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बिना मास्क के न्यायालय में नहीं मिलेगा प्रवेश
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बिना मास्क के न्यायालय में नहीं मिलेगा प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला न्यायालय में आने वाले अधिवक्ताओं, वादकारियों व कर्मचारियों को मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल डिस्टेसिंग का पालन भी करना होगा। इस संबंध में जनपद न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने निर्देश जारी कर दिया है।
जनपद न्यायाधीश के निर्देश के मुताबिक न्यायालय परिसर में प्रत्येक दिवस डीएम व सीएमओ से समन्वय बनाकर न्यायालय खुलने से पूर्व एवं बंद होने के बाद दो बार सैनिटाइज कराया जाएगा।
न्यायालयों में अब मात्र नए दाखिल एवं लंबित मामलों की ग्राहयता पर, नए एवं लंबित जमानत प्रार्थना पत्र, अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, वाहनों के रिलीज संबंधी मामले तथा लघु अपराध के मामले, नए एवं लंबित तत्काल अस्थायी निषेधाज्ञा के मामले, पुलिस द्वारा प्रस्तुत आरोप-पत्र के संबंध में कार्रवाई, विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों पर कार्रवाई आदि ऐसे मामले जिनमें बहस पूर्ण हो चुकी हो में आदेश/निर्णय पारित किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त न्यायालय के अन्य लंबित न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य किये जाएंगे। इस दौरान यदि कोई परिस्थिति उत्पन्न होती है कि डीएम व सीएमओ की राय में न्यायालय विशेष अवधि के लिए बंद किया जाना चाहिए तो बंद किया जाएगा। इस अवधि में यदि कोई अभियुक्त न्यायालय में आत्मसमर्पण करता है अथवा वारंट निरस्तीकरण का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करता है तो उसे आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, तभी उसके मामले पर सुनवाई की जाएगी। न्यायालय कक्ष में केवल उन्हीं वादकारियों एवं अधिवक्ताओं को प्रवेश की अनुमति होगी जिनके मामले लंबित होंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला न्यायालय में आने वाले अधिवक्ताओं, वादकारियों व कर्मचारियों को मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल डिस्टेसिंग का पालन भी करना होगा। इस संबंध में जनपद न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने निर्देश जारी कर दिया है।
जनपद न्यायाधीश के निर्देश के मुताबिक न्यायालय परिसर में प्रत्येक दिवस डीएम व सीएमओ से समन्वय बनाकर न्यायालय खुलने से पूर्व एवं बंद होने के बाद दो बार सैनिटाइज कराया जाएगा।
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न्यायालयों में अब मात्र नए दाखिल एवं लंबित मामलों की ग्राहयता पर, नए एवं लंबित जमानत प्रार्थना पत्र, अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, वाहनों के रिलीज संबंधी मामले तथा लघु अपराध के मामले, नए एवं लंबित तत्काल अस्थायी निषेधाज्ञा के मामले, पुलिस द्वारा प्रस्तुत आरोप-पत्र के संबंध में कार्रवाई, विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों पर कार्रवाई आदि ऐसे मामले जिनमें बहस पूर्ण हो चुकी हो में आदेश/निर्णय पारित किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त न्यायालय के अन्य लंबित न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य किये जाएंगे। इस दौरान यदि कोई परिस्थिति उत्पन्न होती है कि डीएम व सीएमओ की राय में न्यायालय विशेष अवधि के लिए बंद किया जाना चाहिए तो बंद किया जाएगा। इस अवधि में यदि कोई अभियुक्त न्यायालय में आत्मसमर्पण करता है अथवा वारंट निरस्तीकरण का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करता है तो उसे आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, तभी उसके मामले पर सुनवाई की जाएगी। न्यायालय कक्ष में केवल उन्हीं वादकारियों एवं अधिवक्ताओं को प्रवेश की अनुमति होगी जिनके मामले लंबित होंगे।
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