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जिला अस्पताल में छह महीने पहले खुला था मन कक्ष

Thu, 29 Aug 2019 10:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Aug 2019 10:18 PM IST
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problem in man kaksh
जिला अस्पताल में बना मन कक्ष - फोटो : KHALILABAD
छह महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका मन कक्ष
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जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों के इलाज के लिए खुला था कक्ष
मनोरोग चिकित्सक समेत आठ पदों पर होनी थी नियुक्ति
केवल तीन पदों पर हुई है नियुक्ति, डॉक्टर की तैनाती अब तक नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। मानसिक रोगियों की जांच व इलाज के लिए करीब छह महीने पहले जिला अस्पताल में मन कक्ष का निर्माण कराया गया था। व्यवस्था थी कि अवसाद ग्रसित लोग यहां आकर अपनी समस्या कह सकेंगे। मनोचिकित्सक उनकी जांच व इलाज करेंगे। जिला अस्पताल में इसके लिए कमरा तो बन गया लेकिन डॉक्टर व अन्य स्टाफ की कमी के चलते यह व्यवस्था शुरू ही नहीं हो पाई।
अवसाद ग्रसित लोग अक्सर खुद के साथ-साथ परिवार व अन्य लोगों की जान के दुश्मन बन जाते हैं। आएदिन इस तरह की हो रहीं घटनाओं को देखते हुए पिछले वर्ष शासन के निर्देश पर प्रत्येक जिले में इस तरह के रोगियों की प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल में व्यवस्था के निर्देश दिए गए। इसके बाद संतकबीरनगर के जिला अस्पताल में भी यह व्यवस्था शुरू करने के लिए प्रयास किया गया। जिला अस्पताल के दूसरी मंजिल पर इसके लिए मन कक्ष नाम से अलग कमरा बनाया गया। फर्नीचर व अन्य जरूरी सामानों का इंतजाम भी हो गया। परंतु इस कक्ष में अब तक मानसिक रोगियों का इलाज शुरू नहीं हो पाया।
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चिकित्सक समेत आठ पद सृजित हैं
मन कक्ष के लिए एक मनोरोग चिकित्सक के अलावा एक क्लीनिकल साइकॉलाजिस्ट, एक सोशल वर्कर, एक नर्स, एक कम्युनिटी नर्स, एक सहायक, एक मॉनीटरिंग अफसर व एक वार्ड ब्वॉय का पद सृजित है। परंतु अब तक केवल तीन पदों पर ही नियुक्ति हो पाई है। इनमें एक क्लीनिकल साइकॉलोजिस्ट, एक सोशल वर्क व एक नर्स की ही तैनाती हो पाई है।
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हर महीने आ रहे हैं आठ से दस मरीज
जिला अस्पताल कर्मियों के अनुसार जब से मन कक्ष का बोर्ड लगा है तब से अक्सर ही लोग इसके विषय में जानकारी लेने आते हैं। मन कक्ष में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार हर महीने औसतन आठ से 10 मरीज आते हैं, परंतु इलाज की व्यवस्था नहीं होने के चलते वापस करना पड़ता है।

नियुक्ति के लिए चल रही है प्रक्रिया: सीएमएस
सीएमएस डॉक्टर पंकज टंडन ने बताया कि मनोरोग चिकित्सक के पद पर तैनाती के लिए कई बार प्रयास किया गया लेकिन उपयुक्त आवेदक नहीं मिलने के चलते नियुक्ति नहीं हो पा रही है। अन्य पदों पर चयन के लिए भी प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि महीने भर में सभी पदों पर नियुक्ति हो जाएगी। इसके बाद जिला अस्पताल में भी मानसिक रोगियों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
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