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देवी के दर्शनों के लिए भक्तों की उमड़ी भीड़
Updated Sat, 20 Oct 2018 06:28 PM IST
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भुवनेश्वरी-काली देवी के दर्शनों को उमड़े श्रद्धालु
छह माह बाद खुले देवी के पट, तीसरे दिन आज हो जाएंगे बंद
केंद्रीय राज्यमंत्री सहित विधायक और अधिकारियों ने किए दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
कुर्रिया कलां(शाहजहांपुर)। ऐतिहासिक देवी मंदिर में मां भुवनेश्वरी और काली देवी के दर्शनों को शनिवार को भक्तों की खासी भीड़ उमड़ी। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने माथा टेका और मनौती मांगी। दोपहर बाद केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णाराज, विधायक मानवेंद्र सिंह के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने भी देवी के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया।
बता दें कि मंदिर दोनों नवरात्र के बाद दशमी को तीन दिन के लिए खुलता है। इसी के तहत दशमी को सुबह चार बजे खुलता है और द्वादशी को दोपहर दो बजे बंद हो जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में दस महाविद्याओं की साधना की जा चुकी है। तंत्र-मंत्र के लिए भी मंदिर प्रसिद्ध है। साल में मंदिर दो बार ही शारदीय एवं चैत्र नवरात्र के बाद तीन दिनों के लिए दर्शनार्थ खोला जाता है। इन दिनों में प्रतिमाओं को स्थापित किया जाता है फिर वेद मंत्रों से प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। तीन दिन के बाद देवी से स्थान छोड़ने का आह्वान भी किया जाता और प्रतिमाओं को पुन: हटाकर बक्से आदि में बंद कर दिया जाता है। मंदिर के पुजारी गुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने बताया कि शनिवार सुबह चार बजे मंदिर के पट खुले थे और रविवार को दोपहर दो बजे के बाद छह माह के लिए पट बंद कर दिए जाएंगे।
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भुवनेश्वरी-काली देवी के दर्शनों को उमड़े श्रद्धालु
छह माह बाद खुले देवी के पट, तीसरे दिन आज हो जाएंगे बंद
केंद्रीय राज्यमंत्री सहित विधायक और अधिकारियों ने किए दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
कुर्रिया कलां(शाहजहांपुर)। ऐतिहासिक देवी मंदिर में मां भुवनेश्वरी और काली देवी के दर्शनों को शनिवार को भक्तों की खासी भीड़ उमड़ी। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने माथा टेका और मनौती मांगी। दोपहर बाद केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णाराज, विधायक मानवेंद्र सिंह के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने भी देवी के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया।
बता दें कि मंदिर दोनों नवरात्र के बाद दशमी को तीन दिन के लिए खुलता है। इसी के तहत दशमी को सुबह चार बजे खुलता है और द्वादशी को दोपहर दो बजे बंद हो जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में दस महाविद्याओं की साधना की जा चुकी है। तंत्र-मंत्र के लिए भी मंदिर प्रसिद्ध है। साल में मंदिर दो बार ही शारदीय एवं चैत्र नवरात्र के बाद तीन दिनों के लिए दर्शनार्थ खोला जाता है। इन दिनों में प्रतिमाओं को स्थापित किया जाता है फिर वेद मंत्रों से प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। तीन दिन के बाद देवी से स्थान छोड़ने का आह्वान भी किया जाता और प्रतिमाओं को पुन: हटाकर बक्से आदि में बंद कर दिया जाता है। मंदिर के पुजारी गुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने बताया कि शनिवार सुबह चार बजे मंदिर के पट खुले थे और रविवार को दोपहर दो बजे के बाद छह माह के लिए पट बंद कर दिए जाएंगे।
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