा-अर्चना का महापर्व नवरात्र शनिवार से आरंभ हो रहे हैं। मइया के भक्तों ने उपवास रखने से लेकर पूजा-अर्चना की तैयारियों में ही शुक्रवार का दिन बिताया। घरों में जहां पूजाघरों तथा घट स्थापना वाले अन्य स्थानों की सफाई-धुलाई की गई, वहीं पुरुषों ने पूजन सामग्री, देवीजी की पोशाक, चुनरी, श्रंगार सामग्री आदि की खरीददारी की। महिलाएं मिट्टी के घड़े खरीदते देखी गईं।
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इसके अलावा मां दुर्गा के मंदिरों को रंग-बिरंगी झालरों, बिजली तथा फूलों से सजाया गया है। मां भगवती की मूर्तियों को नहलाकर उनका श्रंगार कर दिया गया है, ताकि सुबह पूजा को आने वाले भक्तों को मइया के दर्शन हो सकें।
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पुलिस का रहेगा पहरा
देवी मंदिरों में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस का पहरा रहेगा। खासतौर में मंदिरों में महिला पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। विसरात स्थित मां काली मंदिर, मंडी स्थित श्री दुर्गा मंदिर, चौक स्थित मां फूलमती मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर आदि स्थानों पर कड़ा पहरा रहेगा।
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खासे मंहगे हो गए फल
नवरात्र शुरू होने से पहले ही फलों पर खासी महंगाई फट पड़ी है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इस प्रकार के उपवास वाले त्योहार आते ही फल विक्रेता महंगाई बढ़ा ही देते हैं। एक दिन पहले तक 25-30 रुपये दर्जन बिकने वाला केला शुक्रवार को 40 रुपये तक पहुंच गया। इसी तरह 30-40 रुपये किलो बिकने वाला संतरा 50 से 60 रुपये किलो बिकना शुरू हो गया है। यही हाल अंगूर का भी है, इसमें में 20 रुपये किलो तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। कूटू-सिंघाड़ा का आटा और ड्राई फ्रूट के मूल्य में बहुत अंतर नहीं आया है।


ऐसे करें घट स्थापना
बक्सरियां स्थित श्री दुर्गा मंदिर के पुजारी अवधेश मिश्र ने बताया कि चैत्र नवरात्र पर कलश स्थापना के लिए वैसे तो ब्रह्ममुहूर्त से ही पुनीत समय है, लेकिन सर्वोत्तम समय पूर्वांह 11.36 से 12.24 बजे तक रहेगा। इस अवधि में घट (कलश) स्थापना की जा सकती है। बताया: स्नानादि से निवृत्त होकर कलश पर रोली से स्वस्तिक चिन्ह बनाएं और उसके गले में तीन धागा वाली मौलि लपेट दें। कलश स्थापित होने वाले स्थान या आसन पर कुमकुम-रोली से अष्टकमल बनाकर मिट्टी बिछा दें। मिट्टी पर जौं जरूर बोएं। कलश के अंदर जल के साथ गंगाजल, चंदन, दूर्बा, पंच पल्लव, कुश, सुपारी, पंचरत्न, द्रव्य आदि भी डाल दें। चावल से भरे पूर्ण पात्र को कलश पर रख दें और फिर पति-पत्नी अथवा उपवास रखने वाले अन्य सदस्य कलश पर लाल कपड़ा लपेटकर नारियल स्थापित कर दें। सभी देवी देवताओं का आवाहन करते हुए मां दुर्गा की स्तुति करें।
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