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Sant Kabir Nagar News: कीचड़ और जलभराव से बढ़ा मच्छरों का प्रकोप
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धनघटा। तहसील क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। रास्तों पर चढ़ा बाढ़ का पानी उतर गया है लेकिन कीचड़ और निचले स्थानों पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोबारा आई बाढ़ के बाद अब तक कई स्थानों पर दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है।
सरयू नदी में आई बाढ़ से धनघटा तहसील क्षेत्र के 18 गांव प्रभावित हुए थे। इनमें से तीन गांवों में अब भी लोगों के घरों के दरवाजे तक पानी जमा है। नदी का जलस्तर कम होने के साथ बाढ़ का पानी भी उतर रहा है, लेकिन गड्ढों और निचले स्थानों में भरा पानी नहीं निकल पा रहा है। जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, पहली बार बाढ़ आने के बाद प्रशासन की ओर से दवा का छिड़काव कराया गया था। इसके बाद दोबारा बाढ़ आने से पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया। अब पानी कम होने के बाद भी प्रभावित गांवों में दोबारा दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को बीमारी फैलने की आशंका सता रही है।
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ग्रामीण राम सूरत, राम मूरत, राजाराम और लालमन ने बताया कि घरों में रखा गेहूं, चावल और अन्य सामान नमी के कारण खराब होने की कगार पर है। लोग खाद्यान्न को धूप में सुखाकर किसी तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि गेहूं की पिसाई कराने के बाद आटा भी ठीक नहीं निकल रहा है। मजबूरी में इसी से काम चलाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि किसी तरह खाने का इंतजाम हो रहा है लेकिन पशुओं के चारे का संकट बना हुआ है। उनका आरोप है कि तहसील प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का पर्याप्त वितरण नहीं किया गया है। वहीं पशुपालन विभाग की ओर से भी पशुओं के लिए चारे का इंतजाम नहीं कराया गया।
ग्राम प्रधान बालेंद्र कुमार ने कहा कि बाढ़ से गांव के लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोगों के सामने खाने-पीने और रहने की समस्या बनी हुई है। तहसील प्रशासन राहत सामग्री वितरित करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर राहत सामग्री का वितरण नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ तहसील परिसर में धरना देने को मजबूर होंगे।
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सरयू नदी में आई बाढ़ से धनघटा तहसील क्षेत्र के 18 गांव प्रभावित हुए थे। इनमें से तीन गांवों में अब भी लोगों के घरों के दरवाजे तक पानी जमा है। नदी का जलस्तर कम होने के साथ बाढ़ का पानी भी उतर रहा है, लेकिन गड्ढों और निचले स्थानों में भरा पानी नहीं निकल पा रहा है। जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है।
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ग्रामीणों के अनुसार, पहली बार बाढ़ आने के बाद प्रशासन की ओर से दवा का छिड़काव कराया गया था। इसके बाद दोबारा बाढ़ आने से पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया। अब पानी कम होने के बाद भी प्रभावित गांवों में दोबारा दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को बीमारी फैलने की आशंका सता रही है।
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ग्रामीण राम सूरत, राम मूरत, राजाराम और लालमन ने बताया कि घरों में रखा गेहूं, चावल और अन्य सामान नमी के कारण खराब होने की कगार पर है। लोग खाद्यान्न को धूप में सुखाकर किसी तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि गेहूं की पिसाई कराने के बाद आटा भी ठीक नहीं निकल रहा है। मजबूरी में इसी से काम चलाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि किसी तरह खाने का इंतजाम हो रहा है लेकिन पशुओं के चारे का संकट बना हुआ है। उनका आरोप है कि तहसील प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का पर्याप्त वितरण नहीं किया गया है। वहीं पशुपालन विभाग की ओर से भी पशुओं के लिए चारे का इंतजाम नहीं कराया गया।
ग्राम प्रधान बालेंद्र कुमार ने कहा कि बाढ़ से गांव के लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोगों के सामने खाने-पीने और रहने की समस्या बनी हुई है। तहसील प्रशासन राहत सामग्री वितरित करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर राहत सामग्री का वितरण नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ तहसील परिसर में धरना देने को मजबूर होंगे।