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पॉवर सिस्टम कंट्रोल ने खराब किया सनडे भी
Shahjahanpur
Updated Mon, 08 Dec 2014 05:30 AM IST
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दोपहर से शाम तक लागू रखी रिकार्ड तोड़ कटौती
- सप्लाई शुरू होने से पहले पैना में जला जंपर
- दिन ढलने के बाद शहर में हुआ ब्लैक आउट
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। शुक्रवार तो पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल ने आपात कटौती करके खराब किया ही था, रविवार को सुबह 11 से शाम सात बजे तक बिजली गुल करके छुट्टी का मजा किरकिरा कर दिया। दोपहर में महज 25 मिनट लाइट आई। सर्दियों के दिनों में भी इस तरह की रिकार्ड तोड़ कटौती अब लोगों को परेशान कर रही है। बाकी कसर दिन ढले पैना सब स्टेशन में जंपर जलने से पूरी हो गई। नतीजे में दिन ढलने के बाद रात आठ बजे तक शहर ब्लैक आउट में डूबा रहा।
सिस्टम कंट्रोल ने गत कई माह से जिले में तीन चरणों में आठ घंटे की कटौती लागू कर रखी है। विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद नियमित कटौती में कोई रियायत नहीं मिलने पर संगठनों ने भी खामोशी ओढ़ ली। बावजूद इसके लखनऊ सिस्टम कंट्रोल से बिजली सप्लाई में सुधार के बजाय पॉवर कट का दायरा बढ़ाए जाने से सभी वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। इससे लोगों के रोजमर्रा के कामों में भी खलल पड़ रहा है।
बीते शुक्रवार को दोपहर नार्थ ग्रिड की फ्रीक्वेंसी घटने पर दोपहर सवा दो से शाम पांच बजे तक आपात कटौती लागू रखी गई। इसके बावजूद शाम पांच से सात बजे तक होने वाली कटौती में कोई राहत नहीं मिली। यही रविवार को हुआ। दिन में 11 से दो बजे तक नियमित कटौती के बाद बिजली आने पर छुट्टी के दिन नौकरीपेशा लोगों ने घरेलू काम निपटाने चाहे, लेकिन कुछ देर बाद ही शहर की बत्ती गुल हो गई। बहादुरगंज सब स्टेशन के प्रभारी जेई के अनुसार शाम पांच बजे तक शहर के सभी फीडरों पर ढाई घंटे की आपात कटौती प्रभावी की गई, लेकिन बिजली सप्लाई की नौबत आने से पहले पैना ट्रांसमिशन सब स्टेशन के नेटवर्क की खराबी ने बत्ती छीन ली।
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ट्रक हटाकर लगाया नया खंभा
सेहरामऊ दक्षिणी। बादशाहनगर सब स्टेशन को जाने वाली 33 केवी लाइन का एक खंभा ट्रक की टक्कर से टूट गया था। इससे कनेंग, बादशाहनगर और कहिलिया फीडर से जुड़े डेढ़ सौ से ज्यादा गांवों की बिजली गुल हो गई थी। नया खंभा लगाने का काम शनिवार से शुरू हुआ, जो रविवार शाम को पूरा कर लिया गया। इसके बाद पैना पॉवर हाउस से बिजली मिलने का इंतजार शुरू हुआ, मगर वहां हुआ फाल्ट रात आठ बजे ठीक होने के बावजूद शहर के कई इलाकों में सप्लाई शुरू नहीं हो सकी थी।
...तो गांव घोषित
कर दें मुख्यमंत्री
दोपहर से रात तक बिजली पाने को तरस गए शहरी बाशिंदों का गुस्सा उनकी बातों से झलकने लगा है। शहर के मोहल्ला चमकनी करबला के रहने वाले नीरज गुप्ता लखनऊ की एक कंपनी में कार्यरत हैं। आज छुट्टी मनाने घर आए तो बत्ती नसीब नहीं होने से मूड उखड़ गया। पूछने पर बोले: शहीदों की नगरी से ऐसा मजाक करने से बेहतर है कि मुख्यमंत्री शाहजहांपुर को गांव घोषित कर दें।
पब्लिक के साथ बेहद नाइंसाफी
‘दिन भर बिजली गायब रखना पब्लिक के साथ नाइंसाफी है। नियमित बिल जमा करने पर भी बिजली नहीं मिलना मानवाधिकार का हनन मान्य होना चाहिए।’
-पीके राठौर, सेवानिवृत्त कर्मचारी, आवास विकास
बिजलीपुरा वालों को
ज्यादा सता रही बिजली
‘हमारे मोहल्ले बिजलीपुरा को बिजली कुछ ज्यादा ही सता रही है। एक तो वैसे ही आए दिन लाइन फाल्ट होते हैं और अब इत्ती सारी कटौती।’
-शेख रफअत उल्ला, पूर्व उपाध्यक्ष, नगरपालिका परिषद
बिजली संकट से
कारोबार प्रभावित
‘बिजली संकट से कारोबार पर भी बुरा असर पड़ रहा है। पॉवर कारपोरेशन के अफसर सिस्टम सुधारने को तैयार नहीं जबकि सरकार पैसा देती है।’
-सर्राफ पंकज वर्मा, व्यापारी नेता, जलालनगर
इसके लिए महकमे की
लापरवाही जिम्मेदार
‘कटौती तो काी-कभार होती है, बिजली संकट के लिए महकमें के अफसर जिम्मेदार हैं जो लाइन फाल्ट समय से ठीक कराने पर ध्यान नहीं देते।’
- अश्विनी सक्सेना, बैंक कर्मचारी, आनंदपुरम्
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- सप्लाई शुरू होने से पहले पैना में जला जंपर
- दिन ढलने के बाद शहर में हुआ ब्लैक आउट
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। शुक्रवार तो पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल ने आपात कटौती करके खराब किया ही था, रविवार को सुबह 11 से शाम सात बजे तक बिजली गुल करके छुट्टी का मजा किरकिरा कर दिया। दोपहर में महज 25 मिनट लाइट आई। सर्दियों के दिनों में भी इस तरह की रिकार्ड तोड़ कटौती अब लोगों को परेशान कर रही है। बाकी कसर दिन ढले पैना सब स्टेशन में जंपर जलने से पूरी हो गई। नतीजे में दिन ढलने के बाद रात आठ बजे तक शहर ब्लैक आउट में डूबा रहा।
सिस्टम कंट्रोल ने गत कई माह से जिले में तीन चरणों में आठ घंटे की कटौती लागू कर रखी है। विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद नियमित कटौती में कोई रियायत नहीं मिलने पर संगठनों ने भी खामोशी ओढ़ ली। बावजूद इसके लखनऊ सिस्टम कंट्रोल से बिजली सप्लाई में सुधार के बजाय पॉवर कट का दायरा बढ़ाए जाने से सभी वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। इससे लोगों के रोजमर्रा के कामों में भी खलल पड़ रहा है।
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बीते शुक्रवार को दोपहर नार्थ ग्रिड की फ्रीक्वेंसी घटने पर दोपहर सवा दो से शाम पांच बजे तक आपात कटौती लागू रखी गई। इसके बावजूद शाम पांच से सात बजे तक होने वाली कटौती में कोई राहत नहीं मिली। यही रविवार को हुआ। दिन में 11 से दो बजे तक नियमित कटौती के बाद बिजली आने पर छुट्टी के दिन नौकरीपेशा लोगों ने घरेलू काम निपटाने चाहे, लेकिन कुछ देर बाद ही शहर की बत्ती गुल हो गई। बहादुरगंज सब स्टेशन के प्रभारी जेई के अनुसार शाम पांच बजे तक शहर के सभी फीडरों पर ढाई घंटे की आपात कटौती प्रभावी की गई, लेकिन बिजली सप्लाई की नौबत आने से पहले पैना ट्रांसमिशन सब स्टेशन के नेटवर्क की खराबी ने बत्ती छीन ली।
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ट्रक हटाकर लगाया नया खंभा
सेहरामऊ दक्षिणी। बादशाहनगर सब स्टेशन को जाने वाली 33 केवी लाइन का एक खंभा ट्रक की टक्कर से टूट गया था। इससे कनेंग, बादशाहनगर और कहिलिया फीडर से जुड़े डेढ़ सौ से ज्यादा गांवों की बिजली गुल हो गई थी। नया खंभा लगाने का काम शनिवार से शुरू हुआ, जो रविवार शाम को पूरा कर लिया गया। इसके बाद पैना पॉवर हाउस से बिजली मिलने का इंतजार शुरू हुआ, मगर वहां हुआ फाल्ट रात आठ बजे ठीक होने के बावजूद शहर के कई इलाकों में सप्लाई शुरू नहीं हो सकी थी।
...तो गांव घोषित
कर दें मुख्यमंत्री
दोपहर से रात तक बिजली पाने को तरस गए शहरी बाशिंदों का गुस्सा उनकी बातों से झलकने लगा है। शहर के मोहल्ला चमकनी करबला के रहने वाले नीरज गुप्ता लखनऊ की एक कंपनी में कार्यरत हैं। आज छुट्टी मनाने घर आए तो बत्ती नसीब नहीं होने से मूड उखड़ गया। पूछने पर बोले: शहीदों की नगरी से ऐसा मजाक करने से बेहतर है कि मुख्यमंत्री शाहजहांपुर को गांव घोषित कर दें।
पब्लिक के साथ बेहद नाइंसाफी
‘दिन भर बिजली गायब रखना पब्लिक के साथ नाइंसाफी है। नियमित बिल जमा करने पर भी बिजली नहीं मिलना मानवाधिकार का हनन मान्य होना चाहिए।’
-पीके राठौर, सेवानिवृत्त कर्मचारी, आवास विकास
बिजलीपुरा वालों को
ज्यादा सता रही बिजली
‘हमारे मोहल्ले बिजलीपुरा को बिजली कुछ ज्यादा ही सता रही है। एक तो वैसे ही आए दिन लाइन फाल्ट होते हैं और अब इत्ती सारी कटौती।’
-शेख रफअत उल्ला, पूर्व उपाध्यक्ष, नगरपालिका परिषद
बिजली संकट से
कारोबार प्रभावित
‘बिजली संकट से कारोबार पर भी बुरा असर पड़ रहा है। पॉवर कारपोरेशन के अफसर सिस्टम सुधारने को तैयार नहीं जबकि सरकार पैसा देती है।’
-सर्राफ पंकज वर्मा, व्यापारी नेता, जलालनगर
इसके लिए महकमे की
लापरवाही जिम्मेदार
‘कटौती तो काी-कभार होती है, बिजली संकट के लिए महकमें के अफसर जिम्मेदार हैं जो लाइन फाल्ट समय से ठीक कराने पर ध्यान नहीं देते।’
- अश्विनी सक्सेना, बैंक कर्मचारी, आनंदपुरम्