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Sant Kabir Nagar News: तैयारी पूरी.. दो शुभ मुहूर्तों में होगी कलश स्थापना

Thu, 03 Oct 2024 03:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Thu, 03 Oct 2024 03:15 AM IST
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Preparations complete... Kalash will be installed in two auspicious times.
- प्रमुख देवी मंदिरों के साथ पंडालों में हुई साफ-सफाई
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संवाद न्यूज एजेंसी

संतकबीरनगर। नवरात्र पर्व आज से शुरू हो रहा है। शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना के साथ देवी आराधना शुरू हो जाएगी। मदिरों और पंडालों में शनिवार की देर शाम तक तैयारी चलती रही। प्रमुख देवी मंदिरों के साथ पंडालों में साफ-सफाई का कार्य हुआ। जिले में कुल 630 प्रतिमाएं स्थापित होंगी।
खलीलाबाद शहर स्थित समय माता मंदिर, पाटेश्वरी देवी मंदिर, बरदहिया स्थित दुर्गा मंदिर, जंगल बेलहर में स्थापित दुर्गा मंदिर में बुधवार की शाम साफ-सफाई का कार्य होता रहा है। साथ ही साज सज्जा का कार्य हुआ। महुली और धनघटा क्षेत्र में देवी मंदिरों में स्थापित दुर्गा मंदिर में साफ-सफाई आदि के कार्य हुए।
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सुबह 06 बजकर 09 मिनट से कर सकते हैं कलश की स्थापना

ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त बृहस्पतिवार को सुबह 06 बजकर 09 मिनट से 09 बजकर 28 मिनट तक हैं। साथ ही अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना का बहुत महत्व होता है। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक है।
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बाजारो में बढ़ी रौनक
नवरात्र को लेकर बाजार में रौनक बढ़ गई है। लोग फलाहार के साथ मां के सजावट के लिए चुनरी आदि की खरीदारी करने में लगे रहे। समय माता मंदिर पर नारियल, चुनरी, प्रसाद, रोली, चंदन समेत अन्य सामान की खरीदारी में लोग जुटे रहे। साथ ही कलश स्थापना के लिए मिट्टी के बर्तन आदि की खरीदारी किए। वहीं फलों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रही है।

दूध की धार खत्म हुई तो स्थापित हो गया समय माता मंदिर
संतकबीरनगर। खलीलाबाद स्थित समय माता मंदिर जिले के लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि समय देवी की आराधना से श्रद्धालुओं की सभी मुरादें पूरी होती हैं।

मंदिर की प्राचीनता को लेकर अनेक मत है। मान्यता के अनुसार, देवी की प्रतिमा दूध की धार के साथ सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी क्षेत्र से लाई जा रही थी, जिसे कहीं स्थापित किया जाना था, लेकिन दूध की धार यहां तक आते-आते समाप्त हो गई तो इसे अन्य स्थान पर ले जाना संभव नहीं हाे सका। देवी मां की प्रतिमा को खलीलाबाद में मौजूदा स्थान पर स्थापित कर दिया गया। मंदिर के पुजारी बृजेश मिश्र ने बताया कि मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां पर जो मन्नतें मांगी जाती है वह पूरी होती हैं।
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