{"_id":"5aba5bfa4f1c1b094a8b78e6","slug":"131522162682-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुता, बंदर काटे तो न करें सेहत महकमे का भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुता, बंदर काटे तो न करें सेहत महकमे का भरोसा
Updated Tue, 27 Mar 2018 08:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो-13
कुत्ता, बंदर काटे तो न करें सेहत महकमे का भरोसा
बजट खर्च होने पर भी नहीं मिल रही एआरबी
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
अगर किसी को कुत्ता या बंदर काट ले तो एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए स्वास्थ्य विभाग का भरोसा करना बड़ी भूल हो सकती है। जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति और भी खराब है। हालांकि, वैक्सीन की लोकल खरीद पर बजट खर्च किया जा रहा है लेकिन इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा। जिला अस्पताल समेत जिले के 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 35 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 30 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर एबारअी लगवाने आने वालों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। कई पीएचसी पर तो वैक्सीन रखने के लिए कोल्ड चेन बॉक्स फ्रिजर भी नहीं है।
इधर, जिला अस्पताल में कुछ असरदार लोगों की सिफारिश पर वैक्सीन लगाए जाने की भी शिकायत मिल रही हैं। मंगलवार को कांट के गांव नानकपुर निवासी जयवीर अपने 12 साल के बेटे शोभित, सदर के गांव नवादा निवासी 60 वर्षीय हरिश्चंद्र, जलालाबाद के गांव गाजीपुर निवासी 20 वर्षीय सत्यवीर, मदनापुर के गांव परियारी के 15 वर्षीय पान सिंह पुत्र राजेश्वर समेत कई लोग वैक्सीन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे। इनका कहना है कि अस्पताल में वैक्सीन लगाने में भेदभाव किया जा रहा है। गांव-देहात से आने वाले लोगों को बैरंग कर दिया जाता है, जबकि असरदार लोगों के आने पर उनको वैक्सीन लगा दी जाती है। आरोप है कि जिला अस्पताल में वैक्सीन की स्थानीय खरीद के नाम पर भी खेल हो रहा है।
-----------
डिमांड भेजने के बाद भी नहीं मिली एआरबी
जलालाबाद।
नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 20 दिन पहले एआरबी खत्म हो गई थी। यहां कुत्ता और बंदर के काटे रोज 50 से 60 मरीज एआरबी लगवाने आते हैं। एआरबी न होने की वजह से सभी को मायूस होकर लौटना पड़ता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्ञानेंद्र का कहना है कि उन्होंने एआरबी खत्म होने के साथ ही सीएमओ के लिए डिमांड भेज दी थी। इसके बावजूद अब तक सप्लाई नहीं मिली है।
विज्ञापन
----------
तहसील के किसी सरकारी अस्पताल में एआरबी नहीं
पुवायां।
यूं तो तहसील क्षेत्र के कई अस्पताल पहले से ही बंद हैं। जो खुलते हैं वहां भी एआरबी नहीं है। सीएचसी पुवायां समेत सीएचसी बंडा और पीएचसी खुटार, ढका घनश्याम, मुड़िया कुर्मियात, नाहिल, नवदिया नवाजपुर, कैमहरिया आदि पीएचसी पर भी एक महीने से एआरबी लगवाने आने वाले ग्रामीणों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। बंडा सीएचसी प्रभारी डॉ. रिजवान का कहना है कि डिमांड भेजी गई है।
----------
मांग को किया जा रहा नजरअंदाज
तिलहर।
सीएचसी पर एक पखवाड़ा से एआरबी नहीं है। कई बार सीएमओ ऑफिस डिमांड भी भेजी, लेकिन इसको नजरअंदाज किया जाता रहा। सीएचसी पर औसतन 40 से 50 लोग रोग एआरबी लगवाने पहुंचते हैं। अस्पताल में एआरबी न मिलने से मरीजों को महंगे दामों पर बाजार से वैक्सीन खरीदनी हो रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डॉक्टर मनोज मिश्रा का कहना है कि पूरे जिले में ऐसे ही हालात हैं।
---------
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी खराब
परौर। गंगा और रामगंगा की कटरी में बसे गांवों में कुत्ता काटे के ज्यादा मामले आते हैं। फिलहाल तो जिले भर में एआरबी की किल्लत है, लेकिन कटरी के इन गांवों में सामान्य दिनों में भी ग्रामीणों को आसानी से एआरबी मुहैया नहीं होती। शुक्रवार और मंगलवार को कलान में बाजार लगता है। इस दिन कलान सीएचसी पर एआरबी लगवाने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। इनको बिना एआरबी के ही लौटना होता है।
मिर्जापुर। सीएचसी जरीनपुर पर एआरबी एक पखवाड़े से नहीं है। डॉ. प्रदीप ने बताया कि अस्पताल में रोज 10 से 12 लोग एआरबी लगवाने पहुंचते हैं। 15 दिन पहले ही एआरबी की किल्लत के लिए लिखा जा चुका है। अब तक मुख्यालय से वैक्सीन नहीं मिली है।
मदनापुर। मदनापुर सीएचसी पर आम दिनों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदतर रहती है। यहां एआरबी तो दूर वैक्सीन रखने के लिए फ्रिजर की व्यवस्था भी नहीं है। आने वाले ज्यादातर मरीजों को कांट और जलालाबाद सीएचसी रेफर कर दिया जाता है।
----------
वर्जन-
फोटो-14
दवा कंपनी से ही वैक्सीन की सप्लाई मिलने में देरी हो रही है। इसके लिए रिमाइंडर भेजा गया है। एआरबी की किल्लत जल्द दूर होने की उम्मीद है। लोगों को चाहिए कि वह धौर्य से काम लें।
-आरपी रावत, सीएमओ
विज्ञापन
कुत्ता, बंदर काटे तो न करें सेहत महकमे का भरोसा
बजट खर्च होने पर भी नहीं मिल रही एआरबी
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
अगर किसी को कुत्ता या बंदर काट ले तो एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए स्वास्थ्य विभाग का भरोसा करना बड़ी भूल हो सकती है। जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति और भी खराब है। हालांकि, वैक्सीन की लोकल खरीद पर बजट खर्च किया जा रहा है लेकिन इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा। जिला अस्पताल समेत जिले के 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 35 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 30 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर एबारअी लगवाने आने वालों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। कई पीएचसी पर तो वैक्सीन रखने के लिए कोल्ड चेन बॉक्स फ्रिजर भी नहीं है।
इधर, जिला अस्पताल में कुछ असरदार लोगों की सिफारिश पर वैक्सीन लगाए जाने की भी शिकायत मिल रही हैं। मंगलवार को कांट के गांव नानकपुर निवासी जयवीर अपने 12 साल के बेटे शोभित, सदर के गांव नवादा निवासी 60 वर्षीय हरिश्चंद्र, जलालाबाद के गांव गाजीपुर निवासी 20 वर्षीय सत्यवीर, मदनापुर के गांव परियारी के 15 वर्षीय पान सिंह पुत्र राजेश्वर समेत कई लोग वैक्सीन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे। इनका कहना है कि अस्पताल में वैक्सीन लगाने में भेदभाव किया जा रहा है। गांव-देहात से आने वाले लोगों को बैरंग कर दिया जाता है, जबकि असरदार लोगों के आने पर उनको वैक्सीन लगा दी जाती है। आरोप है कि जिला अस्पताल में वैक्सीन की स्थानीय खरीद के नाम पर भी खेल हो रहा है।
विज्ञापन
-----------
डिमांड भेजने के बाद भी नहीं मिली एआरबी
जलालाबाद।
नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 20 दिन पहले एआरबी खत्म हो गई थी। यहां कुत्ता और बंदर के काटे रोज 50 से 60 मरीज एआरबी लगवाने आते हैं। एआरबी न होने की वजह से सभी को मायूस होकर लौटना पड़ता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्ञानेंद्र का कहना है कि उन्होंने एआरबी खत्म होने के साथ ही सीएमओ के लिए डिमांड भेज दी थी। इसके बावजूद अब तक सप्लाई नहीं मिली है।
विज्ञापन
----------
तहसील के किसी सरकारी अस्पताल में एआरबी नहीं
पुवायां।
यूं तो तहसील क्षेत्र के कई अस्पताल पहले से ही बंद हैं। जो खुलते हैं वहां भी एआरबी नहीं है। सीएचसी पुवायां समेत सीएचसी बंडा और पीएचसी खुटार, ढका घनश्याम, मुड़िया कुर्मियात, नाहिल, नवदिया नवाजपुर, कैमहरिया आदि पीएचसी पर भी एक महीने से एआरबी लगवाने आने वाले ग्रामीणों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। बंडा सीएचसी प्रभारी डॉ. रिजवान का कहना है कि डिमांड भेजी गई है।
----------
मांग को किया जा रहा नजरअंदाज
तिलहर।
सीएचसी पर एक पखवाड़ा से एआरबी नहीं है। कई बार सीएमओ ऑफिस डिमांड भी भेजी, लेकिन इसको नजरअंदाज किया जाता रहा। सीएचसी पर औसतन 40 से 50 लोग रोग एआरबी लगवाने पहुंचते हैं। अस्पताल में एआरबी न मिलने से मरीजों को महंगे दामों पर बाजार से वैक्सीन खरीदनी हो रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डॉक्टर मनोज मिश्रा का कहना है कि पूरे जिले में ऐसे ही हालात हैं।
---------
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी खराब
परौर। गंगा और रामगंगा की कटरी में बसे गांवों में कुत्ता काटे के ज्यादा मामले आते हैं। फिलहाल तो जिले भर में एआरबी की किल्लत है, लेकिन कटरी के इन गांवों में सामान्य दिनों में भी ग्रामीणों को आसानी से एआरबी मुहैया नहीं होती। शुक्रवार और मंगलवार को कलान में बाजार लगता है। इस दिन कलान सीएचसी पर एआरबी लगवाने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। इनको बिना एआरबी के ही लौटना होता है।
मिर्जापुर। सीएचसी जरीनपुर पर एआरबी एक पखवाड़े से नहीं है। डॉ. प्रदीप ने बताया कि अस्पताल में रोज 10 से 12 लोग एआरबी लगवाने पहुंचते हैं। 15 दिन पहले ही एआरबी की किल्लत के लिए लिखा जा चुका है। अब तक मुख्यालय से वैक्सीन नहीं मिली है।
मदनापुर। मदनापुर सीएचसी पर आम दिनों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदतर रहती है। यहां एआरबी तो दूर वैक्सीन रखने के लिए फ्रिजर की व्यवस्था भी नहीं है। आने वाले ज्यादातर मरीजों को कांट और जलालाबाद सीएचसी रेफर कर दिया जाता है।
----------
वर्जन-
फोटो-14
दवा कंपनी से ही वैक्सीन की सप्लाई मिलने में देरी हो रही है। इसके लिए रिमाइंडर भेजा गया है। एआरबी की किल्लत जल्द दूर होने की उम्मीद है। लोगों को चाहिए कि वह धौर्य से काम लें।
-आरपी रावत, सीएमओ