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खुदागंज में बुखार से तीन मौतें, बढ़ रहीं मरीजों की संख्या
Updated Mon, 10 Sep 2018 11:54 PM IST
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खुदागंज में बुखार से तीन मौतें
जुकाम, खांसी, सिर दर्द, बुखार से पीड़ित आ रहे सैकड़ों मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
खुदागंज। मौसम के बदलते मिजाज के कारण तेज बुखार, खांसी, जुकाम से लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग लाचार नजर आ रहा है। रविवार को क्षेत्र में बुखार के कारण तीन लोगों की जान चली गईं। बुखार के साथ इन मौतों को लेकर लोग दहशत में हैं।
यहां सरकारी अस्पताल का आलम यह है कि ज्यादातर लोग बुखार से पीड़ित नजर आते हैं। नगर के एमएलडी संस्कृत महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य की 20 वर्षीय बेटी नीलमणि पाठक, मोहल्ला लक्ष्मीपुर निवासी 25 वर्षीय सलीम सलमानी पुत्र रौनक अली सलमानी, गांव सैदूपुर निवासी 18 वर्षीय लक्ष्मी देवी मौर्या पुत्री वीरेंद्र कुमार मौर्या को दो दिन से बुखार आ रहा था। प्राइवेट में दवा ली लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सरकारी अस्पताल की दवा भी काम नहीं आई। सोमवार को तीनों की अलग-अलग समय पर मौत हो गई। लक्ष्मी देवी का विवाह दो माह पूर्व होने वाला था। इसके अलावा फुलवा निवासी रीना पुत्री नन्हे लाल, हसनापुर निवासी रानी पत्नी छोटेलाल, म्यूना में अपनी रिश्तेदारी में आई मुन्नी देवी पत्नी नरेंद्रपाल सिंह निवासी गांव नवदिया, बलजीत निवासी बीसलपुर भी बुखार से पीड़ित हैं। खुदागंज ब्लॉक के आवास लिपिक जाने आलम अपनी सीट पर बैठे कार्य कर रहे थे कि अचानक ठंड लगकर उन्हें बुखार आ गया।
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अस्पताल समय से नहीं पहुंच रहे डॉक्टर
क्षेत्र में बुखार से तीन मौते होने के बाद भी अस्पताल में तैनात डॉक्टर व अन्य स्टाफ भी काफी देर से अस्पताल पहुंच रहा है। इस बात की शिकायत दवा लेने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों की थी।
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झोलाछाप की पौ-बारह
इन मौतों के पीछे एक बड़ी वजह झोलाछाप डाक्टरों का इलाज है। अगर स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया होता तो बुखार से पीड़ित लोग इनकी गिरफ्त में नहीं आते और असमय मौत नहीं होती।
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दवाइयों का भी टोटा
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि यहां दवाइयों का भी टोटा है। कुछ दवाइयां तो दे दी जाती हैं लेकिन अधिकांश दवाइयां बाजार से खरीदकर खाने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि यहां की दवा से फायदा नहीं होगा और बेहतर इलाज के लिए बाहर की दवा लेनी ही होगी।
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खुदागंज क्षेत्र में बुखार से तीन मौतों की जानकारी मिली है। मैं खुद खुदागंज पहुंचकर मामले को देखूंगा। एमओआईसी को रात में अस्पताल में ही कैंप करने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल आने वाले रोगियों को उचित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लखनऊ से भेजी गई टीमें बदायूं गईं हैं। स्थानीय टीमें कलान और मिर्जापुर क्षेत्र में कैंप कर रहीं हैं।
डॉ. आरपी रावत सीएमओ
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खुदागंज में बुखार से तीन मौतें
जुकाम, खांसी, सिर दर्द, बुखार से पीड़ित आ रहे सैकड़ों मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
खुदागंज। मौसम के बदलते मिजाज के कारण तेज बुखार, खांसी, जुकाम से लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग लाचार नजर आ रहा है। रविवार को क्षेत्र में बुखार के कारण तीन लोगों की जान चली गईं। बुखार के साथ इन मौतों को लेकर लोग दहशत में हैं।
यहां सरकारी अस्पताल का आलम यह है कि ज्यादातर लोग बुखार से पीड़ित नजर आते हैं। नगर के एमएलडी संस्कृत महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य की 20 वर्षीय बेटी नीलमणि पाठक, मोहल्ला लक्ष्मीपुर निवासी 25 वर्षीय सलीम सलमानी पुत्र रौनक अली सलमानी, गांव सैदूपुर निवासी 18 वर्षीय लक्ष्मी देवी मौर्या पुत्री वीरेंद्र कुमार मौर्या को दो दिन से बुखार आ रहा था। प्राइवेट में दवा ली लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सरकारी अस्पताल की दवा भी काम नहीं आई। सोमवार को तीनों की अलग-अलग समय पर मौत हो गई। लक्ष्मी देवी का विवाह दो माह पूर्व होने वाला था। इसके अलावा फुलवा निवासी रीना पुत्री नन्हे लाल, हसनापुर निवासी रानी पत्नी छोटेलाल, म्यूना में अपनी रिश्तेदारी में आई मुन्नी देवी पत्नी नरेंद्रपाल सिंह निवासी गांव नवदिया, बलजीत निवासी बीसलपुर भी बुखार से पीड़ित हैं। खुदागंज ब्लॉक के आवास लिपिक जाने आलम अपनी सीट पर बैठे कार्य कर रहे थे कि अचानक ठंड लगकर उन्हें बुखार आ गया।
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अस्पताल समय से नहीं पहुंच रहे डॉक्टर
क्षेत्र में बुखार से तीन मौते होने के बाद भी अस्पताल में तैनात डॉक्टर व अन्य स्टाफ भी काफी देर से अस्पताल पहुंच रहा है। इस बात की शिकायत दवा लेने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों की थी।
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झोलाछाप की पौ-बारह
इन मौतों के पीछे एक बड़ी वजह झोलाछाप डाक्टरों का इलाज है। अगर स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया होता तो बुखार से पीड़ित लोग इनकी गिरफ्त में नहीं आते और असमय मौत नहीं होती।
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दवाइयों का भी टोटा
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि यहां दवाइयों का भी टोटा है। कुछ दवाइयां तो दे दी जाती हैं लेकिन अधिकांश दवाइयां बाजार से खरीदकर खाने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि यहां की दवा से फायदा नहीं होगा और बेहतर इलाज के लिए बाहर की दवा लेनी ही होगी।
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खुदागंज क्षेत्र में बुखार से तीन मौतों की जानकारी मिली है। मैं खुद खुदागंज पहुंचकर मामले को देखूंगा। एमओआईसी को रात में अस्पताल में ही कैंप करने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल आने वाले रोगियों को उचित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लखनऊ से भेजी गई टीमें बदायूं गईं हैं। स्थानीय टीमें कलान और मिर्जापुर क्षेत्र में कैंप कर रहीं हैं।
डॉ. आरपी रावत सीएमओ