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इयरएंडर: ट्रांसफॉर्मरों के रखरखाव के लिए बजट को तरसता रहा बिजली विभाग
Updated Sun, 31 Dec 2017 11:54 PM IST
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ट्रांसफार्मर
- फोटो : अमर उजाला
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घनी आबादी के बीच सड़कों के किनारे खुले रखे हैं कई ट्रांसफार्मर
फेंसिंग कराने को कई बार निदेेशालय भेजी गई बजट की डिमांड
शाहजहांपुर।
जहां एक ओर जिले के पॉवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए सब स्टेशनों के निर्माण समेत छूटे हुए गांवों में विद्युतीकरण पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम करोड़ों की धनराशि पानी की तरह बहा रहा है, वहीं शहर मेें घनी आबादी के बीच सड़कों के किनारे खुले में रखे ट्रांसफार्मरों के रखरखाव को विभाग पूरे साल बजट को तरसता रहा। शहर में विभिन्न श्रेणियों के सैकड़ों ट्रांसफार्मरों पर बिजली नेटवर्क टिका हुआ है और इनमें से अनेक ट्रांसफार्मर कंक्रीट के फाउंडेशन पर खुले रखे हैं। नियमानुसार उनके आसपास लोहे के तारों वाली फेंसिंग होनी चाहिए, लेकिन बिजली महकमे के पास इसके लिए पैसा ही नहीं है। हालांकि, निदेशालय को ट्रांसफार्मरों की मेंटीनेंस के लिए बजट की डिमांड कई बार भेजी गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
शहर में 70 हजार बिजली कनेक्शनों को लगभग 350 किलोमीटर लंबी लाइनों से जोड़ा गया है। घरों-प्रतिष्ठानों में वोल्टेज का प्रवाह सामान्य बनाए रखने के लिए जगह-जगह विभिन्न श्रेणियों के 501 ट्रांसफार्मर रखकर उनसे लाइनों को निकाला गया। ज्यादातर ट्रांसफार्मर चौराहों, तिराहों और गलीनुमा रास्तों के नुक्कड़ों पर रखे गए हैं। यही नहीं, जगह की कमी के चलते कई ट्रांसफार्मर डबल पोल खड़े करके उन पर रख छोड़े गए हैं। जन सामान्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खंभों पर टंगे ट्रांसफार्मरों के नीचे इंसुलेटर लगाने और जमीन पर रखे गए ट्रांसफार्मर अर्थिंग से बचाने के लिए उनके कंक्रीट फाउंडेशन के आसपास लोहे के तारों की मजबूत बाड़ होना अनिवार्य है।
खुले ट्रांसफार्मरों से पहले भी हो चुकी हैं कई दुर्घटनाएं
ट्रांसफार्मरों की स्थापना के लिए विद्युत संरक्षा और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की शहर में कई स्थानों पर सरासर अनदेखी किए जाने से पहले भी कई बार जानलेवा दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। डॉन एंड डोना वाली गली के नुक्कड़ पर लगे ट्रांसफार्मर के तारों की चपेट में आकर गत वर्ष एक युवक की मौत हो चुकी है। इसी तरह लोधीपुर में दो साल पहले एक बालक की करंट से मौत हो चुकी है। ट्रांसफार्मरों के आसपास कूड़ा डाले जाने उनमें खाने-पीने की चीजें तलाशने वाले आवारा जानवर अक्सर करंट की चपेट में आकर जान गवां बैठते हैं। कूड़े में आग लगाए जाने की दशा में कई बार ट्रांसफार्मर भी लपटों की भेंट चढ़ चुके हैं।
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इन ठिकानों पर ट्रांसफार्मरों-लाइनों से मंडरा रहा खतरा
शहर में सुभाषनगर, ईदगाह तिराहा, मामुड़ी, ककरा कलां, तिलहरजई, मदराखेल, लोहारों का चौराहा, महमंद जलालनगर, रंगीन चौपाल, ऐमनजई जलालनगर की तराई बस्ती, अहमदपुर रेती, हयातपुरा, शहबाजनगर मोड़, रोशनगंज, मिश्रीपुर, ताहवरगंज आदि मोहल्लों में कई ट्रांसफार्मर इस तरह रखे हैं कि आसपास के अबोध बच्चे खेलते हुए उनके पास आसानी से पहुंच सकते हैं। यही नहीं, स्टेशन रोड जलालनगर की तराई बस्ती, रेती की नई बस्ती, ककरा कलां, मदराखेल, अजीजगंज, बाला तिराही आदि क्षेत्रों में लाइनें न होने से लोगों ने अपने सर्विस केबिल बांस-बल्लियों के सहारे बिछा रखे हैं और बारिश में ऐसे केबलों से करंट उतरने के मामले भी बढ़ जाते हैं।
नए साल में ट्रांसफार्मरों की देखभाल बढ़ने की उम्मीद
अधिकारी भी मानते हैं कि वर्ष 2017 में बिजली नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए कराए गए कई अहम कामों के बावजूद ट्रांसफार्मरों पर तारों की बाड़ लगाने का काम नहीं हो सका। एक्सईएन सिटी विवेक पटेल के अनुसार एक वर्ष के दौरान शहर को बंका घाट और सरायकाइयां में दो नए सब स्टेशन मिल गए। साथ ही कई सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई। इसी अवधि में अब्दुल्लागंज से कोतवाली तक करीब तीन किमी अंडरग्राउंड 11 केवी लाइन डाली गई। एक्सईएन पटेल के अनुसार बांस-बल्लियां वाली लाइनों की जगह पोल लगाकर तार बिछाने का काम शुरू हो चुका है। शहर में 16 ट्रांसफार्मरों की फेंसिंग कराने के लिए बजट की मांग लगातार हो रही है।
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फेंसिंग कराने को कई बार निदेेशालय भेजी गई बजट की डिमांड
शाहजहांपुर।
जहां एक ओर जिले के पॉवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए सब स्टेशनों के निर्माण समेत छूटे हुए गांवों में विद्युतीकरण पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम करोड़ों की धनराशि पानी की तरह बहा रहा है, वहीं शहर मेें घनी आबादी के बीच सड़कों के किनारे खुले में रखे ट्रांसफार्मरों के रखरखाव को विभाग पूरे साल बजट को तरसता रहा। शहर में विभिन्न श्रेणियों के सैकड़ों ट्रांसफार्मरों पर बिजली नेटवर्क टिका हुआ है और इनमें से अनेक ट्रांसफार्मर कंक्रीट के फाउंडेशन पर खुले रखे हैं। नियमानुसार उनके आसपास लोहे के तारों वाली फेंसिंग होनी चाहिए, लेकिन बिजली महकमे के पास इसके लिए पैसा ही नहीं है। हालांकि, निदेशालय को ट्रांसफार्मरों की मेंटीनेंस के लिए बजट की डिमांड कई बार भेजी गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
शहर में 70 हजार बिजली कनेक्शनों को लगभग 350 किलोमीटर लंबी लाइनों से जोड़ा गया है। घरों-प्रतिष्ठानों में वोल्टेज का प्रवाह सामान्य बनाए रखने के लिए जगह-जगह विभिन्न श्रेणियों के 501 ट्रांसफार्मर रखकर उनसे लाइनों को निकाला गया। ज्यादातर ट्रांसफार्मर चौराहों, तिराहों और गलीनुमा रास्तों के नुक्कड़ों पर रखे गए हैं। यही नहीं, जगह की कमी के चलते कई ट्रांसफार्मर डबल पोल खड़े करके उन पर रख छोड़े गए हैं। जन सामान्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खंभों पर टंगे ट्रांसफार्मरों के नीचे इंसुलेटर लगाने और जमीन पर रखे गए ट्रांसफार्मर अर्थिंग से बचाने के लिए उनके कंक्रीट फाउंडेशन के आसपास लोहे के तारों की मजबूत बाड़ होना अनिवार्य है।
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खुले ट्रांसफार्मरों से पहले भी हो चुकी हैं कई दुर्घटनाएं
ट्रांसफार्मरों की स्थापना के लिए विद्युत संरक्षा और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की शहर में कई स्थानों पर सरासर अनदेखी किए जाने से पहले भी कई बार जानलेवा दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। डॉन एंड डोना वाली गली के नुक्कड़ पर लगे ट्रांसफार्मर के तारों की चपेट में आकर गत वर्ष एक युवक की मौत हो चुकी है। इसी तरह लोधीपुर में दो साल पहले एक बालक की करंट से मौत हो चुकी है। ट्रांसफार्मरों के आसपास कूड़ा डाले जाने उनमें खाने-पीने की चीजें तलाशने वाले आवारा जानवर अक्सर करंट की चपेट में आकर जान गवां बैठते हैं। कूड़े में आग लगाए जाने की दशा में कई बार ट्रांसफार्मर भी लपटों की भेंट चढ़ चुके हैं।
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इन ठिकानों पर ट्रांसफार्मरों-लाइनों से मंडरा रहा खतरा
शहर में सुभाषनगर, ईदगाह तिराहा, मामुड़ी, ककरा कलां, तिलहरजई, मदराखेल, लोहारों का चौराहा, महमंद जलालनगर, रंगीन चौपाल, ऐमनजई जलालनगर की तराई बस्ती, अहमदपुर रेती, हयातपुरा, शहबाजनगर मोड़, रोशनगंज, मिश्रीपुर, ताहवरगंज आदि मोहल्लों में कई ट्रांसफार्मर इस तरह रखे हैं कि आसपास के अबोध बच्चे खेलते हुए उनके पास आसानी से पहुंच सकते हैं। यही नहीं, स्टेशन रोड जलालनगर की तराई बस्ती, रेती की नई बस्ती, ककरा कलां, मदराखेल, अजीजगंज, बाला तिराही आदि क्षेत्रों में लाइनें न होने से लोगों ने अपने सर्विस केबिल बांस-बल्लियों के सहारे बिछा रखे हैं और बारिश में ऐसे केबलों से करंट उतरने के मामले भी बढ़ जाते हैं।
नए साल में ट्रांसफार्मरों की देखभाल बढ़ने की उम्मीद
अधिकारी भी मानते हैं कि वर्ष 2017 में बिजली नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए कराए गए कई अहम कामों के बावजूद ट्रांसफार्मरों पर तारों की बाड़ लगाने का काम नहीं हो सका। एक्सईएन सिटी विवेक पटेल के अनुसार एक वर्ष के दौरान शहर को बंका घाट और सरायकाइयां में दो नए सब स्टेशन मिल गए। साथ ही कई सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई। इसी अवधि में अब्दुल्लागंज से कोतवाली तक करीब तीन किमी अंडरग्राउंड 11 केवी लाइन डाली गई। एक्सईएन पटेल के अनुसार बांस-बल्लियां वाली लाइनों की जगह पोल लगाकर तार बिछाने का काम शुरू हो चुका है। शहर में 16 ट्रांसफार्मरों की फेंसिंग कराने के लिए बजट की मांग लगातार हो रही है।