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Sant Kabir Nagar News: एक सप्ताह से साधन सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं, किसान परेशान

Sat, 03 Dec 2022 10:57 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Dec 2022 10:57 PM IST
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No DAP on resource cooperatives
मेंहदावल क्षेत्र के साधन सहकारी समिति भिटिया कला में बंद ताला। - फोटो : KHALILABAD
एक सप्ताह से साधन सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं, किसान परेशान
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15 नवंबर से 10 दिसंबर तक गेहूं की बुआई का है महत्वपूर्ण समय
यूरिया, सुपरफास्फेट और पोटाश का मिश्रण कर किसान चला रहे काम
संतकबीरनगर। एक सप्ताह से साधन सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं है। जबकि
गेहूं की बुआई का बेहद अहम समय है। डीएपी न मिलने से परेशान किसान मिश्रित खाद के साथ गेहूं की बुआई कर रहे हैं। मिश्रित खाद के प्रयोग से गेहूं की फसल की पैदावार कम होने का डर भी है।
गेहूं की बुआई का वक्त 15 नवंबर से दस दिसंबर तक माना जाता है। जिले में डीएपी की किल्लत नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू हो गई थी। साधन सहकारी समितियों पर पहले से खाद की कमी थी। एक समय ऐसा भी था आया था कि एक छटाक भी डीएपी कहीं मिलने वाली नहीं थी।
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इस बीच डीएपी की रैक लगी और खाद सभी जगह भेजी गइर्ष्, लेकिन मांग के आगे ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। एक पखवाडे़ से डीएपी की किल्लत फिर शुरू हो गई। किसान रामलाल, महादेव, कृष्ण मोहन, सर्वजीत, अनवारूल हक आदि का कहना है कि डीएपी के इंतजार में बुआई बिछड़ती जा रही थी। मिश्रित खाद के साथ गेहूं की बुआई करनी पड़ रही है।
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मेंहदावल क्षेत्र में डीएपी के लिए हाहाकार है। सरकारी समितियों में ताले लटक रहे हैं। किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। किसान दुकानों से महंगे कीमत पर खाद खरीद रहे हैं। भिटिया कला साधन सहकारी समिति के सचिव राम प्रसाद मौर्या ने बताया कि एक सप्ताह से डीएपी नहीं है।
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डीएपी का विकल्प नहीं : डॉ. सिंह
कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि डीएपी का विकल्प कोई खाद नहीं है। डीएपी न पड़ने से पैदावार कम होगी। किसानों को गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए।
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कोट
पिछले वर्ष नवंबर में 5100 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हुई थी। इस वर्ष नवंबर में 5300 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हुई है। 20 हजार बोरी डीएपी उपलब्ध है। दुकानों पर डीएपी उपलब्ध है। अब तक एक लाख छह हजार बोरी डीएपी बिक चुकी है। बस्ती में दो रैक लगने वाली है। साधन सहकारी समितियों से 43 हजार बोरी डीएपी बेची जा चुकी है।

- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
92,000 हेक्टेयर में होती है गेहूं की बुआई
जिले में 2.80 लाख किसान हैं। 92,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई होती है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि अब तक 70 प्रतिशत किसान अब तक गेहूं की बुआई कर चुके हैं, लेकिन जो किसान देर से पकने वाली धान की रोपाई किए थे या फिर जिनके खेत निचली सतह वाले थे, जहां जलभराव थ, अथवा नहरों के किनारे जिनके खेत थे, वे किसान गेहूं की बुआई नहीं कर पाए हैं।
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