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Sant Kabir Nagar News: सरयू का जलस्तर घटा , कटे रास्तों पर नाव का सहारा

Mon, 24 Aug 2026 11:26 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 11:26 PM IST
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Saryu water level recedes; boats used to navigate washed-out roads.
गुनवतियां गांव में नाव से जाते ग्रामीण। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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धनघटा/ मेंहदावल। जिले में सरयू का जलस्तर लगातार घट रहा है। सोमवार को सुबह से शाम तक सात सेंटीमीटर की गिरावट अयोध्या में दर्ज की गई। तीन दिन से लगातार नदी के पानी में हो रही गिरावट से दियारा वासियों को थोड़ी राहत मिल रही है। जिनके दरवाजे पर पानी था उनका दरवाजा अब खाली हो गया है लेकिन कटे रास्तों पर अभी भी लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। मेंहदावल में राप्ती का जलस्तर तीन सेमी बढ़ा है।
धनघटा में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर नीचे रह गया था, जिससे नदी के समीपवर्ती गांव बाढ़ के चपेट में आ गए थे। चकदहा, सुअरहा, सियर कला, दौलतपुर, खालेपुरवा, पटौआ, आगापुर गुलरिहा, भौवापार, धमचिया, गुनवतिया, कटहा खैरगाड, सियाराम अधीन सिंह समेत तो 19 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। लोगों के दरवाजे पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने के कारण घर से निकलना मुश्किल हो गया था।
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जरूरी काम निपटाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा था। अभी भी बाढ़ के पानी से लोगों का दरवाजा भले खाली हो गया है लेकिन दुश्वारियां बरकरार हैं। गांव के संपर्क मार्ग कट जाने के कारण लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। चकदहा, भौवापार, गुनवतिया, सियर कला, सियाराम, कटहा खैरगाड में अभी भी रास्तों पर नाव चलाई जा रही है।
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शेष गांव की नाव को तहसील प्रशासन ने हटा लिया है। ग्रामीण चंद्रभान, लालचंद, राम मोहन, संत प्रसाद, कृष्ण माधव, दयाराम आदि का कहना है कि बाढ़ के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे पशुओं को खिलाने के लिए चारा का संकट खड़ा हो गया है। नदी का पानी भले ही काम हो गया है लेकिन परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि एमबीडी बांध पर तिघरा गांव के पास सामुदायिक शौचालय बनवाए जाने की मांग काफी दिनों से की जा रही है लेकिन प्रशासन के लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं।

प्रशासन की तरफ से अभी तक राहत सामग्री का वितरण भी नहीं किया गया। बाढ़ के कारण छप्पर के मकान धराशायी हो गए हैं। अब उन्हें दोबारा बनाना चुनौती है। नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा ने बताया कि अभी भी नौ नाव विभिन्न गांवों में संचालित की जा रही हैं। कुल 22 नाव लगाई गई थीं। शेष नाव हटा दी गई हैं, क्योंकि पानी कम होने की वजह से वह चल नहीं पा रही थीं। अभी भी सात विद्यालय बाढ़ के कारण बंद चल रहे हैं।
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