{"_id":"5963820e4f1c1bfb698b46a2","slug":"61499693582-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नदियों के जलस्तर पर सिंचाई विभाग की टकटकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नदियों के जलस्तर पर सिंचाई विभाग की टकटकी
Updated Mon, 10 Jul 2017 07:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। पहाड़ों समेत मैदानी क्षेत्र में नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में लगातार होे रही बारिश से उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बांधों-बैराजों से नदियों में अलावा पानी छोड़े जाने की आशंका बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा और बहगुल आदि नदियों के जल स्तर पर निगाहें टिका रखी हैं। इसी के मद्देनजर अधिकारियों ने गत वर्षों में कटान से प्रभावित गांवों में परिक्रमा शुरू करके वहां बाढ़ से बचाव कोे जरूरी काम शुरू करा दिए हैं।
हालांकि, जिले में अभी इतनी बारिश नहीं हुुई है कि गर्रा, खन्नौत और गरई जैसी नदियां कहर ढाएं। सोमवार को भी बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर यहां आने वाली गंगा, रामगंगा और बहगुल में पानी चढ़ने लगा है। जल स्तर के लिहाज से यह सभी नदियां हाई फ्लड लेवल से फिलहाल दूरी बनाए हैं। बांधों और बैराजों से रिलीज होेने वाली पानी की मात्रा में कमी आने से 24 घंटे में गंगा और रामगंगा के जलस्तर मेें गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन जलालाबाद और कलान तहसीलों में रामगंगा फैलाव ले रही है। इससे अफसर चिंतित हैं।
वर्ष 2010 में बाढ़ से हुई थी व्यापक तबाही
वर्ष 2010 में आई बाढ़ से 462 गांवों में व्यापक तबाही के साथ करीब 5.22 लाख की आबादी विस्थापित हुई थी। जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा की बाढ़ में नाव पलटने से सुरक्षित स्थानों पर ले जाए जा रहे तमाम लोग बह गए थे। तब मोटरबोट पर सवार पीएसी के बाढ़ बचाव दल ने उन्हें डूबने से बचा लिया था। इसके बावजूद एक महिला और उसके मासूम का शव बाद में मिला था। इसके अलावा तमाम पशु बह गए थे और सैकड़ों एकड़ जमीन नदियों के कटान की भेंट चढ़ गई थी।
विज्ञापन
कटान रोकने को प्रभावित गांवों पर पैनी नजर
जिले की 71 बाढ़ चौकियों पर तैनात राजस्व स्टाफ समेत प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कटान से प्रभावित गांवों पर न सिर्फ पैनी नजर जमा रखी है, वहां मुख्यमंत्री के स्तर से स्वीकृत एक करोड़ रुपये के बजट से जरूरी काम शुरू करा दिए हैं। उदाहरण के तौर पर कटान से प्रभावित जलालाबाद व कलान तहसील के हरिहरपुर, मौजमपुर और पहरुआ के पास रामगंगा की धारा मोड़ने के लिए नदी के सिल्ट वाले हिस्से में अस्थायी नहर के आकार में खुदाई कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त कुनिया, जरियनपुर, कीलापुर, घनश्यामपुर, रटा, लोहार गढ़ी, पलिहुरा आदि गांवों कोे बाढ़ से बचाने के लिए वहां नॉयलान के भारी-भरकम बैगों में बालू भरकर नदी तटों पर डालने का काम शुरू कराया जा रहा है।
कहते हैं एडीएम सर्वेश कुमार
मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है। इसलिए बाढ़ से बचाव को फौरी तौर पर जो भी काम कराने संभव हैं, कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री से स्वीकृत बजट से गांवों के पास से बह रही रामगंगा की धारा मोड़ने पर काम शुरू करा दिया गया है। बरसात खत्म होने के बाद नदियों के तटवर्ती गांवों में पक्की ठोकरें बनाने को निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।
विज्ञापन
हालांकि, जिले में अभी इतनी बारिश नहीं हुुई है कि गर्रा, खन्नौत और गरई जैसी नदियां कहर ढाएं। सोमवार को भी बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर यहां आने वाली गंगा, रामगंगा और बहगुल में पानी चढ़ने लगा है। जल स्तर के लिहाज से यह सभी नदियां हाई फ्लड लेवल से फिलहाल दूरी बनाए हैं। बांधों और बैराजों से रिलीज होेने वाली पानी की मात्रा में कमी आने से 24 घंटे में गंगा और रामगंगा के जलस्तर मेें गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन जलालाबाद और कलान तहसीलों में रामगंगा फैलाव ले रही है। इससे अफसर चिंतित हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2010 में बाढ़ से हुई थी व्यापक तबाही
वर्ष 2010 में आई बाढ़ से 462 गांवों में व्यापक तबाही के साथ करीब 5.22 लाख की आबादी विस्थापित हुई थी। जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा की बाढ़ में नाव पलटने से सुरक्षित स्थानों पर ले जाए जा रहे तमाम लोग बह गए थे। तब मोटरबोट पर सवार पीएसी के बाढ़ बचाव दल ने उन्हें डूबने से बचा लिया था। इसके बावजूद एक महिला और उसके मासूम का शव बाद में मिला था। इसके अलावा तमाम पशु बह गए थे और सैकड़ों एकड़ जमीन नदियों के कटान की भेंट चढ़ गई थी।
विज्ञापन
कटान रोकने को प्रभावित गांवों पर पैनी नजर
जिले की 71 बाढ़ चौकियों पर तैनात राजस्व स्टाफ समेत प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कटान से प्रभावित गांवों पर न सिर्फ पैनी नजर जमा रखी है, वहां मुख्यमंत्री के स्तर से स्वीकृत एक करोड़ रुपये के बजट से जरूरी काम शुरू करा दिए हैं। उदाहरण के तौर पर कटान से प्रभावित जलालाबाद व कलान तहसील के हरिहरपुर, मौजमपुर और पहरुआ के पास रामगंगा की धारा मोड़ने के लिए नदी के सिल्ट वाले हिस्से में अस्थायी नहर के आकार में खुदाई कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त कुनिया, जरियनपुर, कीलापुर, घनश्यामपुर, रटा, लोहार गढ़ी, पलिहुरा आदि गांवों कोे बाढ़ से बचाने के लिए वहां नॉयलान के भारी-भरकम बैगों में बालू भरकर नदी तटों पर डालने का काम शुरू कराया जा रहा है।
कहते हैं एडीएम सर्वेश कुमार
मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है। इसलिए बाढ़ से बचाव को फौरी तौर पर जो भी काम कराने संभव हैं, कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री से स्वीकृत बजट से गांवों के पास से बह रही रामगंगा की धारा मोड़ने पर काम शुरू करा दिया गया है। बरसात खत्म होने के बाद नदियों के तटवर्ती गांवों में पक्की ठोकरें बनाने को निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।