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अयोध्या की वधू बनीं जनकनंदिनी सीता
शाहजहांपुर।
Updated Thu, 15 Oct 2015 11:35 PM IST
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ओसीएफ और नगर रामलीला में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। महिलाएं और बच्चे रामलीला देखने के लिए दोनों जगहों पर सुविधानुसार पहुंच रहे हैं। ओसीएफ में रामलीला के साथ मेला प्रदर्शनी में भी भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।
ओसीएफ रामलीला में बृहस्पतिवार को विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांगने पहुंच जाते हैं। राजा दशरथ न चाहते हुए भी दोनों बेटों को गुरु के साथ भेज देते हैं। वन में राम और लक्ष्मण ताड़का आदि राक्षसों का वध करते हैं। इतना ही नहीं विश्वामित्र के साथ जाते हुए वह पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार भी करते हैं। जनकपुर पहुंचकर दोनों भाई वहां के नागरिकों को दर्शन देकर सभी के चहेते बन जाते हैं, यहां सीता से उनकी मुलाकात होती है। धनुष यज्ञ में राम जनक की शर्त पूरी करते हुए भगवान शिव का धनुष तोड़ देते हैं। सीता जी राम को वरमाला पहनाती हैं। इसके बाद सभी ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद लीला का आनंद लिया।
इधर, नगर रामलीला में मंथरा की साजिश में कैकेयी फंस जाती हैं, और वह भरत के लिए राज्य तथा राम को चौदह वर्षाें का वनवास राजा दशरथ से मांगती हैं। दशरथ अपनी बात याद करते हुए मना नहीं कर पाते हैं और उन्हें अपने प्रिय पुत्र राम को वनवास भेजना पड़ता है। राम के साथ लक्ष्मण और सीता भी राम के साथ वनवास जाते हैं। पुत्र वियोग में राजा दशरथ अचेत हो जाते हैं। गंगा के किनारे केवट प्रभु राम को गंगा पार कराने के लिए अपनी शर्त रखते हैं। इससे पूर्व लीला का शुभारंभ समिति अध्यक्ष निर्भय चंद्र सेठ उर्फ जापान बाबू ने पत्नी लता सेठ के साथ भगवान अद्र्धनारीश्वर की झांकी आरती कर किया। इसी कड़ी में अन्य श्रद्धालुओं ने भी आरती की।
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रामलीला में आज
- नगर रामलीला में दशरथ मरण, भरत-कैकेयीे संवाद, चित्रकूट में राम-भरत मिलाप आदि लीलाओं का मंचन।
- ओसीएफ रामलीला में राम राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी का दशरथ से वरदान प्राप्त करना, राम वनगमन आदि लीलाओं का मंचन।
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ओसीएफ रामलीला में बृहस्पतिवार को विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांगने पहुंच जाते हैं। राजा दशरथ न चाहते हुए भी दोनों बेटों को गुरु के साथ भेज देते हैं। वन में राम और लक्ष्मण ताड़का आदि राक्षसों का वध करते हैं। इतना ही नहीं विश्वामित्र के साथ जाते हुए वह पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार भी करते हैं। जनकपुर पहुंचकर दोनों भाई वहां के नागरिकों को दर्शन देकर सभी के चहेते बन जाते हैं, यहां सीता से उनकी मुलाकात होती है। धनुष यज्ञ में राम जनक की शर्त पूरी करते हुए भगवान शिव का धनुष तोड़ देते हैं। सीता जी राम को वरमाला पहनाती हैं। इसके बाद सभी ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद लीला का आनंद लिया।
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इधर, नगर रामलीला में मंथरा की साजिश में कैकेयी फंस जाती हैं, और वह भरत के लिए राज्य तथा राम को चौदह वर्षाें का वनवास राजा दशरथ से मांगती हैं। दशरथ अपनी बात याद करते हुए मना नहीं कर पाते हैं और उन्हें अपने प्रिय पुत्र राम को वनवास भेजना पड़ता है। राम के साथ लक्ष्मण और सीता भी राम के साथ वनवास जाते हैं। पुत्र वियोग में राजा दशरथ अचेत हो जाते हैं। गंगा के किनारे केवट प्रभु राम को गंगा पार कराने के लिए अपनी शर्त रखते हैं। इससे पूर्व लीला का शुभारंभ समिति अध्यक्ष निर्भय चंद्र सेठ उर्फ जापान बाबू ने पत्नी लता सेठ के साथ भगवान अद्र्धनारीश्वर की झांकी आरती कर किया। इसी कड़ी में अन्य श्रद्धालुओं ने भी आरती की।
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रामलीला में आज
- नगर रामलीला में दशरथ मरण, भरत-कैकेयीे संवाद, चित्रकूट में राम-भरत मिलाप आदि लीलाओं का मंचन।
- ओसीएफ रामलीला में राम राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी का दशरथ से वरदान प्राप्त करना, राम वनगमन आदि लीलाओं का मंचन।