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फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं मरीज
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जिला अस्पताल के पैथालाजी विभाग में फर्श पर बैठे मरीज।
- फोटो : KHALILABAD
फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं मरीज
पैथालॉजी विभाग में प्रतिदिन 180 से 200 मरीज कराने आते हैं जांच
संतकबीरनगर। सरकार लोगों की सेहत के लिए खासा चिंतित है। फिर भी जिले के अस्पतालों का हाल बेहाल है। इसका ताजा उदाहरण जिला अस्पताल का पैथालॉजी विभाग है। यहां पर मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। मरीज फर्श पर बैठकर या खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
संयुक्त जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभाग में प्रतिदिन 180 सेे 200 मरीज जांच कराने आते हैं। उनके साथ तीमारदार भी होते हैं। ब्लड जांच के लिए मरीजों को लाइन लगाना पड़ता है। उसके बाद कंप्यूटर में रिकार्ड दर्ज कर पर्ची पर नंबर लिख दिया जाता है। नंबर के हिसाब से मरीज को जांच के लिए बुलाया जाता है। एक मरीज के सभी प्रकार की जांच के लिए ब्लड निकालने में करीब पांच से सात मिनट लगता है।
पैथालॉजी में शुगर, सीवीसी, यूरिन, सोडियम, कैल्शियम समेत अन्य जांच होती है। बॉयोकेमेेस्टिक ऑटोमेटिक मशीन पर शुगर जांच और यूरिन की जांच होती है। सेल काउंटर मशीन पर सीवीसी की जांच होती है। इलेक्ट्रो लाइट एनालाइजर पर सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम आदि की जांच होती है। यहां सुबह नौ बजे से मरीज जांच के लिए आने लगते हैं।
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विभाग में कुर्सी लगी है, लेकिन उस पर पांच से छह मरीज ही बैठ सकते हैं। ज्यादातर मरीज खडे़ होकर या फर्श पर बैठक कर नमूना देने का इंतजार करते हैं। ब्लड जांच कराने आए विश्वनाथपुर के राममिलन, चकदही के विजय, बघौली के संजय, बरदहिया बाजार की मीना ने बताया कि ब्लड जांच के लिए नंबर लगा दिया है। बैठने की जगह नहीं है। इस वजह से फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
...
कोट
पैथालॉजी विभाग में ब्लड की जांच कराने के लिए मरीजों की लगातार भीड़ बढ़ रही है। नंबर लगाने के बाद नमूना लेने में समय लगता है। इस वजह से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। बैठने के लिए कुुर्सी लगाई गई है, पर मरीजों की संख्या के हिसाब से कुर्सी कम है। विभाग में जगह भी नहीं है।
डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस
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पैथालॉजी विभाग में प्रतिदिन 180 से 200 मरीज कराने आते हैं जांच
संतकबीरनगर। सरकार लोगों की सेहत के लिए खासा चिंतित है। फिर भी जिले के अस्पतालों का हाल बेहाल है। इसका ताजा उदाहरण जिला अस्पताल का पैथालॉजी विभाग है। यहां पर मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। मरीज फर्श पर बैठकर या खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
संयुक्त जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभाग में प्रतिदिन 180 सेे 200 मरीज जांच कराने आते हैं। उनके साथ तीमारदार भी होते हैं। ब्लड जांच के लिए मरीजों को लाइन लगाना पड़ता है। उसके बाद कंप्यूटर में रिकार्ड दर्ज कर पर्ची पर नंबर लिख दिया जाता है। नंबर के हिसाब से मरीज को जांच के लिए बुलाया जाता है। एक मरीज के सभी प्रकार की जांच के लिए ब्लड निकालने में करीब पांच से सात मिनट लगता है।
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पैथालॉजी में शुगर, सीवीसी, यूरिन, सोडियम, कैल्शियम समेत अन्य जांच होती है। बॉयोकेमेेस्टिक ऑटोमेटिक मशीन पर शुगर जांच और यूरिन की जांच होती है। सेल काउंटर मशीन पर सीवीसी की जांच होती है। इलेक्ट्रो लाइट एनालाइजर पर सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम आदि की जांच होती है। यहां सुबह नौ बजे से मरीज जांच के लिए आने लगते हैं।
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विभाग में कुर्सी लगी है, लेकिन उस पर पांच से छह मरीज ही बैठ सकते हैं। ज्यादातर मरीज खडे़ होकर या फर्श पर बैठक कर नमूना देने का इंतजार करते हैं। ब्लड जांच कराने आए विश्वनाथपुर के राममिलन, चकदही के विजय, बघौली के संजय, बरदहिया बाजार की मीना ने बताया कि ब्लड जांच के लिए नंबर लगा दिया है। बैठने की जगह नहीं है। इस वजह से फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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कोट
पैथालॉजी विभाग में ब्लड की जांच कराने के लिए मरीजों की लगातार भीड़ बढ़ रही है। नंबर लगाने के बाद नमूना लेने में समय लगता है। इस वजह से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। बैठने के लिए कुुर्सी लगाई गई है, पर मरीजों की संख्या के हिसाब से कुर्सी कम है। विभाग में जगह भी नहीं है।
डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस