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कोरोना के संकट काल में कृषि पर मंडराया टिड्डियों के हमले का खतरा
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शाहजहांपुर। कोरोना महामारी संकट काल में सब्जियों की खेती में हो रहे घाटे से किसान पहले से परेशान हैं। इस हालात में कृषि पर टिड्डियों के मंडराते खतरे ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के रास्ते टिड्डियों का दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में हमला कर सकता है। इन जिलों में शाहजहांपुर भी शामिल है। इसे देखते हुए कृषि रक्षा विभाग ने टिड्डियों से बचाव के लिए किसानों के गाइड लाइन जारी करने के साथ टिड्डियों के सफाए के लिए कई सुझाव दिए हैं। टिड्डी दल के आने की सूचना देने के लिए ब्लॉक स्तर की कृषि रक्षा इकाइयों पर कंट्रोल रूम खोलकर कनिष्ठ प्राविधिक सहायकों को प्रभारी नियुक्त कर दिया है।
धान, गन्ना आदि फसलें बचाने की जरूरत
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार टिड्डी बहुभोजी कीट है। इनमें एक झुंड में टिड्यिों की संख्या लगभग एक हजार मिलियन होती है। एक झुंड लगभग 20 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करके प्रतिदिन तीन हजार टन वनस्पति खा सकता है। यह कीट धान, गन्ना, बाजरा, मक्का, तिलहन एवं दलहन आदि फसलों की हरी पत्तियां खाता है। जिले में 2.57 लाख हेक्टेयर जमीन में किसानों ने सब्जियों के साथ बरसीम, धान आदि उगाने की तैयारी की है। इसी तरह लगभग एक लाख हेक्टेयर मेें गन्ने की फसल की जाती है, जबकि मक्का और तिलहन का रकबा 50 हजार हेक्टेयर तक सीमित रहता है। टिड्डियों का हमला होने की दशा में इन सभी फसलों को बचाने की जरूरत पड़ेगी।
इस तरह फसलों को बचाना संभव
टिड्डी के प्रकोप की दशा में किसान एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डब्बे, थालियां, घंटे आदि बजाकर शोर करें ताकि टिड्डियों का झुंड खेत से उड़ जाए। यह कीट जमीन के पांच सेमी नीचे गड्ढा बनाकर अंडे देता है। अंडे से निकलने वाले बिना पंख के हॉपर फसल खाकर दो-तीन माह में प्रौढ़ हो जाते हैं। यही प्रौढ़ टिड्डी दल बनकर फसल खाते हैं। इनकी बढ़वार रोकने के लिए बलुई मिट्टी वाले खेतों में जुताई कर उनमें पानी भर दें। ऐसी दशा में उनके विकास की आशंका टल जाएगी। प्रकोप होने की दशा में क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत, लैमडासाईहैलोथ्रिन पांच प्रतिशत, मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत, मैलाथियान 96 प्रतिशत अथवा फिप्रोनिल पांच प्रतिशत आदि रसायनों का नियत मात्रा मेें पानी मेें घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।
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टिड्डी दल का प्रकोप बहुत जल्द फसलों के लिए महामारी का रूप ले लेता है। इसलिए जरूरी है कि जिले मेें लगातार टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी की जाए। किसान भाई सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा को खेतों की नियमित देखभाल करें। टिड्डियों का प्रकोप होने पर ग्राम प्रधान, लेखपाल, पंचायत सचिव अथवा कृषि रक्षा इकाइयों के कंट्रोल रूम से तत्काल संपर्क करें। - शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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धान, गन्ना आदि फसलें बचाने की जरूरत
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार टिड्डी बहुभोजी कीट है। इनमें एक झुंड में टिड्यिों की संख्या लगभग एक हजार मिलियन होती है। एक झुंड लगभग 20 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करके प्रतिदिन तीन हजार टन वनस्पति खा सकता है। यह कीट धान, गन्ना, बाजरा, मक्का, तिलहन एवं दलहन आदि फसलों की हरी पत्तियां खाता है। जिले में 2.57 लाख हेक्टेयर जमीन में किसानों ने सब्जियों के साथ बरसीम, धान आदि उगाने की तैयारी की है। इसी तरह लगभग एक लाख हेक्टेयर मेें गन्ने की फसल की जाती है, जबकि मक्का और तिलहन का रकबा 50 हजार हेक्टेयर तक सीमित रहता है। टिड्डियों का हमला होने की दशा में इन सभी फसलों को बचाने की जरूरत पड़ेगी।
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इस तरह फसलों को बचाना संभव
टिड्डी के प्रकोप की दशा में किसान एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डब्बे, थालियां, घंटे आदि बजाकर शोर करें ताकि टिड्डियों का झुंड खेत से उड़ जाए। यह कीट जमीन के पांच सेमी नीचे गड्ढा बनाकर अंडे देता है। अंडे से निकलने वाले बिना पंख के हॉपर फसल खाकर दो-तीन माह में प्रौढ़ हो जाते हैं। यही प्रौढ़ टिड्डी दल बनकर फसल खाते हैं। इनकी बढ़वार रोकने के लिए बलुई मिट्टी वाले खेतों में जुताई कर उनमें पानी भर दें। ऐसी दशा में उनके विकास की आशंका टल जाएगी। प्रकोप होने की दशा में क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत, लैमडासाईहैलोथ्रिन पांच प्रतिशत, मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत, मैलाथियान 96 प्रतिशत अथवा फिप्रोनिल पांच प्रतिशत आदि रसायनों का नियत मात्रा मेें पानी मेें घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।
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टिड्डी दल का प्रकोप बहुत जल्द फसलों के लिए महामारी का रूप ले लेता है। इसलिए जरूरी है कि जिले मेें लगातार टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी की जाए। किसान भाई सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा को खेतों की नियमित देखभाल करें। टिड्डियों का प्रकोप होने पर ग्राम प्रधान, लेखपाल, पंचायत सचिव अथवा कृषि रक्षा इकाइयों के कंट्रोल रूम से तत्काल संपर्क करें। - शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी