{"_id":"6ad7b800ff7dca782f0e4d56","slug":"as-the-arrow-struck-his-navel-the-lord-of-lanka-fell-the-effigies-of-ravana-and-meghnada-went-up-in-roaring-flames-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1042-188008-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: नाभि में बाण लगते ही गिरा लंकेश...धू-धूकर जले रावण व मेघनाद के पुतले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: नाभि में बाण लगते ही गिरा लंकेश...धू-धूकर जले रावण व मेघनाद के पुतले
विज्ञापन
खिरनीबाग रामलीला में श्री राम और रावण के बीच युद्ध की लीला के प्रसंग का मंचन करते कलाकार। संवाद
शाहजहांपुर। विजयदशमी पर मंगलवार को खिरनीबाग रामलीला मैदान पर अहिरावण और रावण वध की लीला का मंचन किया गया। विभीषण की सलाह पर श्रीराम का बाण लंकेश की नाभि में लगते ही अमृत सूखने पर वह धराशायी हो जाता है। इसके बाद रावण और मेघनाद के पुतले जलाए गए। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
रात करीब दस बजे लीला के मंचन में मेघनाद के वध के बाद रावण पाताल लोक से अहिरावण को बुलाकर सेना की कमान सौंपता है। अहिरावण छल से श्रीराम और लक्ष्मण का हरण कर उन्हें पाताल लोक ले जाता है, जहां उनकी बलि देने की तैयारी होती है। इसकी जानकारी मिलने पर हनुमान पाताल लोक पहुंचते हैं और अहिरावण का वध कर श्रीराम-लक्ष्मण को सुरक्षित वापस लाते हैं। इसके बाद रावण स्वयं रणभूमि में उतरता है।
श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध होता है। विभीषण की सलाह पर भगवान राम अग्निबाण से रावण की नाभि में स्थित अमृतकुंड को सुखा देते हैं और उसके दस सिर व बीस भुजाओं को काटकर उसका वध कर देते हैं। रावण वध की लीला के मंचन के बाद आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया। आधी रात के बाद विभीषण ने सबसे पहले मेघनाद के पुतले को जलाया। इसके बाद रावण के पुतले को आग दी गई।
विज्ञापन
पुतले जलते ही पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इससे पहले वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कलाकारों को सम्मानित किया। कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश सिंघल, उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल, मेला सचिव नरेंद्र मिश्रा गुरु, प्रबंधक नीरज वाजपेयी, चंद्रशेखर खन्ना धीरू, मनीष खन्ना, नितेश गुप्ता, राहुल खन्ना आदि मौजूद रहे।
--
रावण के पुतले के पैर छूने का रहा उत्साह
खिरनीबाग रामलीला मैदान पर रावण और मेघनाद के पुतले खड़े होने के बाद मंगलवार सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। रावण के पुतले के पैर छूने के लिए लोगों में खासा उत्साह नजर आया। इस बीच पुतले के साथ सेल्फी भी ली गई।
--
विज्ञापन
रात करीब दस बजे लीला के मंचन में मेघनाद के वध के बाद रावण पाताल लोक से अहिरावण को बुलाकर सेना की कमान सौंपता है। अहिरावण छल से श्रीराम और लक्ष्मण का हरण कर उन्हें पाताल लोक ले जाता है, जहां उनकी बलि देने की तैयारी होती है। इसकी जानकारी मिलने पर हनुमान पाताल लोक पहुंचते हैं और अहिरावण का वध कर श्रीराम-लक्ष्मण को सुरक्षित वापस लाते हैं। इसके बाद रावण स्वयं रणभूमि में उतरता है।
विज्ञापन
श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध होता है। विभीषण की सलाह पर भगवान राम अग्निबाण से रावण की नाभि में स्थित अमृतकुंड को सुखा देते हैं और उसके दस सिर व बीस भुजाओं को काटकर उसका वध कर देते हैं। रावण वध की लीला के मंचन के बाद आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया। आधी रात के बाद विभीषण ने सबसे पहले मेघनाद के पुतले को जलाया। इसके बाद रावण के पुतले को आग दी गई।
विज्ञापन
पुतले जलते ही पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इससे पहले वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कलाकारों को सम्मानित किया। कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश सिंघल, उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल, मेला सचिव नरेंद्र मिश्रा गुरु, प्रबंधक नीरज वाजपेयी, चंद्रशेखर खन्ना धीरू, मनीष खन्ना, नितेश गुप्ता, राहुल खन्ना आदि मौजूद रहे।
रावण के पुतले के पैर छूने का रहा उत्साह
खिरनीबाग रामलीला मैदान पर रावण और मेघनाद के पुतले खड़े होने के बाद मंगलवार सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। रावण के पुतले के पैर छूने के लिए लोगों में खासा उत्साह नजर आया। इस बीच पुतले के साथ सेल्फी भी ली गई।