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वेदों का उत्पादक प्रभु है परम पवित्र: ओमव्रत
Shahjahanpur
Updated Sat, 24 Aug 2013 05:35 AM IST
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शाहजहांपुर। आर्य समाज मंदिर में चल रहे वेद प्रचार सप्ताह के अंतर्गत सत्संग भवन में आचार्य ओमव्रत शास्त्री ने वेदों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदों का उत्पादक प्रभु परमात्मा ही परम पवित्र है। उसका ध्यान चिंतन और अनुभूति ही हम लोगों में पावनता नहीं ला सके तो फिर पावनता की प्राप्ति स्वप्न ही रहेगी।
आचार्य श्री शास्त्री ने कहा कि वैदिक दर्शन में बुद्धि के परिष्कार को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। यदि हमारी मानसिक वृत्तियां पवित्र होंगी तो हमारे चरित्र में भी पवित्रता दिखलाई देगी। प्रथ्वी, वायु, अग्नि, जल, आकाश सब पवित्र हैं, लेकिन मनुष्य प्रकृति को अपवित्र करने में लगा हुआ है।
इस दौरान स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी ने श्रोताओं को दिए गए प्रवचन में बताया कि नैतिकता जिसमें सत्याचरण का श्रेष्ठ तत्व विद्यमान है। वह मनुष्य का सर्वोपरि गुण है। मनुष्य को झूठ बोलने का प्रयास करना पड़ता है, लेकिन सत्य के प्रति मानव का सहज आकर्षण होता है। कार्यक्रम का संचालन राजेश कुमार आर्य ने किया।
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आचार्य श्री शास्त्री ने कहा कि वैदिक दर्शन में बुद्धि के परिष्कार को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। यदि हमारी मानसिक वृत्तियां पवित्र होंगी तो हमारे चरित्र में भी पवित्रता दिखलाई देगी। प्रथ्वी, वायु, अग्नि, जल, आकाश सब पवित्र हैं, लेकिन मनुष्य प्रकृति को अपवित्र करने में लगा हुआ है।
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इस दौरान स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी ने श्रोताओं को दिए गए प्रवचन में बताया कि नैतिकता जिसमें सत्याचरण का श्रेष्ठ तत्व विद्यमान है। वह मनुष्य का सर्वोपरि गुण है। मनुष्य को झूठ बोलने का प्रयास करना पड़ता है, लेकिन सत्य के प्रति मानव का सहज आकर्षण होता है। कार्यक्रम का संचालन राजेश कुमार आर्य ने किया।
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