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एसडीएम ने की कार्रवाई
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पौली ब्लॉक के शिवा पार में अवैध रूप से संचालित आरा मशीन को सील करते एसडीएम ।
- फोटो : KHALILABAD
फोटो है
एसडीएम ने अवैध आरा मशीन को सील कराया
- पौली ब्लॉक के शिवापार में बिना अनुमति के हो रहा था संचालन
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। पौली ब्लॉक के शिवापार गांव में बगैर कागजात के चलाई जा रही आरा मशीन को एसडीएम ने बुधवार को सील कर दिया। यह मशीन 23 वर्षों से बिना अनुमति के ही संचालित हो रही थी। इस कार्रवाई से अन्य अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया।
एसडीएम धनघटा प्रमोद कुमार ने बताया कि शिवापार में संचालित आरा मशीन के बारे में कुछ शिकायतें मिली थीं। बुधवार को इसकी जांच करने पहुंचे तो वहां बड़ी मात्रा में लकड़ी पाई गई और मशीन भी लकड़ी चिराई कर रही थी। आरा मशीन संचालक से जब संचालन की अनुमति से संबंधित कागजात की मांग की गई तो वह कोई भी कागजात नहीं दे सके। छानबीन में यह भी तथ्य सामने आया कि बगैर लाइसेंस के ही यह मशीन वर्ष 1996 से संचालित हो रही है। आश्चर्यजनक यह है कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए करीब पांच वर्ष तक सभी आरा मशीनों को बंद करा दिया गया था। इसके लिए आरा मशीन संचालकों ने लंबी कानूनी लड़ाई थी जिसके बाद आरा मशीन मालिकों को सशर्त मशीन चलाने की अनुमति मिली। उस दौरान खूब छापा मारा गया इसके बावजूद बिना अनुमति के यह मशीन पिछले 23 वर्षों से संचालित हो रही थी। एसडीएम ने बताया कि खुद आरा मशीन संचालक ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि बिना अनुमति के मशीन का संचालन होता रहा है। एसडीएम ने आरा मशीन को सील करके अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी है। एसडीएम की इस कार्रवाई से लकड़ी के अवैध कारोबारियों समेत अन्य व्यापारियों में भी खलबली मच गई है। उल्लेखनीय है कि एसडीएम ने पिछले महीने कई राइस मिल मालिकों पर भी इसी तरह छापा मारा जाएगा।
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एसडीएम ने अवैध आरा मशीन को सील कराया
- पौली ब्लॉक के शिवापार में बिना अनुमति के हो रहा था संचालन
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। पौली ब्लॉक के शिवापार गांव में बगैर कागजात के चलाई जा रही आरा मशीन को एसडीएम ने बुधवार को सील कर दिया। यह मशीन 23 वर्षों से बिना अनुमति के ही संचालित हो रही थी। इस कार्रवाई से अन्य अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया।
एसडीएम धनघटा प्रमोद कुमार ने बताया कि शिवापार में संचालित आरा मशीन के बारे में कुछ शिकायतें मिली थीं। बुधवार को इसकी जांच करने पहुंचे तो वहां बड़ी मात्रा में लकड़ी पाई गई और मशीन भी लकड़ी चिराई कर रही थी। आरा मशीन संचालक से जब संचालन की अनुमति से संबंधित कागजात की मांग की गई तो वह कोई भी कागजात नहीं दे सके। छानबीन में यह भी तथ्य सामने आया कि बगैर लाइसेंस के ही यह मशीन वर्ष 1996 से संचालित हो रही है। आश्चर्यजनक यह है कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए करीब पांच वर्ष तक सभी आरा मशीनों को बंद करा दिया गया था। इसके लिए आरा मशीन संचालकों ने लंबी कानूनी लड़ाई थी जिसके बाद आरा मशीन मालिकों को सशर्त मशीन चलाने की अनुमति मिली। उस दौरान खूब छापा मारा गया इसके बावजूद बिना अनुमति के यह मशीन पिछले 23 वर्षों से संचालित हो रही थी। एसडीएम ने बताया कि खुद आरा मशीन संचालक ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि बिना अनुमति के मशीन का संचालन होता रहा है। एसडीएम ने आरा मशीन को सील करके अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी है। एसडीएम की इस कार्रवाई से लकड़ी के अवैध कारोबारियों समेत अन्य व्यापारियों में भी खलबली मच गई है। उल्लेखनीय है कि एसडीएम ने पिछले महीने कई राइस मिल मालिकों पर भी इसी तरह छापा मारा जाएगा।
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