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कुम्हलाया हरा चारा साइनाइड जैसा जहर
Shahjahanpur
Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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ग्रीष्मकालीन रोगों से पशुधन को बचाने की बनी रणनीति
- टीकाकरण को जारी हुई गलाघोंटू की 50 हजार वैक्सीन
- पशुओं को विषाक्तता से बचाने को चारे में लगाते रहें पानी
- 18 लाख में से 10 लाख से अधिक पशु हैं हरे चारे पर निर्भर
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। गर्मी के मौसम में अगर आपने पालतू पशुओं को कुम्हलाया हुआ हरा चारा खिलाया तो वे साइनाइड जैसे घातक जहर की विषाक्तता का शिकार होकर कई ग्रीष्मकालीन रोगों की चपेट में आ सकते हैं। बेहतर होगा कि हरे चारे में लगातार पानी लगाते रहें। गर्मी में पशुओं को होने वाली बीमारियों से निपटने की पशु चिकित्सा विभाग ने जो रणनीति बनाई, उसमें हरे चारे को जहरीला बनने से रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
जिले मेें विभिन्न श्रेणियों के करीब 18 लाख पशु हैं। इनमें गौवंशीय और महिषवंशीय श्रेणी के पशुओं की संख्या आठ लाख के आसपास है। इनमें अश्व प्रजाति और भेड़-बकरियों को जोड़ लिया जाए तो लगभग दस लाख से अधिक ऐसे पशु हैं जो भूसे और हरे चारे पर निर्भर हैं। गर्मी में, खासकर सूखा पड़ने की स्थिति में हरे चारे का हर साल संकट हो जाता है। कंबाइन से गेहूं की कटाई के कारण भूसा भी दो-तीन दशक पहले की तरह आसानी से सुलभ नहीं होता।
ऐसे में सूखे के दौरान पशुओं को कुम्हलाई घास चरने के लिए छोड़ देना या फिर मुरझाया हुआ चारा परोसने का मतलब होगा, उन्हें मौत के मुंह में धकेलना। पशु विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दिनों में बरसीम अथवा चरी में लगातार पानी नहीं दिए जाने से उसमें जहरीले तत्वों का समावेश हो जाता है। ऐसा चारा खाने से मौसमी रोगों में शुमार डायरिया, डीसेन्ट्री, वायरल फीवर, गलाघोंटू, पीठ-पैर में सूजन, लंगड़ापन जैसी बीमारियों से पशुओं के जकड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए डीएम के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग ने शहर में खिरनीबाग रामलीला मैदान, पुवायां रोड पर बस अड्डे के पास और अजीजगंज तिराहे पर पशु पालकों को भूसा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। यही नहीं, पशुओं को गलाघोंटू समेत अन्य बीमारियों से बचाने को जिले के सभी 28 पशु चिकित्सालयों पर वैक्सीन भेजकर एक मई से टीकाकरण भी शुरू करा दिया है।
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‘गर्मी में उन्हीं खेतों का हरा चारा पशुओं के खाने लायक होता, जिनमें 10-12 घंटे लगातार पानी भरा रहे। मुरझाया हुआ चारा खाने से पशु में ब्लैक क्वार्टर की बीमारी पैदा हो जाती है, जिससे शरीर पर सूजन और लंगड़ापन डेवलेप हो जाता है। टीकाकरण के लिए गलाघोंटू वैक्सीन की वॉयल सभी वेटनरी अस्पतालों को भिजवा दी गई हैं।’
- डॉ. सीएल पाल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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- टीकाकरण को जारी हुई गलाघोंटू की 50 हजार वैक्सीन
- पशुओं को विषाक्तता से बचाने को चारे में लगाते रहें पानी
- 18 लाख में से 10 लाख से अधिक पशु हैं हरे चारे पर निर्भर
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। गर्मी के मौसम में अगर आपने पालतू पशुओं को कुम्हलाया हुआ हरा चारा खिलाया तो वे साइनाइड जैसे घातक जहर की विषाक्तता का शिकार होकर कई ग्रीष्मकालीन रोगों की चपेट में आ सकते हैं। बेहतर होगा कि हरे चारे में लगातार पानी लगाते रहें। गर्मी में पशुओं को होने वाली बीमारियों से निपटने की पशु चिकित्सा विभाग ने जो रणनीति बनाई, उसमें हरे चारे को जहरीला बनने से रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
जिले मेें विभिन्न श्रेणियों के करीब 18 लाख पशु हैं। इनमें गौवंशीय और महिषवंशीय श्रेणी के पशुओं की संख्या आठ लाख के आसपास है। इनमें अश्व प्रजाति और भेड़-बकरियों को जोड़ लिया जाए तो लगभग दस लाख से अधिक ऐसे पशु हैं जो भूसे और हरे चारे पर निर्भर हैं। गर्मी में, खासकर सूखा पड़ने की स्थिति में हरे चारे का हर साल संकट हो जाता है। कंबाइन से गेहूं की कटाई के कारण भूसा भी दो-तीन दशक पहले की तरह आसानी से सुलभ नहीं होता।
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ऐसे में सूखे के दौरान पशुओं को कुम्हलाई घास चरने के लिए छोड़ देना या फिर मुरझाया हुआ चारा परोसने का मतलब होगा, उन्हें मौत के मुंह में धकेलना। पशु विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दिनों में बरसीम अथवा चरी में लगातार पानी नहीं दिए जाने से उसमें जहरीले तत्वों का समावेश हो जाता है। ऐसा चारा खाने से मौसमी रोगों में शुमार डायरिया, डीसेन्ट्री, वायरल फीवर, गलाघोंटू, पीठ-पैर में सूजन, लंगड़ापन जैसी बीमारियों से पशुओं के जकड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए डीएम के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग ने शहर में खिरनीबाग रामलीला मैदान, पुवायां रोड पर बस अड्डे के पास और अजीजगंज तिराहे पर पशु पालकों को भूसा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। यही नहीं, पशुओं को गलाघोंटू समेत अन्य बीमारियों से बचाने को जिले के सभी 28 पशु चिकित्सालयों पर वैक्सीन भेजकर एक मई से टीकाकरण भी शुरू करा दिया है।
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‘गर्मी में उन्हीं खेतों का हरा चारा पशुओं के खाने लायक होता, जिनमें 10-12 घंटे लगातार पानी भरा रहे। मुरझाया हुआ चारा खाने से पशु में ब्लैक क्वार्टर की बीमारी पैदा हो जाती है, जिससे शरीर पर सूजन और लंगड़ापन डेवलेप हो जाता है। टीकाकरण के लिए गलाघोंटू वैक्सीन की वॉयल सभी वेटनरी अस्पतालों को भिजवा दी गई हैं।’
- डॉ. सीएल पाल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी