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धनघटा क्षेत्र के लोग पलायन को मजबूर
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धनघटा में एमबीडी बांध पर शरण लेने पहुंचे सियर कला के बाढ़ पीड़ित।
- फोटो : KHALILABAD
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धनघटा क्षेत्र के लोग पलायन को मजबूर
संतकबीरनगर। घाघरा और राप्ती नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। घाघरा नदी 35 और राप्ती नदी खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। फिलहाल बांध को कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके किनारे बसे गांव के लोगों की नींद उड़ गई है। धनघटा क्षेत्र में लोग घरों से पलायन करने लगे हैं।
मेंहदावल क्षेत्र में स्थित राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। 80 सेंटीमीटर के पार नदी का जलस्तर तीन दिन पूर्व ही पहुंच गया। इस समय खतरे के निशान 79.50 मीटर से नदी 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। पूर्व विधायक अब्दुल कलाम ने मंगलवार को तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने बेलौली व विशुनपुर में तटबंध के कटान को लेकर विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती के जलस्तर का दबाव तेजी से पड़ रहा है। नदी लगातार उफान पर आ रही हैं। ड्रेनेज खंड सहायक अभियंता रामउजागीर लाल ने बताया कि मंगलवार की शाम चार बजे नदी का जलस्तर 80.35 मीटर पर पहुंच गया है। बेलौली व विशुनपुर में तटबंध को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्य कराए जा रहे हैं। तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित हैं, लेकिन जलस्तर का दबाव तटबंध पर बना हुआ हैं।
घाघरा नदी का भी जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान से 79.35 से 79.70 पर मंगलवार को पहुंच गया। नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ने के कारण पहले से बाढ़ से घिरे गांव में पानी घुसने लगा। तमाम बाढ़ पीड़ित अपने मवेशी के साथ एमबीडी बांध पर शरण लेने को विवश है। घाघरा नदी की दो माह से अधिक समय से कटान और बाढ़ से गायघाट दक्षिणी, भौंवापार, चकदहा, ढोलबजा, सुअरहा, सरैया, खरैया, सियर कला, दौलतपुर समेत 38 गांवों को चारों से तरफ से घेर रखा है। इसके बाद भी लोग घरों पर रहकर जीवन गुजार रहे थे।
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प्रशासन की ओर से लगाई गई नावों से लोग आ जा रहे थे। सोमवार शाम से नदी के जलस्तर में जब तेजी के साथ बढ़ोत्तरी होनी शुरू हुई तो गांवों में पानी घुसने लगा। मंगलवार सुबह से भौवापार, गायघाट दक्षिणी, सियर कला, सरैया, खरैया, चकदहा आदि गांव के लोग अपना-अपना सामान समेट कर मवेशी के साथ एमबीडी बांध पर डेरा डाल दिए हैं। देर शाम तक लोगों के घर से पलायन करने का क्रम जारी रहा। प्रधान बालेंद्र, राम सिंह, संजय कुमार, लालचंद, जगदंबा आदि ने बताया कि बांध पर लोग मवेशी के साथ रह रहे है। प्रशासन के तरफ से अभी कोई व्यवस्था रहने व खाने तथा मवेशी को खिलाने का नही किया गया है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि घर से पलायन करने वालों की सूची तैयार कर ली गई है। उसमें से अधिकतर लोगों को बाढ़ राहत केंद्र तिघरा पर रहने के लिए भेजा जा रहा है। बंधे पर रहने वालों को पन्नी तथा अन्य सामान मुहैया कराया जाएगा।
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संतकबीरनगर। घाघरा और राप्ती नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। घाघरा नदी 35 और राप्ती नदी खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। फिलहाल बांध को कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके किनारे बसे गांव के लोगों की नींद उड़ गई है। धनघटा क्षेत्र में लोग घरों से पलायन करने लगे हैं।
मेंहदावल क्षेत्र में स्थित राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। 80 सेंटीमीटर के पार नदी का जलस्तर तीन दिन पूर्व ही पहुंच गया। इस समय खतरे के निशान 79.50 मीटर से नदी 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। पूर्व विधायक अब्दुल कलाम ने मंगलवार को तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने बेलौली व विशुनपुर में तटबंध के कटान को लेकर विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती के जलस्तर का दबाव तेजी से पड़ रहा है। नदी लगातार उफान पर आ रही हैं। ड्रेनेज खंड सहायक अभियंता रामउजागीर लाल ने बताया कि मंगलवार की शाम चार बजे नदी का जलस्तर 80.35 मीटर पर पहुंच गया है। बेलौली व विशुनपुर में तटबंध को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्य कराए जा रहे हैं। तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित हैं, लेकिन जलस्तर का दबाव तटबंध पर बना हुआ हैं।
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घाघरा नदी का भी जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान से 79.35 से 79.70 पर मंगलवार को पहुंच गया। नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ने के कारण पहले से बाढ़ से घिरे गांव में पानी घुसने लगा। तमाम बाढ़ पीड़ित अपने मवेशी के साथ एमबीडी बांध पर शरण लेने को विवश है। घाघरा नदी की दो माह से अधिक समय से कटान और बाढ़ से गायघाट दक्षिणी, भौंवापार, चकदहा, ढोलबजा, सुअरहा, सरैया, खरैया, सियर कला, दौलतपुर समेत 38 गांवों को चारों से तरफ से घेर रखा है। इसके बाद भी लोग घरों पर रहकर जीवन गुजार रहे थे।
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प्रशासन की ओर से लगाई गई नावों से लोग आ जा रहे थे। सोमवार शाम से नदी के जलस्तर में जब तेजी के साथ बढ़ोत्तरी होनी शुरू हुई तो गांवों में पानी घुसने लगा। मंगलवार सुबह से भौवापार, गायघाट दक्षिणी, सियर कला, सरैया, खरैया, चकदहा आदि गांव के लोग अपना-अपना सामान समेट कर मवेशी के साथ एमबीडी बांध पर डेरा डाल दिए हैं। देर शाम तक लोगों के घर से पलायन करने का क्रम जारी रहा। प्रधान बालेंद्र, राम सिंह, संजय कुमार, लालचंद, जगदंबा आदि ने बताया कि बांध पर लोग मवेशी के साथ रह रहे है। प्रशासन के तरफ से अभी कोई व्यवस्था रहने व खाने तथा मवेशी को खिलाने का नही किया गया है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि घर से पलायन करने वालों की सूची तैयार कर ली गई है। उसमें से अधिकतर लोगों को बाढ़ राहत केंद्र तिघरा पर रहने के लिए भेजा जा रहा है। बंधे पर रहने वालों को पन्नी तथा अन्य सामान मुहैया कराया जाएगा।