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प्रशिक्षण से खुल रही तरक्की की राह
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प्रशिक्षण से खुल रही तरक्की की राह
18 से 45 वर्ष के ग्रामीण क्षेत्रों के युवक-युवतियों को दिया जाता है 56 विधाओं में निशुल्क प्रशिक्षण
दस सालों में 6592 लोगों ने लिया प्रशिक्षण और 5118 लोगों ने किया खुद का रोजगार
संतकबीरनगर। भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर बेरोजगार युवक और युवतियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। पिछले एक साल के भीतर 639 युवक और युवतियों को विभिन्न ट्रेडों में निशुल्क प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया गया। इसमें से 552 लोग स्वरोजगार करके परिवार के खर्च में आर्थिक मदद कर रहे हैं।
शासन की ओर से 18 से 45 वर्ष के ग्रामीण क्षेत्र के युवक और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 56 विधाओं में निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए वर्ष 2011 से जिले में एआरटीओ कार्यालय के पास भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान स्थापित है। युवक-युवतियों को फोटो फ्रेमिंग एंड लेमिनेशन, जूट बैग मेंकिंग, ओमेन टेलर्स, ब्यूटी पार्लर मैनेजमेंट, सेल फोन रिपेयर एंड सर्विस, फोटो कॉपी एवं वीडियोग्राफी, साफ्ट ट्वायज मेकर एंड सेलर, रेफ्रीजरेशन एंड ऐयर कंडडीशनिंग, कंयूटराइज्ड एकाउंटिंग, कृषि उद्यमी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग एंड वर्मी कंपोस्टर मेकिंग, बकरी पालन, मधुमक्खी, पेपर कॅवर, एन्वलप एवं फाइल मेकिंग, मशरूम कल्टीवेशन, सब्जी की खेती, अचार व पापड़, अगरबत्ती बनाना, मोमबत्ती बनाना, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, किराना शॉप आदि विधाओं में प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां प्रशिक्षणार्थियों के खाने और रहने की व्यवस्था है। दस से तीस दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है। योग्य गेस्ट टीचर भी प्रशिक्षण देने के लिए बुलाए जाते हैं। प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अख्तर हुसेन बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 20 प्रोग्राम का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष 23 प्रोग्राम आयोजित किया गया। 500 युवक-युवतियों के प्रशिक्षण के लक्ष्य के सापेक्ष 630 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें 552 लोगों ने खुद का रोजगार शुरू कर दिया। 120 लोगों ने खुद के पैसे से काम शुरू किया तो 432 लोगों ने बैंक से ऋण लेकर रोजगार शुरू किया है। वैसे पिछले दस सालों में 246 प्रोग्राम चले हैं। इसमें 6592 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। 5118 लोग रोजगार से जुड़ गए हैं। 2095 लोगों ने खुद के पैसे से रोजगार सृजित किया है। जबकि 2037 लोगों ने बैंक से ऋण लेकर रोजगार किया है। इसमें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं भी प्रशिक्षण लेकर खुद का रोजगार करने में आगे आ रही हैं। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने बताया कि समूह की महिलाओं को विभाग की ओर से आजीविका के लिए अनुदान भी दिया जाता है। शासन की ओर से समूह की महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई तरह के काम सौंपे गए हैं। इसमें बैंक सखी भी नियुक्त हैं। जिन्हें अपने गांवों में छोटे-छोटे लेन-देन करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। फिनो बैंक की ओर से इन्हें हैंडसेट, प्रिंटर आदि उपलब्ध कराया जाता है। इस केंद्र से काफी संख्या में समूह की महिलाएं अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण लेकर खुद का रोजगार कर रही हैं।
ब्यूटी पॉर्लर की दुकान से सुधरी घर की स्थिति
महुली कस्बे की रहने वाली सरोज मौर्या बताती हैं कि उनके पति अनिल मौर्या पेंटिंग का काम करते हैं। उनके पास दो बच्चे हैं। कोरोना काल में घर की आर्थिक स्थिति काफी लचर हो गई। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। वह इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की हैं। जनवरी 2021 में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र से 30 दिन का निशुुल्क ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कीं। एक महीना पहले महुली कस्बे में ही किराए के मकान में ब्यूटी पॉर्लर की दुकान खोली हैं। शादी-विवाह की बुकिंग में भी जाती है। महीने में औसतन 5000 रुपये की आमदनी हो जा रही है। इससे परिवार का खर्च चलाना आसान हो गया है।
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आत्मनिर्भरता से घर की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई
महुली कस्बे की ही रहने वाली 23 वर्षीय रीमा पुत्री स्वर्गीय रामजी गुप्ता बताती हैं कि वह स्नातक है। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी तो उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की बात सोची। वर्ष 2020 में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से 30 दिन का निशुल्क ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कीं। करीब एक साल पहले परिजनों की मदद से महुली में ही किराए के मकान में ब्यूटी पॉर्लर की दुकान खोलीं। शादी-विवाह में भी दुल्हन को सजाने जाती हैं। कोरोना काल में तो काम कम मिला, लेकिन खुद के हुनर से परिवार के खर्च में मदद कर पाने की स्थिति में पहुंच गई। उनका कहना है कि प्रशिक्षण संस्थान बेरोजगारों को हुनरमंद बनाकर आत्म निर्भर बनाने की ओर अग्रसर है।
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18 से 45 वर्ष के ग्रामीण क्षेत्रों के युवक-युवतियों को दिया जाता है 56 विधाओं में निशुल्क प्रशिक्षण
दस सालों में 6592 लोगों ने लिया प्रशिक्षण और 5118 लोगों ने किया खुद का रोजगार
संतकबीरनगर। भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर बेरोजगार युवक और युवतियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। पिछले एक साल के भीतर 639 युवक और युवतियों को विभिन्न ट्रेडों में निशुल्क प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया गया। इसमें से 552 लोग स्वरोजगार करके परिवार के खर्च में आर्थिक मदद कर रहे हैं।
शासन की ओर से 18 से 45 वर्ष के ग्रामीण क्षेत्र के युवक और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 56 विधाओं में निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए वर्ष 2011 से जिले में एआरटीओ कार्यालय के पास भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान स्थापित है। युवक-युवतियों को फोटो फ्रेमिंग एंड लेमिनेशन, जूट बैग मेंकिंग, ओमेन टेलर्स, ब्यूटी पार्लर मैनेजमेंट, सेल फोन रिपेयर एंड सर्विस, फोटो कॉपी एवं वीडियोग्राफी, साफ्ट ट्वायज मेकर एंड सेलर, रेफ्रीजरेशन एंड ऐयर कंडडीशनिंग, कंयूटराइज्ड एकाउंटिंग, कृषि उद्यमी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग एंड वर्मी कंपोस्टर मेकिंग, बकरी पालन, मधुमक्खी, पेपर कॅवर, एन्वलप एवं फाइल मेकिंग, मशरूम कल्टीवेशन, सब्जी की खेती, अचार व पापड़, अगरबत्ती बनाना, मोमबत्ती बनाना, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, किराना शॉप आदि विधाओं में प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां प्रशिक्षणार्थियों के खाने और रहने की व्यवस्था है। दस से तीस दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है। योग्य गेस्ट टीचर भी प्रशिक्षण देने के लिए बुलाए जाते हैं। प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अख्तर हुसेन बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 20 प्रोग्राम का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष 23 प्रोग्राम आयोजित किया गया। 500 युवक-युवतियों के प्रशिक्षण के लक्ष्य के सापेक्ष 630 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें 552 लोगों ने खुद का रोजगार शुरू कर दिया। 120 लोगों ने खुद के पैसे से काम शुरू किया तो 432 लोगों ने बैंक से ऋण लेकर रोजगार शुरू किया है। वैसे पिछले दस सालों में 246 प्रोग्राम चले हैं। इसमें 6592 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। 5118 लोग रोजगार से जुड़ गए हैं। 2095 लोगों ने खुद के पैसे से रोजगार सृजित किया है। जबकि 2037 लोगों ने बैंक से ऋण लेकर रोजगार किया है। इसमें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं भी प्रशिक्षण लेकर खुद का रोजगार करने में आगे आ रही हैं। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने बताया कि समूह की महिलाओं को विभाग की ओर से आजीविका के लिए अनुदान भी दिया जाता है। शासन की ओर से समूह की महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई तरह के काम सौंपे गए हैं। इसमें बैंक सखी भी नियुक्त हैं। जिन्हें अपने गांवों में छोटे-छोटे लेन-देन करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। फिनो बैंक की ओर से इन्हें हैंडसेट, प्रिंटर आदि उपलब्ध कराया जाता है। इस केंद्र से काफी संख्या में समूह की महिलाएं अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण लेकर खुद का रोजगार कर रही हैं।
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ब्यूटी पॉर्लर की दुकान से सुधरी घर की स्थिति
महुली कस्बे की रहने वाली सरोज मौर्या बताती हैं कि उनके पति अनिल मौर्या पेंटिंग का काम करते हैं। उनके पास दो बच्चे हैं। कोरोना काल में घर की आर्थिक स्थिति काफी लचर हो गई। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। वह इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की हैं। जनवरी 2021 में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र से 30 दिन का निशुुल्क ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कीं। एक महीना पहले महुली कस्बे में ही किराए के मकान में ब्यूटी पॉर्लर की दुकान खोली हैं। शादी-विवाह की बुकिंग में भी जाती है। महीने में औसतन 5000 रुपये की आमदनी हो जा रही है। इससे परिवार का खर्च चलाना आसान हो गया है।
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आत्मनिर्भरता से घर की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई
महुली कस्बे की ही रहने वाली 23 वर्षीय रीमा पुत्री स्वर्गीय रामजी गुप्ता बताती हैं कि वह स्नातक है। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी तो उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की बात सोची। वर्ष 2020 में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से 30 दिन का निशुल्क ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कीं। करीब एक साल पहले परिजनों की मदद से महुली में ही किराए के मकान में ब्यूटी पॉर्लर की दुकान खोलीं। शादी-विवाह में भी दुल्हन को सजाने जाती हैं। कोरोना काल में तो काम कम मिला, लेकिन खुद के हुनर से परिवार के खर्च में मदद कर पाने की स्थिति में पहुंच गई। उनका कहना है कि प्रशिक्षण संस्थान बेरोजगारों को हुनरमंद बनाकर आत्म निर्भर बनाने की ओर अग्रसर है।