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Sant Kabir Nagar News: किसानों के लिए चुनौती बने छुट्टा पशु, नहीं हो रहा कोई समाधान
Mon, 16 Oct 2023 11:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 16 Oct 2023 11:21 AM IST
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धनघटा। क्षेत्र में छुट्टा पशु किसानों के लिए चुनौती बन गए हैं। छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में रखकर उनके खिलाने-पिलाने के नाम पर भले ही प्रत्येक माह भारी भरकम खर्च हो रहा हो, लेकिन सड़कों से लेकर गांव की गलियों तक विचरण कर रहे छुट्टा पशु सरकारी दावों और आंकड़ों को आईना दिखा रहे हैं। छुट्टा पशुओं के हमले से अब तक जहां दो किसानों की मौत हो चुकी है। वही चार लोग घायल हो चुके हैं।
विकास खंड हैंसर बाजार के कोचरी, रजनौली, कटया, मुंडेरा शुक्ल में बने गो आश्रय केंद्र में 375 छुट्टा पशुओं को संरक्षित करके चारा और पानी के नाम पर हजारों रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं। इसी तरह विकास खंड पौली के ग्राम पंचायत मझौरा, किशुनपुर, बगही, उदहा, बछईपुर, खर्चा, कोहलवा में गो आश्रय केंद्र संचालित है। इन गोआश्रय केंद्रों में 350 से अधिक छुट्टा पशुओं को रखकर खिलाने पिलाने की बात जिम्मेदार बता रहे हैं। विकास खंड हैंसर बाजार के कुरमौल, लहुरेगाव, भैंसाखूट में भी पशु आश्रय केंद्र का निर्माण तो किया गया है, लेकिन यहां पर अभी तक एक भी पशु संरक्षित नहीं किए गए हैं। जिम्मेदार क्षेत्र में एक भी छुट्टा पशु न होने की दावा करते हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है। किशन, राम रूप, राजाराम, राम जी, राधेश्याम, कोमल, देवनारायण, मधुसूदन आदि का कहना है कि गौ आश्रय केंद्र केवल दिखावा साबित हो रहे हैं। गो आश्रय केंद्रों में जो पशु रखे गए हैं वह देखभाल के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। छुट्टा पशुओं को पकड़ने वाला कोई नहीं है। किसान छुट्टा पशु को पकड़कर गोआश्रय केंद्र ले जाते हैं। गोआश्रय केंद्र में उन्हें रखने से इन्कार कर दिया जाता है। जिससे मजबूर किसान छुट्टा पशु को वही पर छोड़कर लौट जाते हैं। छुट्टा पशुओं से अब तक तो केवल फसल का ही नुकसान हो रहा था। लेकिन, अब छुट्टा पशु मानव के लिए खतरा बन बैठे हैं।
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छुव्टा पशु के हमले से इन लोगों की चली गई जान
- केस एक
क्षेत्र के चपरा पूर्वी गांव निवासी 55 वर्षीय किसान राजेंद्र 20 अगस्त की सुबह खेत देखने गए थे। खेत में छुट्टा पशु फसल चर रहा था। उसे भगाने के लिए वह करीब गए तो पशु उन पर हमला कर दिया। कुछ दूरी पर खेतों में काम कर रहे लोगों की नजर पड़ी तो दौड़ कर पहुंचे। छुट्टा पशु को मारपीट कर भगा तो दिया लेकिन राजेंद्र गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो गए थे। घायल अवस्था में उन्हें सीएचसी मलौली पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने देखने के बाद मृत घोषित कर दिया।
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केस दो
- चपरा पूर्वी गांव की 50 वर्षीय ज्ञानमती पत्नी इंद्रमन एक अक्तूबर को अपने खेत में काम कर रही थीं। खेत के दूसरे छोर पर छुट्टा पशु फसल को खाने लगा। ज्ञानमती की नजर पड़ी तो वह दौड़कर उसे हांकने के लिए गईं। छुट्टा पशु ने ज्ञानमती पर हमला कर दिया। उन्हें तब तक मारता रहा जब तक वह अचेत नहीं हो गईं। गांव के लोग दौड़े तो छुट्टा पशु भागा। ज्ञानमती को सीएचसी मलौली ले जाया गया। जहां देखने के बाद डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था।
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ये लोग हो चुके हैं घायल
रामपुर गांव निवासी रामलाल, गायघाट गांव के रहने वाले शिव शंकर, दौलतपुर निवासी सुमित्रा और मंझरिया गांव की रहने वाली सुभावती छुट्टा पशुओं के हमले में घायल होकर बिस्तर पर पड़े हैं। इन सबके बावजूद, छुट्टा पशुओं को पकड़ने के प्रति पंचायत और विकास विभाग गंभीर नहीं है।
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किसानों की फसल बचाने के लिए छुट्टा पशुओं को गो आश्रय केंद्रों में पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम प्रधान को दी गई है। अधिकतर छुट्टा पशु गो आश्रय केंद्रों में रखे भी गए हैं। अगर कहीं पर छुट्टा पशु घूम रहे हैं तो उन्हें पकड़वा कर गो आश्रय केंद्र में पहुंचाने के लिए अभियान चलेगा। -गजानन पाल, एडीओ पंचायत हैंसर बाजार
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विकास खंड हैंसर बाजार के कोचरी, रजनौली, कटया, मुंडेरा शुक्ल में बने गो आश्रय केंद्र में 375 छुट्टा पशुओं को संरक्षित करके चारा और पानी के नाम पर हजारों रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं। इसी तरह विकास खंड पौली के ग्राम पंचायत मझौरा, किशुनपुर, बगही, उदहा, बछईपुर, खर्चा, कोहलवा में गो आश्रय केंद्र संचालित है। इन गोआश्रय केंद्रों में 350 से अधिक छुट्टा पशुओं को रखकर खिलाने पिलाने की बात जिम्मेदार बता रहे हैं। विकास खंड हैंसर बाजार के कुरमौल, लहुरेगाव, भैंसाखूट में भी पशु आश्रय केंद्र का निर्माण तो किया गया है, लेकिन यहां पर अभी तक एक भी पशु संरक्षित नहीं किए गए हैं। जिम्मेदार क्षेत्र में एक भी छुट्टा पशु न होने की दावा करते हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है। किशन, राम रूप, राजाराम, राम जी, राधेश्याम, कोमल, देवनारायण, मधुसूदन आदि का कहना है कि गौ आश्रय केंद्र केवल दिखावा साबित हो रहे हैं। गो आश्रय केंद्रों में जो पशु रखे गए हैं वह देखभाल के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। छुट्टा पशुओं को पकड़ने वाला कोई नहीं है। किसान छुट्टा पशु को पकड़कर गोआश्रय केंद्र ले जाते हैं। गोआश्रय केंद्र में उन्हें रखने से इन्कार कर दिया जाता है। जिससे मजबूर किसान छुट्टा पशु को वही पर छोड़कर लौट जाते हैं। छुट्टा पशुओं से अब तक तो केवल फसल का ही नुकसान हो रहा था। लेकिन, अब छुट्टा पशु मानव के लिए खतरा बन बैठे हैं।
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छुव्टा पशु के हमले से इन लोगों की चली गई जान
- केस एक
क्षेत्र के चपरा पूर्वी गांव निवासी 55 वर्षीय किसान राजेंद्र 20 अगस्त की सुबह खेत देखने गए थे। खेत में छुट्टा पशु फसल चर रहा था। उसे भगाने के लिए वह करीब गए तो पशु उन पर हमला कर दिया। कुछ दूरी पर खेतों में काम कर रहे लोगों की नजर पड़ी तो दौड़ कर पहुंचे। छुट्टा पशु को मारपीट कर भगा तो दिया लेकिन राजेंद्र गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो गए थे। घायल अवस्था में उन्हें सीएचसी मलौली पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने देखने के बाद मृत घोषित कर दिया।
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केस दो
- चपरा पूर्वी गांव की 50 वर्षीय ज्ञानमती पत्नी इंद्रमन एक अक्तूबर को अपने खेत में काम कर रही थीं। खेत के दूसरे छोर पर छुट्टा पशु फसल को खाने लगा। ज्ञानमती की नजर पड़ी तो वह दौड़कर उसे हांकने के लिए गईं। छुट्टा पशु ने ज्ञानमती पर हमला कर दिया। उन्हें तब तक मारता रहा जब तक वह अचेत नहीं हो गईं। गांव के लोग दौड़े तो छुट्टा पशु भागा। ज्ञानमती को सीएचसी मलौली ले जाया गया। जहां देखने के बाद डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था।
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ये लोग हो चुके हैं घायल
रामपुर गांव निवासी रामलाल, गायघाट गांव के रहने वाले शिव शंकर, दौलतपुर निवासी सुमित्रा और मंझरिया गांव की रहने वाली सुभावती छुट्टा पशुओं के हमले में घायल होकर बिस्तर पर पड़े हैं। इन सबके बावजूद, छुट्टा पशुओं को पकड़ने के प्रति पंचायत और विकास विभाग गंभीर नहीं है।
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किसानों की फसल बचाने के लिए छुट्टा पशुओं को गो आश्रय केंद्रों में पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम प्रधान को दी गई है। अधिकतर छुट्टा पशु गो आश्रय केंद्रों में रखे भी गए हैं। अगर कहीं पर छुट्टा पशु घूम रहे हैं तो उन्हें पकड़वा कर गो आश्रय केंद्र में पहुंचाने के लिए अभियान चलेगा। -गजानन पाल, एडीओ पंचायत हैंसर बाजार