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बच्चों की जान पर मंडरा रहा खतरा
संतकबीरनगर
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:48 PM IST
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बच्चों की जान पर मंडरा रहा खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। परिषदीय विद्यालयों के कई भवन जर्जर हो चुके हैं। ये भवन अब गिरने भी लगे हैं। कई जगह तो खाली पड़े इन भवनों में बच्चे भी खेलते रहते हैं। इन भवनों को गिराने की नीलामी की लंबी प्रक्रिया की वजह से जिम्मेदार अधिकारी चुप बैठे हैं। यदि कहीं किसी स्कूल का जर्जर भवन ढह गया तो बड़ा हादसा भी हो सकता है।
जिले में 1518 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 1075 प्राथमिक और 443 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। जूनियर हाईस्कूल मैलानी, प्राथमिक विद्यालय पटखौली, उच्च प्राथमिक विद्यालय गौसपुर समेत 70 से अधिक विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। कुछ भवनों में पढ़ाई नहीं होती है। यदि भवन का कुछ हिस्सा गिरता है तो हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है। सीडीओ हाकिम सिंह ने पिछले माह उच्च प्राथमिक विद्यालय गौसपुर का निरीक्षण किया, जो जर्जर हालत में मिला था। इस पर सीडीओ ने काफी नाराजगी जताई थी और बेसिक शिक्षा विभाग से जर्जर भवनों की सूूची तलब की थी। जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया लंबी है। पहले विद्यालय प्रबंध समिति के प्रस्ताव पर ग्राम समिति अनुमति देती है। इसके बाद आरइएस विभाग से जर्जर भवन की नीलामी का आकलन कराया जाता है। फिर टेंडर निकाला जाता है, तब जाकर भवन की नीलामी होती है। प्रक्रिया लंबी होने की वजह से जर्जर भवनों की नीलामी नहीं हो पा रही है। सीडीओ हाकिम सिंह ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों के कई भवन जर्जर हैं। पिछले माह जूनियर हाईस्कूल गौसपुर का निरीक्षण किया तो वह भी जर्जर हालत में मिला था। उसकी छत कभी भी गिर सकती है। जर्जर भवनों को गिराए जाने के निर्देश बीएसए को दिए गए हैं। नए भवन के निर्माण में जर्जर भवनों के नीलामी से मिले रकम को लगाकर और बेहतर भवन बनाया जाएगा।
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जिले में 1518 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 1075 प्राथमिक और 443 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। जूनियर हाईस्कूल मैलानी, प्राथमिक विद्यालय पटखौली, उच्च प्राथमिक विद्यालय गौसपुर समेत 70 से अधिक विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। कुछ भवनों में पढ़ाई नहीं होती है। यदि भवन का कुछ हिस्सा गिरता है तो हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है। सीडीओ हाकिम सिंह ने पिछले माह उच्च प्राथमिक विद्यालय गौसपुर का निरीक्षण किया, जो जर्जर हालत में मिला था। इस पर सीडीओ ने काफी नाराजगी जताई थी और बेसिक शिक्षा विभाग से जर्जर भवनों की सूूची तलब की थी। जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया लंबी है। पहले विद्यालय प्रबंध समिति के प्रस्ताव पर ग्राम समिति अनुमति देती है। इसके बाद आरइएस विभाग से जर्जर भवन की नीलामी का आकलन कराया जाता है। फिर टेंडर निकाला जाता है, तब जाकर भवन की नीलामी होती है। प्रक्रिया लंबी होने की वजह से जर्जर भवनों की नीलामी नहीं हो पा रही है। सीडीओ हाकिम सिंह ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों के कई भवन जर्जर हैं। पिछले माह जूनियर हाईस्कूल गौसपुर का निरीक्षण किया तो वह भी जर्जर हालत में मिला था। उसकी छत कभी भी गिर सकती है। जर्जर भवनों को गिराए जाने के निर्देश बीएसए को दिए गए हैं। नए भवन के निर्माण में जर्जर भवनों के नीलामी से मिले रकम को लगाकर और बेहतर भवन बनाया जाएगा।
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