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Sant Kabir Nagar News: शाम आठ बजे ही हो जाता था ब्लैकआउट, बम-गोले चलने की आती थीं आवाजें
Mon, 12 May 2025 11:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 12 May 2025 11:28 PM IST
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जनसाधारण एक्सप्रेस से खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरे अमृतसर, अंबाला से आए लोग।
संतकबीरनगर। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध विराम के बाद भी लोगों के अंदर बमों की आवाज तथा ब्लैक आउट का भय दिख रहा है।
ट्रेनों से भारी संख्या में लोग जम्मू और अमृतसर से वापस आ रहे हैं। युद्ध की कहानी सुनाते हुए उनके चेहरे पर एक खौफ चस्पा दिखाई देता है। बच्चे सहम से जाते हैं। ट्रेनों के साथ ही बसों से भी लोग वापस आ रहे हैं।
अमृतसर से गोरखपुर आने वाली जनसाधारण एक्सप्रेस सोमवार की दोपहर तीन बजे खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरती है तो उसमें से यात्रियों का एक रेला सा उतरता है। उतरने वाले सैकड़ों यात्रियों में आंबेडकरनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और खजनी तक के यात्री शामिल हैं। ट्रेन से उतरने वाले महुली के रामसेवक बताते हैं कि वह एक बुनाई फैक्टरी में काम करते थे। आए दिन वहां पर धमाके हो रहे थे। आसमान में दिख रहे तारे भी हमें मिसाइल और बम ही मालूम पड़ते थे। आज यहां पहुंचकर सुकून मिला। मुखलिसपुर के संजय का कहना है कि वह अमृतसर में आज भी स्थिति युद्ध विराम के बाद भी युद्ध जैसी ही है।
रात आठ बजे ही ब्लैकआउट हो जाता है। अपने पति सुजीत के साथ आईं परमेश्वरपुर की सुनीता बताती हैं कि भय की स्थिति बनी रहती है। इसके चलते लोगों को घरों में ही कैद रहना पड़ रहा है। हालात सामान्य होने के बाद ही अब वापस जाएंगे। कुछ ऐसी ही स्थिति इस तरफ से आने वाली अन्य ट्रेनों की भी है।
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ट्रेनों से भारी संख्या में लोग जम्मू और अमृतसर से वापस आ रहे हैं। युद्ध की कहानी सुनाते हुए उनके चेहरे पर एक खौफ चस्पा दिखाई देता है। बच्चे सहम से जाते हैं। ट्रेनों के साथ ही बसों से भी लोग वापस आ रहे हैं।
अमृतसर से गोरखपुर आने वाली जनसाधारण एक्सप्रेस सोमवार की दोपहर तीन बजे खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरती है तो उसमें से यात्रियों का एक रेला सा उतरता है। उतरने वाले सैकड़ों यात्रियों में आंबेडकरनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और खजनी तक के यात्री शामिल हैं। ट्रेन से उतरने वाले महुली के रामसेवक बताते हैं कि वह एक बुनाई फैक्टरी में काम करते थे। आए दिन वहां पर धमाके हो रहे थे। आसमान में दिख रहे तारे भी हमें मिसाइल और बम ही मालूम पड़ते थे। आज यहां पहुंचकर सुकून मिला। मुखलिसपुर के संजय का कहना है कि वह अमृतसर में आज भी स्थिति युद्ध विराम के बाद भी युद्ध जैसी ही है।
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रात आठ बजे ही ब्लैकआउट हो जाता है। अपने पति सुजीत के साथ आईं परमेश्वरपुर की सुनीता बताती हैं कि भय की स्थिति बनी रहती है। इसके चलते लोगों को घरों में ही कैद रहना पड़ रहा है। हालात सामान्य होने के बाद ही अब वापस जाएंगे। कुछ ऐसी ही स्थिति इस तरफ से आने वाली अन्य ट्रेनों की भी है।
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