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Sant Kabir Nagar News: कवियों ने रचनाओं के जरिए जीवन के विविध रंग उकेरे
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संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को एक स्कूल के सभाकक्ष में 163वीं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, जीवन, रिश्तों और समसामयिक विषयों के विभिन्न पहलुओं को उकेरा। श्रोताओं ने रचनाओं पर तालियों से कवियों का उत्साह बढ़ाया।
मंच के संरक्षक अवधेश पांडेय ने ‘उठो जवानों युद्ध कर, अनर्थ के विरुद्ध कर, विकार युक्त तन कनक तपा-तपा के शुद्ध कर’ सुनाकर गोष्ठी की शुरुआत की।
मुख्य अतिथि विनय कुमार अजीज ने ‘मुझसे दुनिया पूछती है किसको हम अपना कहें, वक्त पर जो काम आए वो तुम्हारा मीत है’ सुनाकर रिश्तों की पहचान का संदेश दिया। अध्यक्षता कर रहे सरदार हरिभजन सिंह भजन ने ‘जिनका नाम हरि नाम से लगाव हो गया, दूर जिंदगी का हर अभाव हो गया’ सुनाकर हरिनाम से जुड़ने का आह्वान किया। हशमत अजीजी ने ‘नशा दौलत का चढ़ता जा रहा है, वो अच्छा था बिगड़ता जा रहा है’ सुनाकर समाज में आ रहे बदलाव पर कटाक्ष किया। शाहरूख सागर ने ‘ओ झूठा ख्वाब सबको दिखाने में लगा है, सरकार अपनी जो भी बनाने में लगा है’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
मंच के कोषाध्यक्ष राधेश्याम मिश्र श्याम ने ‘पितृ पक्ष कीजिए पितरों का सम्मान, मिल करके हम आज करें आओ इसका आह्वान’ सुनाकर पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने ‘मुझको जन सितम तो तेरे गुलसितां से है, मर्जी तेरी है फूल भी दे या मुझको खार दें’ सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की।
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युवा कवि अविनाश पांडेय ने ‘एक बाधा तोड़ता हूं, दूसरी आकर खड़ी है, जीव की इस वीथिका पर अब भला कैसी खड़ी है’ सुनाकर जीवन की चुनौतियों को रेखांकित किया। जितेंद्र कुमार ने ‘हम पत्नियों के अधीन लोग हैं, अब हम कहां स्वाधीन लोग हैं’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
इसके अलावा प्रकाश पांडेय, ज्ञान प्रकाश समेत अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। गोष्ठी के दौरान श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं पर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
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मंच के संरक्षक अवधेश पांडेय ने ‘उठो जवानों युद्ध कर, अनर्थ के विरुद्ध कर, विकार युक्त तन कनक तपा-तपा के शुद्ध कर’ सुनाकर गोष्ठी की शुरुआत की।
मुख्य अतिथि विनय कुमार अजीज ने ‘मुझसे दुनिया पूछती है किसको हम अपना कहें, वक्त पर जो काम आए वो तुम्हारा मीत है’ सुनाकर रिश्तों की पहचान का संदेश दिया। अध्यक्षता कर रहे सरदार हरिभजन सिंह भजन ने ‘जिनका नाम हरि नाम से लगाव हो गया, दूर जिंदगी का हर अभाव हो गया’ सुनाकर हरिनाम से जुड़ने का आह्वान किया। हशमत अजीजी ने ‘नशा दौलत का चढ़ता जा रहा है, वो अच्छा था बिगड़ता जा रहा है’ सुनाकर समाज में आ रहे बदलाव पर कटाक्ष किया। शाहरूख सागर ने ‘ओ झूठा ख्वाब सबको दिखाने में लगा है, सरकार अपनी जो भी बनाने में लगा है’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
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मंच के कोषाध्यक्ष राधेश्याम मिश्र श्याम ने ‘पितृ पक्ष कीजिए पितरों का सम्मान, मिल करके हम आज करें आओ इसका आह्वान’ सुनाकर पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने ‘मुझको जन सितम तो तेरे गुलसितां से है, मर्जी तेरी है फूल भी दे या मुझको खार दें’ सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की।
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युवा कवि अविनाश पांडेय ने ‘एक बाधा तोड़ता हूं, दूसरी आकर खड़ी है, जीव की इस वीथिका पर अब भला कैसी खड़ी है’ सुनाकर जीवन की चुनौतियों को रेखांकित किया। जितेंद्र कुमार ने ‘हम पत्नियों के अधीन लोग हैं, अब हम कहां स्वाधीन लोग हैं’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
इसके अलावा प्रकाश पांडेय, ज्ञान प्रकाश समेत अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। गोष्ठी के दौरान श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं पर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।