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भगवत शरण में ही मिलेगा आनंद : गुप्तेश्वर पांडेय
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जलालाबाद में भागवत कथा सुनती महिला श्रद्धालु।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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जलालाबाद। गांव कोला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बिहार के पूर्व डीजीपी व कथावाचक गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा है कि गुरु और शिष्य तथा भगवान और भक्त के बीच बिना बात किए संवाद की निरंतरता स्थापित हो जाए, वहीं से आध्यात्म विद्या की शुरुआत होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान निष्काम भक्ति और भाव के भूखे हैं। भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के यहां छप्पन प्रकार के भोग का तिरस्कार कर दिया और भक्त विदुर के यहां साग-रोटी केवल इसलिए खाई, क्योंकि उन्होंने अंतर्मन से भगवान को याद किया था। इसकी आवाज प्रभु के कानों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि न चाहते हुए भी उसके यहां खाने की विवशता हो जाती है, जहां खिलाने वाले में श्रद्धाभाव हो।
उन्होंने कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति सुख पाने की तलाश में भटक रहा है, परंतु वह सुख पैसे में तलाश रहा है। बोले- आनंद तभी मिलेगा जब जीव भगवत शरण में जाएगा। जिस तरह अथाह जल पाकर मछली को आनंद मिलता है उसी प्रकार भगवत प्राप्ति सभी दुखों का विनाश करती है। कथा के अंत में आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान कृष्ण कुमार मंगलम, वीकेश गुप्ता, प्रेमपाल गुर्जर, वीरेंद्र अग्निहोत्री, एमके त्रिवेदी, ओमकार गुप्ता, निखिल गुप्ता, सुनैना गुप्ता आदि बराबर व्यवस्था में लगे रहे।
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उन्होंने कहा कि भगवान निष्काम भक्ति और भाव के भूखे हैं। भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के यहां छप्पन प्रकार के भोग का तिरस्कार कर दिया और भक्त विदुर के यहां साग-रोटी केवल इसलिए खाई, क्योंकि उन्होंने अंतर्मन से भगवान को याद किया था। इसकी आवाज प्रभु के कानों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि न चाहते हुए भी उसके यहां खाने की विवशता हो जाती है, जहां खिलाने वाले में श्रद्धाभाव हो।
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उन्होंने कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति सुख पाने की तलाश में भटक रहा है, परंतु वह सुख पैसे में तलाश रहा है। बोले- आनंद तभी मिलेगा जब जीव भगवत शरण में जाएगा। जिस तरह अथाह जल पाकर मछली को आनंद मिलता है उसी प्रकार भगवत प्राप्ति सभी दुखों का विनाश करती है। कथा के अंत में आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान कृष्ण कुमार मंगलम, वीकेश गुप्ता, प्रेमपाल गुर्जर, वीरेंद्र अग्निहोत्री, एमके त्रिवेदी, ओमकार गुप्ता, निखिल गुप्ता, सुनैना गुप्ता आदि बराबर व्यवस्था में लगे रहे।
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