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सूख गए मनरेगा से खोदे गए तालाब, पानी के लिए पशु-पक्षी बेहाल

Wed, 16 Mar 2022 10:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 10:39 PM IST
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Ponds dug from MNREGA dried up, animals and birds are desperate for water
सूख गए मनरेगा से खोदे गए तालाब, पानी के लिए पशु-पक्षी बेहाल
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धनघटा (संतकबीरनगर)। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी का संकट गहराने लगा है। इस बार पर पशु पक्षियों को भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकना पड़ सकता है। दरअसल, लाखों रुपये खर्च कर मनरेगा योजना से खोदे गए तालाबों में मार्च में पानी सूख गया है। अब वहां झाड़ियां नजर आ रही हैं।

विकासखंड हैंसर बाजार और पौली की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत मजदूरों को रोजगार देने और तालाबों में जल संरक्षण के लिए इसी वित्तीय में पोखरों की खुदाई कराई गई थी। इस योजना के तहत वास्तविक मजदूर कितना लाभान्वित हुए यह तो जांच के बाद मजदूर ही बता पाएंगे। इन तालाबाें मेें पानी नहीं है। विकासखंड हैसर बाजार के बरपरवा, कोचरी, ठकुराडांडी, खाजों, तामा, बंसवारी गांव, गायघाट, मुंडेरा शुक्ला, पारा हरगोविंद, छितौनी, खेवसिया, रीठा, किशनपुर, नारायनपुर, गौरापार, शनिचरा बाजार आदि गांवाें में मनरेगा से तालाब की खोदाई कराई गई। खोदाई का उद्देश्य मनरेगा मजदूरों को रोजगार और तालाबों में जल संरक्षण करना था, लेकिन मानक को दरकिनार कर खोदे गए तालाब मार्च महीना आधा बीतते ही सूख गए। पानी न रहने के कारण तालाबों में झाड़ झंखाड उग आए हैं। ग्रामीण सुभाष, रामजीत, राजेश्वर, बैजनाथ, शिवप्रसाद, रामकवल, बुझावन आदि का कहना है कि गर्मी का महीना शुरू हो गया है और गांव के सभी तालाब सूखे पड़े हैं। गर्मी के मौसम में अक्सर आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं। आग को बुझाने के लिए दमकल कर्मी आसानी के साथ तालाबों से पानी भर लिया करते थे। पशु पक्षी भी तालाबों के पानी से प्यास बुझाते थे, लेकिन तालाब की खुदाई करने के बाद तालाब उबड़-खाबड़ हो गए है अथवा पानी सूख गया। इस संबंध में पूछे जाने पर खंड विकास अधिकारी अमरेश सिंह चौहान ने बताया कि सूखे हुए तालाबों में पानी भरने का काम मई और जून के महीने में किया जाता है। तालाबों की खुदाई जल संरक्षण के उद्देश्य के लिए किया गया है। सूखे हुए तालाबों में समय से पानी भरवा दिया जाएगा।
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