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Sant Kabir Nagar News: बारिश के पानी का करें संचयन, भूमिगत जलस्तर रखें बरकरार
Tue, 06 Jun 2023 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 06 Jun 2023 11:13 PM IST
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शहर में सुख पड़ा पोखरा।संवाद
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संतकबीरनगर। तेज धूप जहां लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है, वहीं इस समय पानी के लिए भी समस्या खड़ी हो गई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी के जलस्तर की दिक्कत खड़ी हो गई है। इसके लिए लोगों को पानी का संचयन करना होगा। खलीलाबाद शहर के ऐसे मोहल्ले हैं, जहां भूमिगत जलस्तर काफी नीचे गिर गया है। इससे उन्हें पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो पानी का संचयन कर अपने आसपास का भूमिगत जलस्तर बेहतर किए हुए हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में शहरवासियों में पानी के जलस्तर की समस्या सामने आई है। इसमें नगर पालिका ने सूखे पोखरों में जल संचयन कर जलस्तर सही करने की पहल करने की बात कही है।
खलीलाबाद शहर की आबादी एक लाख के करीब है। इसमें कुल 25 वार्ड हैं, और सिर्फ 13 वार्डों में जलापूर्ति हो पाती है। इस समय जून का महीना चल रहा है, ऐसे में तेज धूप ने हर किसी को बेहाल कर दिया है। तेज धूप के चलते वाटर लेबल भी नीचे चला गया है, किसी के घर में पानी नहीं आ रहा है, तो किसी के घर पानी आ भी रहा है तो भी कहने को ही है।
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शहर के अंसार टोला, बंजरिया पूर्वी, पठान टोला, शास्त्री नगर ऐेसे मुहल्ले हैं, जहां भूमिगत जलस्तर की समस्या उत्पन्न हो गई है। यहां लगे हैंडपंप से पानी तो जरूर निकलता है, लेकिन कई बार नल चलाना पड़ता है। शहर में बने पोखरे भी सूखे हुए हैं। समय माता मंदिर के पोखरे का निर्माण चल रहा है, जिसकी वजह से उसमें पानी नहीं है। इसी तरह से शुगर मिल चौराहे पर बनाए गए कृत्रिम पोखरे में भी पानी नहीं है। पानी न होने से जानवर भी परेशान हो रहे हैं।
मौलाना आजाद इंटर कॉलेज के पास बने पोखरे में स्कूल के लोगों ने पानी संचयन कर वाटर लेबल सही करने का तरीका निकाला है।
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गर्मी की वजह से 50 फीट नीचे चला गया है जलस्तर
जल निगम के अफसरों के अनुसार इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। इसका असर पानी के लेबल पर भी पड़ा है। इस समय वाटर लेबल नीचे गिर गया है। भूमिगत जलस्तर करीब 50 फीट नीचे होने की वजह से पानी ऊपर आने में दिक्कत हो रही है। इंडिया मार्का हैंडपंप से तो पानी निकल भी जा रहा है, लेकिन साधारण नल से वह भी नहीं निकल रहा है। इसके लिए लोगों को जल संचयन करना चाहिए।
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जल संचयन जरूरी
जल संचयन सभी को करना चाहिए। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में तो सामने पोखरा है, जिसकी वजह से वाटर लेबल सही रहता है, लेकिन आवास पर वाटर लेबल की समस्या है। इसका एक ही उपाय है जल संचयन किया जाना।
-यूनुस अख्तर, प्रधानाचार्य, मौलाना आजाद इंटर कॉलेज
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नगर पालिका की तरफ से सुबह शाम पानी तो आता है, लेकिन जब घर पर पंप चलाया जाता है तो उससे 500 लीटर की टंकी भरने में दो घंटे से भी अधिक समय लग जाता है। इससे बिजली की खपत भी होती है। आज अगर जल संचयन करें तो कुछ राहत जरूर मिलेगी।
-उमेश वर्मा, नागरिक
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भूमिगत जलस्तर सही करने के लिए वर्षा के जल को सतह पर ही जमा करके उपयोग में ला जा सकता है। इसे नाली में न बहने दिया जाए। गर्मी में जब पानी की कमी हो तब हम इसको अपने उपयोग में ला सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को जल संचयन का उपाय करना चाहिए।
- रईस अहमद खां, नागरिक
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वार्ड में पानी को लेकर दिक्कत है, कहीं भी पोखरे में पानी नहीं है, और वह पूरी तरह से सूख चुके हैं, इसके साथ ही टुल्लू पंप से पानी नहीं निकल रहा है, जिससे समस्या खड़ी हो गई है, अब तो बारिश का इंतजार किया जा रहा है, जिससे वाटर लेबल सही हो सके।
-राज कुमार, नागरिक
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हम भूमि के अंदर बड़ी-बड़ी टंकी बनाकर जल संरक्षित करके रख सकते हैं। ऐसा करने से हमारे भूमिगत जल की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इस तरीके में हम ज्यादा से ज्यादा पानी को मिट्टी के अंदर संचय कर सकते हैं, जिससे वाटर लेबल भी सही रह सकेगा।
-सुदेश कुमार, एक्सईएन, जल निगम
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अमर उजाला की पड़ताल में शहरवासियों में पानी के जलस्तर की समस्या सामने आई है। इसमें नगर पालिका ने सूखे पोखरों में जल संचयन कर जलस्तर सही करने की पहल करने की बात कही है।
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खलीलाबाद शहर की आबादी एक लाख के करीब है। इसमें कुल 25 वार्ड हैं, और सिर्फ 13 वार्डों में जलापूर्ति हो पाती है। इस समय जून का महीना चल रहा है, ऐसे में तेज धूप ने हर किसी को बेहाल कर दिया है। तेज धूप के चलते वाटर लेबल भी नीचे चला गया है, किसी के घर में पानी नहीं आ रहा है, तो किसी के घर पानी आ भी रहा है तो भी कहने को ही है।
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शहर के अंसार टोला, बंजरिया पूर्वी, पठान टोला, शास्त्री नगर ऐेसे मुहल्ले हैं, जहां भूमिगत जलस्तर की समस्या उत्पन्न हो गई है। यहां लगे हैंडपंप से पानी तो जरूर निकलता है, लेकिन कई बार नल चलाना पड़ता है। शहर में बने पोखरे भी सूखे हुए हैं। समय माता मंदिर के पोखरे का निर्माण चल रहा है, जिसकी वजह से उसमें पानी नहीं है। इसी तरह से शुगर मिल चौराहे पर बनाए गए कृत्रिम पोखरे में भी पानी नहीं है। पानी न होने से जानवर भी परेशान हो रहे हैं।
मौलाना आजाद इंटर कॉलेज के पास बने पोखरे में स्कूल के लोगों ने पानी संचयन कर वाटर लेबल सही करने का तरीका निकाला है।
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गर्मी की वजह से 50 फीट नीचे चला गया है जलस्तर
जल निगम के अफसरों के अनुसार इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। इसका असर पानी के लेबल पर भी पड़ा है। इस समय वाटर लेबल नीचे गिर गया है। भूमिगत जलस्तर करीब 50 फीट नीचे होने की वजह से पानी ऊपर आने में दिक्कत हो रही है। इंडिया मार्का हैंडपंप से तो पानी निकल भी जा रहा है, लेकिन साधारण नल से वह भी नहीं निकल रहा है। इसके लिए लोगों को जल संचयन करना चाहिए।
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जल संचयन जरूरी
जल संचयन सभी को करना चाहिए। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में तो सामने पोखरा है, जिसकी वजह से वाटर लेबल सही रहता है, लेकिन आवास पर वाटर लेबल की समस्या है। इसका एक ही उपाय है जल संचयन किया जाना।
-यूनुस अख्तर, प्रधानाचार्य, मौलाना आजाद इंटर कॉलेज
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नगर पालिका की तरफ से सुबह शाम पानी तो आता है, लेकिन जब घर पर पंप चलाया जाता है तो उससे 500 लीटर की टंकी भरने में दो घंटे से भी अधिक समय लग जाता है। इससे बिजली की खपत भी होती है। आज अगर जल संचयन करें तो कुछ राहत जरूर मिलेगी।
-उमेश वर्मा, नागरिक
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भूमिगत जलस्तर सही करने के लिए वर्षा के जल को सतह पर ही जमा करके उपयोग में ला जा सकता है। इसे नाली में न बहने दिया जाए। गर्मी में जब पानी की कमी हो तब हम इसको अपने उपयोग में ला सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को जल संचयन का उपाय करना चाहिए।
- रईस अहमद खां, नागरिक
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वार्ड में पानी को लेकर दिक्कत है, कहीं भी पोखरे में पानी नहीं है, और वह पूरी तरह से सूख चुके हैं, इसके साथ ही टुल्लू पंप से पानी नहीं निकल रहा है, जिससे समस्या खड़ी हो गई है, अब तो बारिश का इंतजार किया जा रहा है, जिससे वाटर लेबल सही हो सके।
-राज कुमार, नागरिक
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हम भूमि के अंदर बड़ी-बड़ी टंकी बनाकर जल संरक्षित करके रख सकते हैं। ऐसा करने से हमारे भूमिगत जल की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इस तरीके में हम ज्यादा से ज्यादा पानी को मिट्टी के अंदर संचय कर सकते हैं, जिससे वाटर लेबल भी सही रह सकेगा।
-सुदेश कुमार, एक्सईएन, जल निगम