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पर्यावरण को सुरक्षित करने के साथ घरों को रोशन करेंगे समूहों के उत्पाद
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डीएम को सम्मानित करती स्वंय सहायता समूह की महिला।
- फोटो : KHALILABAD
पर्यावरण को सुरक्षित करने के साथ घरों को रोशन करेंगे समूहों के उत्पाद
14 समूहों ने तैयार किया मोमबत्ती तो पांच समूहों ने बनाए गोबर के दीये
अफसरों-कर्मचारियों ने खरीदे उत्पाद और बिक्री में ग्राम पंचायतों की ली गई मदद
गोबर के व्यावसायिक उपयोग के लिए 63 जगह बनाई जाएगी वर्मी कंपोस्ट खाद
संतकबीरनगर। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ ही घरों को रोशन करने के लिए समूहों से जुड़ीं महिलाओं के जरिए गोबर के दीये तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही समूह की महिलाओं ने मोमबत्ती भी तैयार किया है। समूहों के उत्पादों की बिक्री हो, इसके लिए प्रशासन ने ब्लॉकों पर प्रदर्शनी लगवाई। इसके साथ अफसरों, कर्मचारियां ने खुद खरीदारी की और ग्राम उत्पादों की बिक्री में ग्राम पंचायतों की भी मदद ली।
मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उसी कड़ी में समूह की महिलाओं को प्रेरित करके गोबर के दीये बनवाए गए हैं। इसके अलावा मोमबत्ती भी तैयार कराई गई है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव बताते हैं कि 14 स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं करीब 150 महिलाओं ने मिलकर प्रति समूह 200-200 पैकेट मोमबत्ती बनाया है। इसी तरह पांच समूह की महिलाओं ने करीब 8000 गोबर के दीये बनाए हैं। इनके जरिए तैयार उत्पाद की खरीदारी अफसर और कर्मचारी तो कर ही रहे हैं, साथ में खलीलाबाद, नाथनगर और हैंसर बाजार ब्लॉक में प्रदर्शनी लगवाई गई है। जहां लोग पहुंच कर खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों की मदद से उत्पादों की बिक्री कराई जा रही है। गोबर से तैयार दीये अंत में खुद जल जाते हैं। इससे बाद में खाद बनाई जा सकती है। गोबर के दीये से पर्यावरण को भी कोई खतरा नहीं है। साथ में इसकी फिर उपयोगिता बनी रहेगी। गोशालाओं में तैयार गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सके, इसके लिए जिले में 63 जगह वर्मी कंपोस्ट बनाए जाने की तैयारी चल रही है। इससे गोबर से खाद बनाई जाएगी और फिर उसे बेचकर गोशाला के लोग अपनी आय बढ़ाएंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि सिर्फ पांच-छह दिन के प्रयास में पांच समूहों के जरिए गोबर के दीए बनाए गए। अगले वर्ष दीपावली पर इसके दायरे को बढ़ाया जाएगा। गोबर के दीये पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से काफी फायदेमंद हैं। गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सके, इसके लिए गांव-गांव प्रचार-प्रसार भी कराया जाएगा।
कोट
पर्यावरण को सुरक्षित रखने के दिशा में सभी को पहल करनी चाहिए। उसी कड़ी में प्रशासन की ओर से पांच समूहों के जरिए गोबर से जहां दीये तैयार कराए गए, वहीं, 14 समूहों ने मोमबत्ती बनाया। समूहों के उत्पाद को बाजार मुहैया हो, इस दिशा में भी ब्लॉकों में प्रदर्शनी लगवाने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों ने रुचि लेकर खरीदारी की। गोशालाओं के गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सके और आय बढ़े, इस दिशा में पहल होगी।
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-दिव्या मित्तल, डीएम
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14 समूहों ने तैयार किया मोमबत्ती तो पांच समूहों ने बनाए गोबर के दीये
अफसरों-कर्मचारियों ने खरीदे उत्पाद और बिक्री में ग्राम पंचायतों की ली गई मदद
गोबर के व्यावसायिक उपयोग के लिए 63 जगह बनाई जाएगी वर्मी कंपोस्ट खाद
संतकबीरनगर। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ ही घरों को रोशन करने के लिए समूहों से जुड़ीं महिलाओं के जरिए गोबर के दीये तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही समूह की महिलाओं ने मोमबत्ती भी तैयार किया है। समूहों के उत्पादों की बिक्री हो, इसके लिए प्रशासन ने ब्लॉकों पर प्रदर्शनी लगवाई। इसके साथ अफसरों, कर्मचारियां ने खुद खरीदारी की और ग्राम उत्पादों की बिक्री में ग्राम पंचायतों की भी मदद ली।
मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उसी कड़ी में समूह की महिलाओं को प्रेरित करके गोबर के दीये बनवाए गए हैं। इसके अलावा मोमबत्ती भी तैयार कराई गई है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव बताते हैं कि 14 स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं करीब 150 महिलाओं ने मिलकर प्रति समूह 200-200 पैकेट मोमबत्ती बनाया है। इसी तरह पांच समूह की महिलाओं ने करीब 8000 गोबर के दीये बनाए हैं। इनके जरिए तैयार उत्पाद की खरीदारी अफसर और कर्मचारी तो कर ही रहे हैं, साथ में खलीलाबाद, नाथनगर और हैंसर बाजार ब्लॉक में प्रदर्शनी लगवाई गई है। जहां लोग पहुंच कर खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों की मदद से उत्पादों की बिक्री कराई जा रही है। गोबर से तैयार दीये अंत में खुद जल जाते हैं। इससे बाद में खाद बनाई जा सकती है। गोबर के दीये से पर्यावरण को भी कोई खतरा नहीं है। साथ में इसकी फिर उपयोगिता बनी रहेगी। गोशालाओं में तैयार गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सके, इसके लिए जिले में 63 जगह वर्मी कंपोस्ट बनाए जाने की तैयारी चल रही है। इससे गोबर से खाद बनाई जाएगी और फिर उसे बेचकर गोशाला के लोग अपनी आय बढ़ाएंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि सिर्फ पांच-छह दिन के प्रयास में पांच समूहों के जरिए गोबर के दीए बनाए गए। अगले वर्ष दीपावली पर इसके दायरे को बढ़ाया जाएगा। गोबर के दीये पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से काफी फायदेमंद हैं। गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सके, इसके लिए गांव-गांव प्रचार-प्रसार भी कराया जाएगा।
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कोट
पर्यावरण को सुरक्षित रखने के दिशा में सभी को पहल करनी चाहिए। उसी कड़ी में प्रशासन की ओर से पांच समूहों के जरिए गोबर से जहां दीये तैयार कराए गए, वहीं, 14 समूहों ने मोमबत्ती बनाया। समूहों के उत्पाद को बाजार मुहैया हो, इस दिशा में भी ब्लॉकों में प्रदर्शनी लगवाने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों ने रुचि लेकर खरीदारी की। गोशालाओं के गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सके और आय बढ़े, इस दिशा में पहल होगी।
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-दिव्या मित्तल, डीएम