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सांस की नली में दूध फंसा पांच माह के शिशु की मौत
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मृतक बच्चे का फाइल फोटो
- फोटो : SHAHJAHANPUR
बाराकलां (शाहजहांपुर)। मजदूरी करने पानीपत गए गांव खजुरी निवासी राहुल के परिवार में बुधवार को उस वक्त मातम पसर गया, जब उन्हें खबर मिली कि पानीपत में राहुल के पांच माह के अबोध बेटे की सांस नली में दूध फंसने के कारण दम घुटने से मौत हो गई।
खजुरी गांव निवासी श्यामवीर के पुत्र राहुल की पत्नी ने पांच माह पहले एक बेटे को जन्म दिया था। राहुल का एक और बेटा डेढ़ साल का है। बाद में राहुल पत्नी और दोनों बेटों के साथ मजदूरी के लिए पानीपत चला गया। राहुल को परिवार समेत वहां रहते पांच माह बीत चुके हैं। बुधवार दोपहर राहुल की एक फोन काल से घर में विलाप होने लगा। मोहल्ले वालों का उसके घर पर जमावड़ा लग गया। परिवारजन ने बताया कि राहुल की पत्नी आज दोपहर छोटे बेटे को दूध पिला रही थी। इसी दौरान दूध उसकी सांस नली में अटक गया। बच्चे की हालत बिगड़ने पर जब तक उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी की, उसकी सांसें थमने से मौत हो गई।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए दूध की सीमित खुराक बहुत महत्वपूर्ण है। तीन से चार माह तक के बच्चे एक बार में 25 से 30 मिमी दूध पी सकते हैं, लेकिन अक्सर महिलाएं 100 से 150 मिमी दूध बोतल में भरकर उनके मुंह में लगा देती हैं। बच्चा लगातार दूध पीता है जो उनके गले तक भरकर सांस नली में चला जाता है। उनका सुझाव है कि तीन से पांच माह तक के बच्चों को ढो-ढाई घंटे के अंतराल पर सीमित मात्रा में दूध पिलाएं और दूध पिलाने के बाद उन्हें कंधे पर लेकर थपकी देता कि उसे डकार आ सके। अगर बच्चा सोते वक्त दूध पी रहा है तो बाद उसके सिर के नीचे तकिया लगाकर उसे बाईं करवट दिलानी चाहिए।
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खजुरी गांव निवासी श्यामवीर के पुत्र राहुल की पत्नी ने पांच माह पहले एक बेटे को जन्म दिया था। राहुल का एक और बेटा डेढ़ साल का है। बाद में राहुल पत्नी और दोनों बेटों के साथ मजदूरी के लिए पानीपत चला गया। राहुल को परिवार समेत वहां रहते पांच माह बीत चुके हैं। बुधवार दोपहर राहुल की एक फोन काल से घर में विलाप होने लगा। मोहल्ले वालों का उसके घर पर जमावड़ा लग गया। परिवारजन ने बताया कि राहुल की पत्नी आज दोपहर छोटे बेटे को दूध पिला रही थी। इसी दौरान दूध उसकी सांस नली में अटक गया। बच्चे की हालत बिगड़ने पर जब तक उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी की, उसकी सांसें थमने से मौत हो गई।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए दूध की सीमित खुराक बहुत महत्वपूर्ण है। तीन से चार माह तक के बच्चे एक बार में 25 से 30 मिमी दूध पी सकते हैं, लेकिन अक्सर महिलाएं 100 से 150 मिमी दूध बोतल में भरकर उनके मुंह में लगा देती हैं। बच्चा लगातार दूध पीता है जो उनके गले तक भरकर सांस नली में चला जाता है। उनका सुझाव है कि तीन से पांच माह तक के बच्चों को ढो-ढाई घंटे के अंतराल पर सीमित मात्रा में दूध पिलाएं और दूध पिलाने के बाद उन्हें कंधे पर लेकर थपकी देता कि उसे डकार आ सके। अगर बच्चा सोते वक्त दूध पी रहा है तो बाद उसके सिर के नीचे तकिया लगाकर उसे बाईं करवट दिलानी चाहिए।
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