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...अब तो बरसो मेघा
Updated Wed, 28 Jun 2017 06:27 PM IST
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पुवायां (शाहजहांपुर)।
अब आम आदमी से लेकर किसान और मजदूर तक सभी की आंखें आसमान की ओर ताकने लगी हैं। भीषण गर्मी से बुरा हाल है। धरती का कलेजा फटा जा रहा है। पशु, पक्षी पानी नहीं मिलने से परेशान हैं। बादल उठते हैं, लेकिन बिना बरसे ही गायब हो जाते हैं। गन्ना, मक्का सहित अन्य फसलों की सिंचाई और धान की रोपाई में भारी लागत आ रही है। बारिश के इंतजार में धान की मुख्य फसल लेट भी हो रही है। सभी लोग बारिश के लिए ऊपर वाले की प्रार्थना में लगे हैं। बादल की ओर देख कर मुंह से एक ही बात निकलती है कि ‘अब तो बरसो मेघा’
तालाब सूखे
तालाबों का पानी सूख गया है। इनमें बड़ी और गहरी दरारें पड़ गई हैं। पशु, पक्षी पानी के लिए परेशान हैं। क्षेत्र में बहने वाली कठिना और गोमती नदी की धार भी बंद हो गई है। इस कारण वन्य पशु भी बेचैन हैं। बारिश नहीं होने से भीषण गर्मी में भी राहत नहीं मिल पा रही है। बिजली के कम मिलने के कारण किसान गन्ना और धान की मुख्य फसल में पंपिंग सेट चलाकर सिंचाई कर रहे हैं। डीजल के महंगा होने के कारण इसमें भारी लागत आ रही है।
खेती का काम आगे बढ़ाना मजबूरी
बारिश भले ही नहीं हो रही हो, लेकिन किसान के सामने खेती के काम को आगे बढ़ाना मजबूरी है। गन्ने की सिंचाई जरूरी है तो धान लगाना भी आवश्यक है। अगर धान लेट हुआ तो आगे की फसलों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। इस कारण तमाम किसान पंपिंग सेट के सहारे धान लगाने लगे हैं। इसके लिए उन्हें तमाम कर्ज लेना पड़ रहा है।
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शुरू हुए तमाम टोटके
बारिश के लिए तमाम टोटके शुरू हो चुके हैं। कहीं महिलाएं हल जोत रही हैं तो कहीं बच्चे तपती जमीन पर पानी में लोट रहे हैं। हवन, पूजन का कार्यक्रम भी शुरू हो चुका है। वरुण देवता को प्रसन्न करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी दूर-दूर तक बादल बरसने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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अब आम आदमी से लेकर किसान और मजदूर तक सभी की आंखें आसमान की ओर ताकने लगी हैं। भीषण गर्मी से बुरा हाल है। धरती का कलेजा फटा जा रहा है। पशु, पक्षी पानी नहीं मिलने से परेशान हैं। बादल उठते हैं, लेकिन बिना बरसे ही गायब हो जाते हैं। गन्ना, मक्का सहित अन्य फसलों की सिंचाई और धान की रोपाई में भारी लागत आ रही है। बारिश के इंतजार में धान की मुख्य फसल लेट भी हो रही है। सभी लोग बारिश के लिए ऊपर वाले की प्रार्थना में लगे हैं। बादल की ओर देख कर मुंह से एक ही बात निकलती है कि ‘अब तो बरसो मेघा’
तालाब सूखे
तालाबों का पानी सूख गया है। इनमें बड़ी और गहरी दरारें पड़ गई हैं। पशु, पक्षी पानी के लिए परेशान हैं। क्षेत्र में बहने वाली कठिना और गोमती नदी की धार भी बंद हो गई है। इस कारण वन्य पशु भी बेचैन हैं। बारिश नहीं होने से भीषण गर्मी में भी राहत नहीं मिल पा रही है। बिजली के कम मिलने के कारण किसान गन्ना और धान की मुख्य फसल में पंपिंग सेट चलाकर सिंचाई कर रहे हैं। डीजल के महंगा होने के कारण इसमें भारी लागत आ रही है।
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खेती का काम आगे बढ़ाना मजबूरी
बारिश भले ही नहीं हो रही हो, लेकिन किसान के सामने खेती के काम को आगे बढ़ाना मजबूरी है। गन्ने की सिंचाई जरूरी है तो धान लगाना भी आवश्यक है। अगर धान लेट हुआ तो आगे की फसलों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। इस कारण तमाम किसान पंपिंग सेट के सहारे धान लगाने लगे हैं। इसके लिए उन्हें तमाम कर्ज लेना पड़ रहा है।
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शुरू हुए तमाम टोटके
बारिश के लिए तमाम टोटके शुरू हो चुके हैं। कहीं महिलाएं हल जोत रही हैं तो कहीं बच्चे तपती जमीन पर पानी में लोट रहे हैं। हवन, पूजन का कार्यक्रम भी शुरू हो चुका है। वरुण देवता को प्रसन्न करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी दूर-दूर तक बादल बरसने का नाम नहीं ले रहे हैं।