{"_id":"63d55f24311d6c0c800bf611","slug":"stray-animals-made-it-difficult-to-walk-khalilabad-news-gkp465718270-2023-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: छुट्टा पशुओं ने राह चलना किया मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: छुट्टा पशुओं ने राह चलना किया मुश्किल
विज्ञापन
गोला बाजार में सड़क पर घूम रहे छुट्टा पशु।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छुट्टा पशुओं ने राह चलना किया मुश्किल
आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक पशु
फसल को पहुंचा रहे हैं नुकसान
संतकबीरनगर। छुट्टा पशुओं के आश्रय के लिए जिले में 72 पशु आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनकी क्षमता 2926 पशुओं के रखने की है। वर्तमान में यहां करीब 3200 पशु हैं। ऐसे में पशुओं को पकड़कर आश्रय केंद्र पहुंचाने की मुहिम ठप पड़ी है। इससे छुट्टा पशु फसल को नुकसान पहुंचा ही रहे हैं, साथ में लोगों का राह चलना मुश्किल कर दिया है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद छुट्टा पशुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्र में रखने के निर्देश दिए गए थे। पशु आश्रय केंद्र में रखे गए पशुओं के चारे सहित रखरखाव के निर्देश हैं। इसके तहत ब्लॉकों में 72 पशु आश्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं। 31 मार्च पर छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं, लेकिन समस्या यह है कि इन आश्रय केेंद्रों में पशुओं के रखने की जगह नहीं है।
मेंहदावल क्षेत्र में पिछले महीने 26 पशु पकड़े गए थे। इन्हें पशु आश्रय केंद्र बढ़या ठाठर में रखने के दौरान संचालकों ने पशुओं को लेने से मना कर दिया था। एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद पशुओं को रखा गया। ऐसी ही स्थिति पूरे जिले में है।
विज्ञापन
शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु मुसीबत बन गए हैं। स्थिति यह हो गई है कि ठंड के मौसम में किसानों को फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। शहरी क्षेत्र में छुट्टा पशु सड़क पर बैठ जा रहे हैं, जिन्हें हटाना मुश्किल हो रहा है। फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले भी छुट्टा पशुुुओं से परेशान हैं। किसान बाबूलाल, दशरथ यादव, दिनेश कुमार ने बताया कि छुट्टा पशु झुंड में खेतों में पहुंचकर फसल बर्बाद कर रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय यादव ने बताया कि पशु आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप जो छुट्टा पशु है, उन्हें संरक्षित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। जरूरत के मुताबिक पशु आश्रय केंद्रों की क्षमता में वृद्धि कराई जाएगी।
विज्ञापन
आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक पशु
फसल को पहुंचा रहे हैं नुकसान
संतकबीरनगर। छुट्टा पशुओं के आश्रय के लिए जिले में 72 पशु आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनकी क्षमता 2926 पशुओं के रखने की है। वर्तमान में यहां करीब 3200 पशु हैं। ऐसे में पशुओं को पकड़कर आश्रय केंद्र पहुंचाने की मुहिम ठप पड़ी है। इससे छुट्टा पशु फसल को नुकसान पहुंचा ही रहे हैं, साथ में लोगों का राह चलना मुश्किल कर दिया है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद छुट्टा पशुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्र में रखने के निर्देश दिए गए थे। पशु आश्रय केंद्र में रखे गए पशुओं के चारे सहित रखरखाव के निर्देश हैं। इसके तहत ब्लॉकों में 72 पशु आश्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं। 31 मार्च पर छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं, लेकिन समस्या यह है कि इन आश्रय केेंद्रों में पशुओं के रखने की जगह नहीं है।
विज्ञापन
मेंहदावल क्षेत्र में पिछले महीने 26 पशु पकड़े गए थे। इन्हें पशु आश्रय केंद्र बढ़या ठाठर में रखने के दौरान संचालकों ने पशुओं को लेने से मना कर दिया था। एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद पशुओं को रखा गया। ऐसी ही स्थिति पूरे जिले में है।
विज्ञापन
शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु मुसीबत बन गए हैं। स्थिति यह हो गई है कि ठंड के मौसम में किसानों को फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। शहरी क्षेत्र में छुट्टा पशु सड़क पर बैठ जा रहे हैं, जिन्हें हटाना मुश्किल हो रहा है। फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले भी छुट्टा पशुुुओं से परेशान हैं। किसान बाबूलाल, दशरथ यादव, दिनेश कुमार ने बताया कि छुट्टा पशु झुंड में खेतों में पहुंचकर फसल बर्बाद कर रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय यादव ने बताया कि पशु आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप जो छुट्टा पशु है, उन्हें संरक्षित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। जरूरत के मुताबिक पशु आश्रय केंद्रों की क्षमता में वृद्धि कराई जाएगी।