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सेटेलाइट से होगी मनरेगा की निगरानी
शोभित कुमार पांडेय/sant kabir nagar
Updated Mon, 11 Jul 2016 11:14 PM IST
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मनरेेगा के तहत होने वाले कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए इसकी निगरानी अब सेटलाइट से होगी। केंद्र सरकार के इस पायलेट प्रोजेक्ट के लिए देश भर में कुल 34 जिलों का चयन किया गया है। इस योजना के तहत यूपी से केवल एक जिला संतकबीरनगर का चयन हुआ है। जिले में खलीलाबाद विकास खंड के मीरगंज गांव में हुए मनरेगा के कामों की जांच सेटलाइट से होगी। पहली अगस्त से यह प्रक्रिया का प्रारंभ होगी। उसके बाद पूरे जिले में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
डीएम डॉक्टर सरोज कुमार ने सोमवार को बताया कि वर्ष 2006 से मनरेगा लागू हुई है।तब से लेकर अब तक मनरेेगा से सड़क, पोखरा खुदाई, नदी,नहर की खुदाई आदि कराए गए कार्यो की निगरानी जीयो मैपिंग सेटेलाइट सिस्टम से की जाएगी। ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम यानि भौगोलिक सूचना पद्घति से जो काम हुए है अथवा कराए जा रहे हैं, कि निगरानी कराई जाएगी।
अक्षांश और देशांतर के माध्यम से मनरेगा की जो भी परियोजनाएं है,उसके सही लोकेशन का पता चल जाएगा। बताया कि इस योजना के तहत नवंबर के बाद देश के 100 और जिले चयनित किए जाएंगे। मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भुगतान के लिए उनके बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक किए जाने की कार्रवाई शुरु करा दी गई।
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जिससे मजदूरी भुगतान भी पारदर्शी तरीके से हो। डीसी मनरेगा विनय श्रीवास्तव ने बताया कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि परियोजना का सही लोकेशन का पता चलेगा। यदि कोई काम पूर्व में एक कार्यदाई संस्था ने कराया गया है तो उस काम पर डुप्लीकेशी करके कोई दूसरी कार्यदाई संस्था काम नहीं करा पाएगी। मनरेगा से जुड़े जिम्मेदारों को पहले विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे कार्य सही ढंग से कराया जा सके।
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डीएम डॉक्टर सरोज कुमार ने सोमवार को बताया कि वर्ष 2006 से मनरेगा लागू हुई है।तब से लेकर अब तक मनरेेगा से सड़क, पोखरा खुदाई, नदी,नहर की खुदाई आदि कराए गए कार्यो की निगरानी जीयो मैपिंग सेटेलाइट सिस्टम से की जाएगी। ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम यानि भौगोलिक सूचना पद्घति से जो काम हुए है अथवा कराए जा रहे हैं, कि निगरानी कराई जाएगी।
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अक्षांश और देशांतर के माध्यम से मनरेगा की जो भी परियोजनाएं है,उसके सही लोकेशन का पता चल जाएगा। बताया कि इस योजना के तहत नवंबर के बाद देश के 100 और जिले चयनित किए जाएंगे। मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भुगतान के लिए उनके बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक किए जाने की कार्रवाई शुरु करा दी गई।
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जिससे मजदूरी भुगतान भी पारदर्शी तरीके से हो। डीसी मनरेगा विनय श्रीवास्तव ने बताया कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि परियोजना का सही लोकेशन का पता चलेगा। यदि कोई काम पूर्व में एक कार्यदाई संस्था ने कराया गया है तो उस काम पर डुप्लीकेशी करके कोई दूसरी कार्यदाई संस्था काम नहीं करा पाएगी। मनरेगा से जुड़े जिम्मेदारों को पहले विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे कार्य सही ढंग से कराया जा सके।