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किसानों का चीनी मिलों पर 2.61 अरब बकाया
Updated Wed, 31 Oct 2018 11:45 PM IST
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जिले की चीनी मिलों में नया पेराई सत्र भले ही दिवाली के बाद आरंभ हो, किसानों को गन्ना सप्लाई पर्चियां तीन नवंबर से जारी होने लगेंगी। डीएम अमृत त्रिपाठी ने चीनी मिल अध्यासियों और प्रबंधकों के साथ बुधवार को बैठक कर मिल संचालन और भुगतान की समीक्षा करते हुए इसी आशय के निर्देश दिए। साथ ही मिल प्रबंधकों को 2.61 अरब रुपये बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान चालू माह के अंत तक कराने के निर्देश दिए।
खास यह रहा कि बैठक के दौरान लगभग 1.24 अरब की बकाएदार बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल के अध्यासी केके बाजपेयी ने कई तर्क देते हुए दोनों बिंदुओं पर अतिरिक्त समय दिए जाने की मोहलत मांगी, लेकिन डीएम ने किसानों की भलाई की खातिर उनकी एक नहीं सुनी। उल्टे, जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम को उनके खिलाफ शासन से पत्राचार करने के निर्देश दिए। इसका असर यह हुआ कि बैठक की आगे की कार्यवाही के दौरान मिल अधिकारी खामोशी ओढ़कर सहमति में सिर हिलाते रहे।
पर्चियां जारी करने में हीलाहवाली पर डीएम की चढ़ीं त्योरियां
डीएम ने मिलों में पेराई कार्य शुरू कराने के लिए प्रत्येक दशा में तीन नवंबर तक इंडेंट जारी कर किसानों को पर्चियां जारी करने के निर्देश दिए, लेकिन मकसूदापुर मिल के अध्यासी ने तर्क दिया कि अभी गन्ना में चीनी परता कम है, इसलिए चीनी मिल चलाने की तारीख दिवाली के बाद निर्धारित कर दी जाए। अध्यासी केकेे बाजपेयी की इस दलील को किसान विरोधी मानते हुए डीएम त्रिपाठी की त्योरियां चढ़ गईं। उन्होंने कहा कि किसानों को समय से पर्चियां मिलने से मिलों में उनके गन्ने की आपूर्ति समय से हो सकेगी। इस पर बिरला ग्रुप की रोजा और डालमियां ग्रुप की निगोही चीनी मिल अधिकारियों ने तीन नवंबर को और सहकारी क्षेत्र की पुवायां व तिलहर मिलों के प्रबंधकों ने पांच नवंबर तक पर्चियां जारी करने पर हामी भरी।
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भुगतान में अड़ंगेबाजी पर फिर भड़के डीएम
किसानों को बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान की समीक्षा से पता चला कि 2 अरब 61 करोड़ 84 लाख 51 हजार रुपये गन्ना मूल्य जिले की पांचों मिलों पर बकाया है। यह भी जाहिर हुआ कि जितनी धनराशि रोजा और निगोही मिलों पर बकाया है, उससे कहीं अधिक रकम (लगभग 1.24 अरब रुपये) की देनदार मकसूदापुर मिल है। डीएम ने मिल अधिकारियों को 30 नवंबर तक संपूर्ण भुगतान करने के निर्देश दिए। अधिकांश मिल प्रबंधकों ने इस पर सहमति दे दी, लेकिन मकसूदापुर मिल के अध्यासी बाजपेयी ने मासांत तक केवल 80 फीसदी भुगतान करने की बात की। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए डीसीओ को उनके विरुद्ध शासन को पत्र लिखने का फरमान दे दिया। बैठक मेें एडीएम फाइनेंस अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव, सहायक चीनी आयुक्त हरीकृष्ण गुप्ता आदि मौजूद रहे।
चीनी मिल बकाया धनराशि
0 अवध शुगर वर्कस, रोजा 4958.02
0 डालमियां मिल, निगोही 7749.46
0 बजाज मिल, मकसूदापुर 12396.90
0 सहकारी मिल, तिलहर 909.26
0 सहकारी मिल, पुवायां 170.87
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खास यह रहा कि बैठक के दौरान लगभग 1.24 अरब की बकाएदार बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल के अध्यासी केके बाजपेयी ने कई तर्क देते हुए दोनों बिंदुओं पर अतिरिक्त समय दिए जाने की मोहलत मांगी, लेकिन डीएम ने किसानों की भलाई की खातिर उनकी एक नहीं सुनी। उल्टे, जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम को उनके खिलाफ शासन से पत्राचार करने के निर्देश दिए। इसका असर यह हुआ कि बैठक की आगे की कार्यवाही के दौरान मिल अधिकारी खामोशी ओढ़कर सहमति में सिर हिलाते रहे।
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पर्चियां जारी करने में हीलाहवाली पर डीएम की चढ़ीं त्योरियां
डीएम ने मिलों में पेराई कार्य शुरू कराने के लिए प्रत्येक दशा में तीन नवंबर तक इंडेंट जारी कर किसानों को पर्चियां जारी करने के निर्देश दिए, लेकिन मकसूदापुर मिल के अध्यासी ने तर्क दिया कि अभी गन्ना में चीनी परता कम है, इसलिए चीनी मिल चलाने की तारीख दिवाली के बाद निर्धारित कर दी जाए। अध्यासी केकेे बाजपेयी की इस दलील को किसान विरोधी मानते हुए डीएम त्रिपाठी की त्योरियां चढ़ गईं। उन्होंने कहा कि किसानों को समय से पर्चियां मिलने से मिलों में उनके गन्ने की आपूर्ति समय से हो सकेगी। इस पर बिरला ग्रुप की रोजा और डालमियां ग्रुप की निगोही चीनी मिल अधिकारियों ने तीन नवंबर को और सहकारी क्षेत्र की पुवायां व तिलहर मिलों के प्रबंधकों ने पांच नवंबर तक पर्चियां जारी करने पर हामी भरी।
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भुगतान में अड़ंगेबाजी पर फिर भड़के डीएम
किसानों को बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान की समीक्षा से पता चला कि 2 अरब 61 करोड़ 84 लाख 51 हजार रुपये गन्ना मूल्य जिले की पांचों मिलों पर बकाया है। यह भी जाहिर हुआ कि जितनी धनराशि रोजा और निगोही मिलों पर बकाया है, उससे कहीं अधिक रकम (लगभग 1.24 अरब रुपये) की देनदार मकसूदापुर मिल है। डीएम ने मिल अधिकारियों को 30 नवंबर तक संपूर्ण भुगतान करने के निर्देश दिए। अधिकांश मिल प्रबंधकों ने इस पर सहमति दे दी, लेकिन मकसूदापुर मिल के अध्यासी बाजपेयी ने मासांत तक केवल 80 फीसदी भुगतान करने की बात की। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए डीसीओ को उनके विरुद्ध शासन को पत्र लिखने का फरमान दे दिया। बैठक मेें एडीएम फाइनेंस अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव, सहायक चीनी आयुक्त हरीकृष्ण गुप्ता आदि मौजूद रहे।
चीनी मिल बकाया धनराशि
0 अवध शुगर वर्कस, रोजा 4958.02
0 डालमियां मिल, निगोही 7749.46
0 बजाज मिल, मकसूदापुर 12396.90
0 सहकारी मिल, तिलहर 909.26
0 सहकारी मिल, पुवायां 170.87