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Sant Kabir Nagar News: आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति का फल ही रास
Sun, 16 Nov 2025 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 16 Nov 2025 12:14 AM IST
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अछियां में श्रीमद्भागवत कथा कहते प्रवचनकर्ता श्रवण जी महाराज
- फोटो : एसटीएफ और एका पुलिस द्वारा गिरफ्तार मिलावटी पेट्रोल-डीजल के कारोबार में संलिप्त अंतरराज्यीय गिरोह। स्रोतःपुलिस
मेंहदावल। जीवन मंत्र में रास जीव का ईश्वर के साथ मिलन की कथा है। शनिवार को ये बातें नगर पंचायत के अछिया में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन चित्रकूट धाम से आए कथा वाचक श्रवण महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति के फल को ही रास कहा जाता है। कथा प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी भक्तों को खूब आनंदित किया। उन्होंने कहा जो भक्त ईश्वर प्रेम में आनंदित होते हैं और श्रीकृष्ण तथा रूक्मिणी के विवाह में शामिल होते हैं, उनकी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कहा कि जब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाता है। लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है। श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के विवाह के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान चंद्रशेखर पांडेय, रामउजागिर मिश्र, राम निहोरा पांडेय, रमेश सिंह, चंद्रप्रकाश पांडेय,डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय, डॉ. विश्वमूर्ति मणि त्रिपाठी, राघवेंद्र पांडेय, राम प्रकाश पांडेय, अनूप कुमार सिंह, विकास चंद्र त्रिपाठी, नितिन पांडेय, विनय सिंह, रविंद्र यादव, ज्वाला पाल, कौशलेंद्र राय आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति के फल को ही रास कहा जाता है। कथा प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी भक्तों को खूब आनंदित किया। उन्होंने कहा जो भक्त ईश्वर प्रेम में आनंदित होते हैं और श्रीकृष्ण तथा रूक्मिणी के विवाह में शामिल होते हैं, उनकी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कहा कि जब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाता है। लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है। श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के विवाह के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान चंद्रशेखर पांडेय, रामउजागिर मिश्र, राम निहोरा पांडेय, रमेश सिंह, चंद्रप्रकाश पांडेय,डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय, डॉ. विश्वमूर्ति मणि त्रिपाठी, राघवेंद्र पांडेय, राम प्रकाश पांडेय, अनूप कुमार सिंह, विकास चंद्र त्रिपाठी, नितिन पांडेय, विनय सिंह, रविंद्र यादव, ज्वाला पाल, कौशलेंद्र राय आदि मौजूद रहे।
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