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मातमी माहौल में मनाया गया मोहर्रम

Sat, 16 Nov 2013 05:45 AM IST
Shahjahanpur
Shahjahanpur Updated Sat, 16 Nov 2013 05:45 AM IST
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- पुवायां, खुटार, बंडा क्षेत्र में उठाए गए ताजिये
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। प्यारे नवी के नबासे हजरत इमाम हसन और हुसैन की याद में मोहर्रम जिले में मातमी माहौल में मनाया गया। इस दौरान ईदगाहों में मेले भी लगे। मेलों में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस मौजूद रही।
पुवायां। क्षेत्र के करनापुर, पकड़िया हकीम, सकरापुर, घनश्यामपुर, अनावां, खिरिया पाठक आदि गांवों में ताजिये उठाकर मोहर्रम मातमी माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने शहीदों को याद किया। ईदगाहों पर लगे मेलों में महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीददारी की। इस दौरान एसडीएम विनय पाठक और सीओ बसंतलाल ने सभी स्थानों पर जाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
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खुटार। नगर के देवस्थान, नरायनपुर, चूड़ी वाली गली और गांव सौंफरी से ढोल नगाड़ों के साथ ताजिये ईदगाह लाए गए। इस दौरान ताजियों के साथ तमाम लोग या हुसैन के नारे लगाते हुए चल रहे थे। महिलाएं भी भारी संख्या में ताजियों के साथ हजरत की याद में गीत गाते चल रही थीं। ताजियों में सभी धर्मों के लोगाें ने हिस्सा लिया। जुलूस के साथ सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त पुलिस बल भी मौजूद रहा।
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मुरादपुर। यहां भी ताजिये मातमी माहौल के बीच उठाए गए। देर शाम ताजियों को गांव हिटौटा के करबला में दफन कर दिया गया। इसके अलावा गांव हिटौटा, भरकलीगंज, जादौंपुर कलां, नवदिया नवाजपुर, चांदपुर, कैमहरिया, मतलूकपुर, मोहनपुर आदि में भी ताजिये उठाए गए। ईदगाह में लगे मेले में बच्चों ने खरीददारी की।
रामपुर कलां। गांव टाह खुर्द कलां में तमाम गांवों से ताजिये लाकर हजरत इमाम हुसैन और इमाम हसन की याद में मातमी माहौल के बीच दफन कर दिए गए। इस दौरान हजरत साहब की कुर्बानी याद की गई।
जलालाबाद। मोहर्रम की नौ तारीख के शहीद इमामों की याद में बनाए गए ताजियों को इमामबाड़ों में रखा गया, जहां तमाम अकीकतमंदों ने आकर फातिहा पढ़कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। इस दौरान सबीलों और दान देने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।

इमामबाड़ों में मर्सियों की गमगीन सदाएं कानों में गूूंजती रहीं। इससे अकीकतमंदों के दिलों में हजारों साल पहले करबला के मैदान का वह मंजर नुमाया हो उठा, जिसमें तमाम लोगों का कत्ल हुआ था। देर शाम से नगर के विभिन्न स्थानों पर रखे करीब दो दर्जन ताजियों को इमामबाड़ों से उठाकर मातमी धुनों के बीच गमगीन माहौल में निकट के ही शहीदे कर्बला में दफनाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा।
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