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Sant Kabir Nagar News: जयकारे के बीच मां चन्द्रघंटा की आराधना

Fri, 12 Apr 2024 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Fri, 12 Apr 2024 12:22 AM IST
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Worship of Mother Chandraghanta amidst cheering
- मंदिरों में भक्तों की कतार, गूंजते रहे घंटे-घड़ियाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन घरों व मंदिरों में मां चन्द्रघंटा की आराधना की गई। सुबह से ही मंदिरों में जयकारे के बीच घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। मंदिरों में भजन-कीर्तन के भी कार्यक्रम हुए। मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही।
मां सिद्धिदा मंदिर, बरदहिया बाजार, सर्वमंगला समयमाता मंदिर, वनदेवी, पाटेश्वरी माता, स्टेशनपुरवा स्थित दुर्गामंदिर, लहुरादेवी मंदिर, मगहर दुर्गा मंदिर, बखिरा दुर्गा मंदिर, मेंहदावल स्थित नगरवाली मंदिर, राजमाता मंदिर आदि मंदिराें में मां की पूजा की गई। भक्तों ने पूजन सामग्री से मां दुर्गा की श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया।
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आस्था व श्रद्धा का केन्द्र है मां सिद्धिदा मंदिर
खलीलाबाद के बरदहिया बाजार स्थित मां सिद्धिदा मंदिर श्रद्धा व आस्था का बड़ा केन्द्र है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर में आकर मां के चरणों में श्रद्धा निवेदित कर मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।
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मां सिद्धिदा मंदिर के संबंध में मान्यता है कि पांच सितंबर 1984 को राजेन्द्र मिश्र को मां के मंदिर निर्माण की प्रेरणा जागृत हुई। उन्होंने राधेरमन मिश्र, भालेन्दुधर पाण्डेय (नंगा पाण्डेय) के अलावा अपने परिवार और नगरवासियों से मंदिर निर्माण की चर्चा की। मां के मंदिर के निर्माण की बात को सबने स्वीकार किया और सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
6 सितम्बर 1984 को सुबह भगवती प्रसाद मिश्र के कर-कमलों से मंदिर का शिलान्यास हुआ। साथ ही मंदिर निर्माण समिति का गठन हुआ। 25 सितंबर 1984 को मंदिर में अष्टधातु की मां सिद्धिदा की मूर्ति स्व. भगवती मिश्र की धर्मपत्नी सरस्वती देवी (डीघा) के कर-कमलों स्थापित की गई। सबके सहयोग से मंदिर निर्माण में तेजी आई। 12 अक्टूबर 1994 को पुरोहितों ने विधि-विधान से पूजन अर्चना कर मंदिर में विशाल मां सिद्धिदा की मूर्ति की स्थापना की गई।


मां सिद्धिदा सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मां के मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और मां के चरणों में श्रद्धा निवेदित करते हैं। भगवान राम ने भी मां सिद्धिदात्री की अर्चना कर लंका पर विजय प्राप्त किया था। नवरात्रभर महिलाएं शाम को मंदिर में इकट्ठा होकर भजन-कीर्तन करती हैं।
- पंडित शुभकरन उपाध्याय, पुरोहित, मां सिद्धिदा मंदिर बरदहिया
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