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गांधी भवन की सीलिंग टूटी, बाल-बाल बचीं सांसद
शाहजहांपुर
Updated Tue, 01 Sep 2015 11:49 PM IST
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जिला प्रशासन की उपेक्षा का दंश झेल रहे गांधी भवन की जर्जर सीलिंग शनिवार के बाद सोमवार को फिर टूटकर गिरी। इस बार सांसद कृष्णा राज बाल-बाल बच गईं। सीलिंग में लगी प्लाई के कई भारी-भरकम टुकड़े उस समय गिर पड़े जब सांसद नाटक ‘दाराशिकोहÓ खत्म होने के बाद प्रेक्षागृह से बाहर निकल रही थीं। खैर यह हुई कि प्लाई के टुकड़े उनके इर्द-गिर्द ही गिरे। यदि ऊपर गिर जाते तो सांसद को गंभीर चोट आ सकती थी। प्रशासन की संवेदनशून्यता का हाल यह है कि वह गांधी भवन को कामधेनु समझ रहा है। सभागार की बुकिंग कर धन उगाही तो हो रही है, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। शनिवार को कई कलाकार उस समय बाल-बाल बच गए थे, जब नाटक की तैयारी के समय सभागार की पूर्वी गेट की सीढ़ियों पर प्लाई का पूरा तख्ता ही उखड़ कर आ गिरा था। अखबार में छपने के बाद भी प्रशासन ने उस प्लाई के तख्ते को उठवाने की और जरूरत नहीं समझी, इसका नतीजा यह हुआ कि कलाकारों को उसी स्थिति में नाटक खेलना पड़ा। नाटक के दूसरे दिन यानी 31 अगस्त को एकबार फिर सीलिंग टूट गई।
सीलिंग टूटने से बाल-बाल बची सांसद और उनके समर्थक उस समय तो चुपचाप चले आए, लेकिन मंगलवार सुबह उन्होंने गांधी भवन की दुर्दशा पर गहरा रोष जताया और प्रशासन को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने गांधी भवन की देखरेख करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट को फोन पर काफी नाराजगी दर्ज कराई और एक साल का आय-व्यय तक मांग डाला। सांसद का कहना था कि जिले में सांस्कृतिक गतिविधियों के इकलौते केंद्र की दुर्दशा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सांसद ने कहा कि डीएम इस मामले में चुप कैसे रह सकती हैं, इससे पहले कि कोई बड़ी दुर्घटना हो, प्रेक्षागृह का जीर्णोद्धार कराया जाए। यदि कोई अनहोनी होती है, तो उसके लिए सीधे जिला प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।
यहां बता दें कि प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे गांधी भवन की हालत यह है कि वहां कोई कार्यक्रम होता है तो सीलिंग में घुसे बंदर गदर काटते रहते हैं। इससे स्थिति और भी भयावह होने लगती है। बरसात में टूटी सीलिंग से सभागार में नाले चलने लगते हैं। स्टेज का भारीभरकम परदा संचालित करने वाली मशीन वर्षों से खराब पड़ी है, कई कीमती लाइटें और साउंड सिस्टम बदहाल है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजकों के मिन्नतें करने के बावजूद डीएम या उनके आला अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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जीर्णोद्धार नहीं बुकिंग जारी है
प्रशासन की हालत यह है कि एक ओर वह गांधी भवन का जीर्णोद्धार नहीं करा रहा है, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रमों की बुकिंग बदस्तूर जारी किए हुए है। इससे लगता है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार वास्तव में कर रहा है। बुधवार को भी एक नाटक गांधी भवन में खेला जाना है और एक नाटक अगले सप्ताह होने को है। प्रशासन के लिए दुधारू गाय बने गांधी भवन में इस दौरान कोई अनहोनी न हो, इसके लिए कलाकार ऊपरवाले से प्रार्थना कर रहे है।
- कृष्णाराज, सांसद
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सीलिंग टूटने से बाल-बाल बची सांसद और उनके समर्थक उस समय तो चुपचाप चले आए, लेकिन मंगलवार सुबह उन्होंने गांधी भवन की दुर्दशा पर गहरा रोष जताया और प्रशासन को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने गांधी भवन की देखरेख करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट को फोन पर काफी नाराजगी दर्ज कराई और एक साल का आय-व्यय तक मांग डाला। सांसद का कहना था कि जिले में सांस्कृतिक गतिविधियों के इकलौते केंद्र की दुर्दशा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सांसद ने कहा कि डीएम इस मामले में चुप कैसे रह सकती हैं, इससे पहले कि कोई बड़ी दुर्घटना हो, प्रेक्षागृह का जीर्णोद्धार कराया जाए। यदि कोई अनहोनी होती है, तो उसके लिए सीधे जिला प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।
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यहां बता दें कि प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे गांधी भवन की हालत यह है कि वहां कोई कार्यक्रम होता है तो सीलिंग में घुसे बंदर गदर काटते रहते हैं। इससे स्थिति और भी भयावह होने लगती है। बरसात में टूटी सीलिंग से सभागार में नाले चलने लगते हैं। स्टेज का भारीभरकम परदा संचालित करने वाली मशीन वर्षों से खराब पड़ी है, कई कीमती लाइटें और साउंड सिस्टम बदहाल है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजकों के मिन्नतें करने के बावजूद डीएम या उनके आला अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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जीर्णोद्धार नहीं बुकिंग जारी है
प्रशासन की हालत यह है कि एक ओर वह गांधी भवन का जीर्णोद्धार नहीं करा रहा है, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रमों की बुकिंग बदस्तूर जारी किए हुए है। इससे लगता है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार वास्तव में कर रहा है। बुधवार को भी एक नाटक गांधी भवन में खेला जाना है और एक नाटक अगले सप्ताह होने को है। प्रशासन के लिए दुधारू गाय बने गांधी भवन में इस दौरान कोई अनहोनी न हो, इसके लिए कलाकार ऊपरवाले से प्रार्थना कर रहे है।
- कृष्णाराज, सांसद