{"_id":"616474028ebc3eeb5c626e5e","slug":"only-2-mini-aanganbadi-centers-completed-of-31-in-3-years-khalilabad-news-gkp412590592","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन साल में केवल दो मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हुआ पूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन साल में केवल दो मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हुआ पूरा
विज्ञापन
मेंहदावल के बाराखाल में आगनवाड़ी केंद्र अधूरा पड़ा ।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन साल में केवल दो मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हुआ पूरा
2016-17 में 31 भवनों का निर्माण कार्य हुआ था शुरू, शेष भवन अधूरे
मेंहदावल। विकास खंड मेंहदावल में 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण के लिए पूरी रकम निकाल ली गई। जबकि दो केंद्रों के भवनों का ही निर्माण कार्य पूरा कराया गया, लेकिन उसे भी हैंडओवर नहीं किया गया। शेष अधूरे भवनों के निर्माण को पूरा कराने की ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वर्ष 2016-17 में तत्कालीन खंड विकास अधिकारी चंद्रशेखर प्रसाद के कार्यकाल में मनरेगा योजना के तहत 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण होना था। जिन ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण होना था, वहां के ग्राम पंचायत अधिकारी को कार्य प्रभारी बनाया गया। ग्राम पंचायत बनकटा, बाराखाल, भिटियाकलां, नरायनपुर, रौना, घूरापाली, समोगर, औरही समेत 31 स्थानों पर केंद्र का निर्माण कार्य 2017 तक पूर्ण होना था। जबकि तीन वर्ष का समय बीत गया है और विभाग मात्र दो आंगनबाड़ी केंद्र का भवन पूर्ण होने का दावा कर रहा है। खंड विकास के कर्मचारियों का कहना है कि 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए खंड विकास को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। कहने को ग्राम पंचायत अधिकारी कार्य प्रभारी बनाए गए थे। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यह सारे केंद्र ठेकेदारी प्रथा से बन रहे थे। बिना कार्य पूर्ण किए ही धनराशि खाते से आहरित कर ली गई। जबकि केंद्र का निर्माण आज भी अधूरा है। प्रति मिनी आंगनबाड़ी केंद्र के भवन की निर्माण की लागत 8.6 लाख रुपये थी। ऐसे में 31 आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए शासन ने 266.6 लाख रुपये अवमुक्त किया। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी ने बिना कार्य पूर्ण हुए ही 240 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। खंड विकास पर तैनात बड़े बाबू विनोद कुमार गौड़ का कहना हैं कि अब भी मिनी आगनबाड़ी केंद्र के मद में करीब 20 से 25 लाख रुपये शेष बचे हैं। दो आंगनबाड़ी केंद्र रौना व घूरापाली पूर्ण बताया जा रहा है, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद भी भवन हैंडओवर नहीं हुआ है। (संवाद)
कोट
विकास खंड क्षेत्र में 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण वर्ष 2016-17 में होना था। इसमें रौना व घूरापाली में केंद्र का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अन्य स्थानों पर कार्य आज भी अधूरा है। निर्माण की लागत से अधिक धनराशि के भुगतान होने की बात भी सामने आई है, लेकिन यह सब पूर्व अवर अभियंता के कार्यकाल का मामला रहा। उनके कार्यकाल में धन का आहरण नहीं किया गया है। न ही उनके स्तर से कोई भुगतान किया गया।
विज्ञापन
-सुरेन्द्र पांडेय, अवर अभियंता विकास खंड मेंहदावल
कोट
मिनी आंगनबाड़ी केंद्र के अधूरे निर्माण व भुगतान का मामला संज्ञान में नहीं था। यदि ऐसा है तो मामले को संज्ञान में लेते हुए भौतिक सत्यापन कर अधूरे निर्माण को पूरा कराते हुए भवन के हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
-महावीर सिंह, बीडीओ मेंहदावल
विज्ञापन
2016-17 में 31 भवनों का निर्माण कार्य हुआ था शुरू, शेष भवन अधूरे
मेंहदावल। विकास खंड मेंहदावल में 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण के लिए पूरी रकम निकाल ली गई। जबकि दो केंद्रों के भवनों का ही निर्माण कार्य पूरा कराया गया, लेकिन उसे भी हैंडओवर नहीं किया गया। शेष अधूरे भवनों के निर्माण को पूरा कराने की ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वर्ष 2016-17 में तत्कालीन खंड विकास अधिकारी चंद्रशेखर प्रसाद के कार्यकाल में मनरेगा योजना के तहत 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण होना था। जिन ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण होना था, वहां के ग्राम पंचायत अधिकारी को कार्य प्रभारी बनाया गया। ग्राम पंचायत बनकटा, बाराखाल, भिटियाकलां, नरायनपुर, रौना, घूरापाली, समोगर, औरही समेत 31 स्थानों पर केंद्र का निर्माण कार्य 2017 तक पूर्ण होना था। जबकि तीन वर्ष का समय बीत गया है और विभाग मात्र दो आंगनबाड़ी केंद्र का भवन पूर्ण होने का दावा कर रहा है। खंड विकास के कर्मचारियों का कहना है कि 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए खंड विकास को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। कहने को ग्राम पंचायत अधिकारी कार्य प्रभारी बनाए गए थे। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यह सारे केंद्र ठेकेदारी प्रथा से बन रहे थे। बिना कार्य पूर्ण किए ही धनराशि खाते से आहरित कर ली गई। जबकि केंद्र का निर्माण आज भी अधूरा है। प्रति मिनी आंगनबाड़ी केंद्र के भवन की निर्माण की लागत 8.6 लाख रुपये थी। ऐसे में 31 आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए शासन ने 266.6 लाख रुपये अवमुक्त किया। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी ने बिना कार्य पूर्ण हुए ही 240 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। खंड विकास पर तैनात बड़े बाबू विनोद कुमार गौड़ का कहना हैं कि अब भी मिनी आगनबाड़ी केंद्र के मद में करीब 20 से 25 लाख रुपये शेष बचे हैं। दो आंगनबाड़ी केंद्र रौना व घूरापाली पूर्ण बताया जा रहा है, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद भी भवन हैंडओवर नहीं हुआ है। (संवाद)
विज्ञापन
कोट
विकास खंड क्षेत्र में 31 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण वर्ष 2016-17 में होना था। इसमें रौना व घूरापाली में केंद्र का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अन्य स्थानों पर कार्य आज भी अधूरा है। निर्माण की लागत से अधिक धनराशि के भुगतान होने की बात भी सामने आई है, लेकिन यह सब पूर्व अवर अभियंता के कार्यकाल का मामला रहा। उनके कार्यकाल में धन का आहरण नहीं किया गया है। न ही उनके स्तर से कोई भुगतान किया गया।
विज्ञापन
-सुरेन्द्र पांडेय, अवर अभियंता विकास खंड मेंहदावल
कोट
मिनी आंगनबाड़ी केंद्र के अधूरे निर्माण व भुगतान का मामला संज्ञान में नहीं था। यदि ऐसा है तो मामले को संज्ञान में लेते हुए भौतिक सत्यापन कर अधूरे निर्माण को पूरा कराते हुए भवन के हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
-महावीर सिंह, बीडीओ मेंहदावल