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उपेक्षा की वजह से खंडहर बन चुका है जिले का इकलौता वन पार्क
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उपेक्षा की वजह से खंडहर बन चुका है जिले का इकलौता वन पार्क
- कलेक्ट्रेट के समीप बना है पार्क, 20 लाख रुपये हुए हैं खर्च
- देखरेख के अभाव में पार्क में झाड़-झंखाड़ के साथ ही जानवरों की लगी मूर्तियां टूट चुकी हैं
फोटो 51 और 53
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिले का इकलौता वन चेतना पार्क खंडहर बन चुका है। यह पार्क कलेक्ट्रेट के पीछे और नई तहसील के सामने बना है। करीब 10 साल पहले बने पार्क में रखरखाव न होने से यहां झाड़-झंखाड़ उग गए हैं। साथ ही मनोरंजन के लिए पार्क में लगी मूर्तियां टूट चुकी हैं, यहां बैठने के लिए बनी कुर्सियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिले के इकलौता पार्क की बदहाली पर जिम्मेदार आखिर क्यों ध्यान नहीं दे रहे हैं, यदि इसकी दशा सुधरती तो यहां घूमने शहर के लोगों के साथ स्कूली बच्चे भी पहुंचते।
वर्ष 2011-12 में करीब 20 लाख रुपये की लागत से कलेक्ट्रेट के पास वन विभाग के कार्यालय के निकट वन चेतना पार्क का मनोरंजन केे लिए निर्माण कराया गया था। उसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, मनमोहक दृश्य के लिए जंगली जानवरों की तस्वीरें, हरियाली के लिए तरह-तरह के पौधे लगाए गए हैं। लोगों को टहलने के लिए चारों तरफ फुटपाथ का निर्माण कराया गया है। वन पार्क के निर्माण के पीछे उद्देश्य यह था कि बुजुर्ग मॉर्निग वॉक करेंगे और स्कूली बच्चे मनोरंज करने यहां आएंगे। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बारिश के मौसम में मनोरंजन केंद्र के अंदर प्रवेश करना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। पार्क में घूूमने के लिए बना फुटपाथ और विभिन्न जंगली जानवरों की मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके अलावा कुछ मूर्तियां भी नदारद हो चुकी हैं। साथ ही पार्क में झाड़ झंखाड़ उग आए हैं। पार्क पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है। शहर के दिलीप अग्रहरि, बजरंगी लाल और चंद प्रकाश राय आदि का कहना है कि शहर का इकलौता पार्क जब बना तो उम्मीद जगी कि यहां पर शाम के समय बच्चों का मनोरंजन हो सकेगा, पर पार्क जबसे बना तभी से बदहाल है। अब पार्क में जाना किसी खतरे से कम नहीं है।
वन पार्क की स्थिति काफी खराब है, इसके बेहतर बनाने की दिशा में पहल किया गया था, पर धन की कमी आड़े आ रही है। शासन में वन पार्क को बेहतर बनाने के लिए पत्राचार किया गया है, अगर शासन से धन का आवंटन होता है तो पार्क को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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टी रंगाराजू, डीएफओ
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- कलेक्ट्रेट के समीप बना है पार्क, 20 लाख रुपये हुए हैं खर्च
- देखरेख के अभाव में पार्क में झाड़-झंखाड़ के साथ ही जानवरों की लगी मूर्तियां टूट चुकी हैं
फोटो 51 और 53
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिले का इकलौता वन चेतना पार्क खंडहर बन चुका है। यह पार्क कलेक्ट्रेट के पीछे और नई तहसील के सामने बना है। करीब 10 साल पहले बने पार्क में रखरखाव न होने से यहां झाड़-झंखाड़ उग गए हैं। साथ ही मनोरंजन के लिए पार्क में लगी मूर्तियां टूट चुकी हैं, यहां बैठने के लिए बनी कुर्सियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिले के इकलौता पार्क की बदहाली पर जिम्मेदार आखिर क्यों ध्यान नहीं दे रहे हैं, यदि इसकी दशा सुधरती तो यहां घूमने शहर के लोगों के साथ स्कूली बच्चे भी पहुंचते।
वर्ष 2011-12 में करीब 20 लाख रुपये की लागत से कलेक्ट्रेट के पास वन विभाग के कार्यालय के निकट वन चेतना पार्क का मनोरंजन केे लिए निर्माण कराया गया था। उसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, मनमोहक दृश्य के लिए जंगली जानवरों की तस्वीरें, हरियाली के लिए तरह-तरह के पौधे लगाए गए हैं। लोगों को टहलने के लिए चारों तरफ फुटपाथ का निर्माण कराया गया है। वन पार्क के निर्माण के पीछे उद्देश्य यह था कि बुजुर्ग मॉर्निग वॉक करेंगे और स्कूली बच्चे मनोरंज करने यहां आएंगे। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बारिश के मौसम में मनोरंजन केंद्र के अंदर प्रवेश करना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। पार्क में घूूमने के लिए बना फुटपाथ और विभिन्न जंगली जानवरों की मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके अलावा कुछ मूर्तियां भी नदारद हो चुकी हैं। साथ ही पार्क में झाड़ झंखाड़ उग आए हैं। पार्क पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है। शहर के दिलीप अग्रहरि, बजरंगी लाल और चंद प्रकाश राय आदि का कहना है कि शहर का इकलौता पार्क जब बना तो उम्मीद जगी कि यहां पर शाम के समय बच्चों का मनोरंजन हो सकेगा, पर पार्क जबसे बना तभी से बदहाल है। अब पार्क में जाना किसी खतरे से कम नहीं है।
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वन पार्क की स्थिति काफी खराब है, इसके बेहतर बनाने की दिशा में पहल किया गया था, पर धन की कमी आड़े आ रही है। शासन में वन पार्क को बेहतर बनाने के लिए पत्राचार किया गया है, अगर शासन से धन का आवंटन होता है तो पार्क को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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टी रंगाराजू, डीएफओ