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भवसागर पार करने का आधार है रामकथा
शाहजहांपुर
Updated Fri, 04 Dec 2015 10:30 PM IST
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राजस्थान के सीकर से आए अखिल भारतीय गायत्री परिवार के कथावाचक पीयूषपति त्रिपाठी ने पुवायां के मोहल्ला तकिया में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में श्रीराम जन्म की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर श्रीराम जन्म की कथा सुनाई जाती है, वहां सभी तीर्थ आ जाते हैं। रामकथा का श्रवण और मनन कलयुग में भवसागर से पार होने का आधार है। जब भी प्रथ्वी पर अत्याचार बढ़ता है, तब ईश्वर अवतार लेकर धरती के पाप रूपी बोझ का हरण करते हैं। रावण के अत्याचारों से धरा के अकुला उठने और साधू संतों पर अत्याचार की पराकाष्ठा होने पर भगवान ने रामावतार लेकर पापियों का सर्वनाश किया और धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि भक्त जब सभी आसरे छोड़कर भगवान की शरण में जाते हैं तो वे उनकी उसी प्रकार रक्षा करते हैं जिस तरह माता अपने शिशु की करती है। जो लोग प्रभु का भजन नहीं करते हैं उनकी उपमा बिना पूंछ के पशु से की जाती है। कथा से पूर्व तमाम लोगों ने यज्ञ में भाग लेकर आहुतियां दी। महिलाओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर श्रीराम जन्म की कथा सुनाई जाती है, वहां सभी तीर्थ आ जाते हैं। रामकथा का श्रवण और मनन कलयुग में भवसागर से पार होने का आधार है। जब भी प्रथ्वी पर अत्याचार बढ़ता है, तब ईश्वर अवतार लेकर धरती के पाप रूपी बोझ का हरण करते हैं। रावण के अत्याचारों से धरा के अकुला उठने और साधू संतों पर अत्याचार की पराकाष्ठा होने पर भगवान ने रामावतार लेकर पापियों का सर्वनाश किया और धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि भक्त जब सभी आसरे छोड़कर भगवान की शरण में जाते हैं तो वे उनकी उसी प्रकार रक्षा करते हैं जिस तरह माता अपने शिशु की करती है। जो लोग प्रभु का भजन नहीं करते हैं उनकी उपमा बिना पूंछ के पशु से की जाती है। कथा से पूर्व तमाम लोगों ने यज्ञ में भाग लेकर आहुतियां दी। महिलाओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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