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एसई समेत आठ पर केस दर्ज

Wed, 21 Oct 2020 10:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 10:45 PM IST
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एसई समेत आठ पर केस दर्ज
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चार साल तक संविदाकर्मियों का ईपीएफ, ईएसआई कटा, जमा नहीं हुआ
मुकदमा दर्ज होने के बाद सकते में हैं विद्युत निगम के अधिकारी
पुलिस ने शुरू की जांच, एक्सईएन बोले पुराना मामला
वीरेंद्र यादव
संतकबीरनगर। विद्युत निगम के संविदाकर्मियों के ईपीएफ व ईएसआई काटने के बाद भी कर्मियों के खाते में न भेजने का क्रम चार साल तक चलता रहा। इसको लेकर संविदाकर्मी लगातार जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। अब जबकि इस मामले में महुली पुलिस ने तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता सहित आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है तो विद्युत निगम के अधिकारी सकते में आ गए हैं।

महुली थानाक्षेत्र के अम्मादेई निवासी एवं मुखलिसपुर उपकेंद्र पर तैनात संविदाकर्मी आशुतोष सिंह पुत्र अनिरुद्ध सिंह द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे पर गौर करें तो 2014 से लेकर 2018 तक करीब दो सौ संविदाकर्मियों का ईपीएफ व ईएसआई काटा गया, लेकिन किसी भी संविदाकर्मी के खाते में धन नहीं भेजा गया। ठेकेदारों व निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से यह क्रम चलता रहा और संविदाकर्मियों को बार-बार आश्वासन दिया जाता रहा कि ईपीएफ व ईएसआई की काटी गई धनराशि खाते में चली जाएगी। इस मामले में कोर्ट में करीब 40 संविदाकर्मियों ने शपथ पत्र भी सौंपा था। इस मामले में संविदाकर्मियों ने कई बार निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से फरियाद की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। संविदाकर्मी एवं विद्युत मजदूर पंचायत के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, रामवृक्ष, सूर्यकांत, वीरेंद्र यादव, सुबाष, राम प्रकाश पांडेय, वीरेंद्र पांडेय आदि का कहना है कि मानदेय भी बीच-बीच में नहीं दिया जा रहा था। कभी भी पूरे साल का मानदेय नहीं मिला। इन लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। हालांकि, 2019 के बाद संविदाकर्मियों के ईपीएफ व ईएसआई की काटी जा रही धनराशि खाते में जा रही है। दूसरी तरफ महुली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने कहा कि मामला पुराना है। इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मीडिया के माध्यम से मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिली है। आगे जो तथ्य आएगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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