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अपराजिता बनने के लिए स्वस्थ तन और मन भी जरूरी
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शाहजहांपुर। अपराजिता बनने के लिए शरीर और मन का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत बुधवार को शहर के नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता मोहन ने छात्राओं को हेल्थ और हाईजीन के टिप्स देने के साथ ही उनकी शंकाओं का समाधान किया।
डॉ. संगीता ने कहा कि केवल शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना काफी नहीं है, बल्कि हमें आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्वस्थ होना होगा। जब हम इन पांच प्रकार से स्वस्थ होंगे, तभी अपराजिता बनकर परिवार, समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकेंगे। उन्होंने छात्राओं को शारीरिक बदलाव के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। यदि पीरियड 40 दिन बाद या फिर माह में दो बार हों तो चिकित्सक का परामर्श अवश्य लेें। पीरियड्स तीन से सात दिन तक चल सकते हैं, तीन से कम और सात दिन से अधिक समय होना गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और लड़कियों को स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भले ही वे एक-दो दिन स्नान न करें, लेकिन अपने निजी वस्त्रों को धूप में भली प्रकार सुखाएं। अन्यथा बीमारियां बढ़ती ही रहेंगी। साथ ही मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें, खासकर हरी सब्जियों को महत्व दें। जो अच्छा लगता हो, उसके बजाय जो अच्छा है, वह खाएं। फास्टफूड के बजाय सुबह को हैवी नाश्ता करें और रात का भोजन हल्का लें। सुबह को हल्की एक्सरसाइज और योग भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षिकाओं और माताओं से कहा कि वे लड़कियों की काउंसिलिंग कर उचित-अनुचित के बारे में बताएं। साथ ही छात्राओं की समस्याओं का शंका समाधान भी किया। इससे पहले प्रधानाचार्य डॉ. शाइस्ता नसीम ने उनका स्वागत किया। सदफ खान के संचालन में हुए कार्यक्रम में बुशरा यूसुफी, लुबना मुख्तार आदि शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं।
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डॉ. संगीता ने कहा कि केवल शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना काफी नहीं है, बल्कि हमें आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्वस्थ होना होगा। जब हम इन पांच प्रकार से स्वस्थ होंगे, तभी अपराजिता बनकर परिवार, समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकेंगे। उन्होंने छात्राओं को शारीरिक बदलाव के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। यदि पीरियड 40 दिन बाद या फिर माह में दो बार हों तो चिकित्सक का परामर्श अवश्य लेें। पीरियड्स तीन से सात दिन तक चल सकते हैं, तीन से कम और सात दिन से अधिक समय होना गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और लड़कियों को स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भले ही वे एक-दो दिन स्नान न करें, लेकिन अपने निजी वस्त्रों को धूप में भली प्रकार सुखाएं। अन्यथा बीमारियां बढ़ती ही रहेंगी। साथ ही मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें, खासकर हरी सब्जियों को महत्व दें। जो अच्छा लगता हो, उसके बजाय जो अच्छा है, वह खाएं। फास्टफूड के बजाय सुबह को हैवी नाश्ता करें और रात का भोजन हल्का लें। सुबह को हल्की एक्सरसाइज और योग भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षिकाओं और माताओं से कहा कि वे लड़कियों की काउंसिलिंग कर उचित-अनुचित के बारे में बताएं। साथ ही छात्राओं की समस्याओं का शंका समाधान भी किया। इससे पहले प्रधानाचार्य डॉ. शाइस्ता नसीम ने उनका स्वागत किया। सदफ खान के संचालन में हुए कार्यक्रम में बुशरा यूसुफी, लुबना मुख्तार आदि शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं।
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