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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   Instructions for lodging cases on three including former BDO

पूर्व बीडीओ समेत तीन पर केस दर्ज कराने के निर्देश

Tue, 30 May 2017 11:33 PM IST
संतकबीरनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 30 May 2017 11:33 PM IST
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 विकास खंड बेलहर कला के पकड़ी आराजी में पक्के नाले को कच्चा नाला दिखाकर 1,22,243 रुपये का घपला किए जाने की जांच में पुष्टि हुई थी। इस मामले में डीएम ने पूर्व बीडीओ, ग्राम पंचायत सचिव और सेवा मुक्त तकनीकी सहायक से वसूली करने के साथ केस दर्ज कराने का आदेश दिया है।
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डीएम मारकंडेय शाही ने बताया कि ग्राम पंचायत पकड़ी आराजी के निवासी अहमद हुसेन, अली अहमद आदि ने ग्राम पंचायत सलमा खातून के खिलाफ शिकायती पत्र देकर कार्य में अनियमितता की जांच कराए जाने की मांग की थी। जांच में घपले की बात सामने आई थी और 12 अगस्त 2016 को तत्कालीन डीएम ने कार्रवाई का आदेश पारित किया था। पूर्व डीएम के आदेश के खिलाफ प्रधान सलमा खातून ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर किया था। हाईकोर्ट ने पूर्व डीएम के आदेश को निरस्त कर दिया था और तीन माह के अंदर फिर से जांच कराए जाने का आदेश डीएम को दिया था। डीएम ने आगे बताया कि शिकायत की प्रारंभिक जांच डीएसटीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित कर कराई गई। जांच टीम ने 20 जनवरी 2017 को मामले की जांच की और 25 जनवरी को जांच रिपोर्ट सौंपा। जांच रिपोर्ट के मुताबिक साहब मास्टर के खेत से बनिया नाला खुदाई व सफाई के कार्य में वर्ष 2008 में जिला पंचायत से निर्मित पक्के नाले को कच्चा नाला दिखाकर धनराशि के गबन करने का प्रकरण पाया गया है। मौके पर पक्का नाला 590 मीटर निर्मित था और गत वर्ष नाले की सिल्ट की सफाई का कार्य हुआ था। शिकायतकर्ता के जरिए मौके पर चार मजदूर रेहाना खातून, निसार अहमद, अली हुसेन और आसमा खातून के बारे में बताया गया कि यह लोग कभी मजदूरी कार्य नहीं करते है और न ही इस परियोजना पर कार्य ही किए है। जांच के समय उपस्थित मजदूरों ने बताया कि उनके जरिए इस परियोजना पर कार्य किया गया है और उनसे किसी प्रकार की धनउगाही नहीं की गई है। ग्राम प्रधान सलमा खातून ने बताया कि वह कम पढ़ी लिखी है तथा नाला कच्चा- पक्का कैसे हुआ उन्हें नहीं पता है। आगे बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा स्वीकृत कार्य योजना के उपरांत तकनीकी सहायक द्वारा आंगणन करने, कार्य प्रारंभ होने के पूर्व ,कार्य होते समय व कार्य समाप्त होने पर फोटोग्राफ आदि के आधार पर स्थलीय सत्यापन के उपरांत मनरेगा एक्ट के तहत कार्य की वित्तीय स्वीकृति एवं एफटीओ के जरिए भुगतान का दायित्व बीडीओ को होता है। ऐसा न करके पूर्व बीडीओ ने बिना फोटोग्राफ देखे और स्थलीय सत्यापन किए ही भुगतान की स्वीकृति प्रदान कर दी है। कार्य योजना बनाने का दायित्व ग्राम पंचायत सचिव तथा कार्य के बाद वास्तविक आंगणन का दायित्व तकनीकी सहायक का है, लेकिन इनके जरिए भी दायित्व निर्वहन नहीं किया गया। ग्राम प्रधान के खिलाफ प्रथम दृष्टया दोषी होने का कोई प्रकरण जांचोपरांत प्रकाश में नही आया। जांच में पूर्व बीडीओ राजाराम यादव, ग्राम पंचायत सचिव आनंद कुमार और सेवा मुक्त तकनीकी सहायक एसपी राय दोषी पाए गए है। जांच में 1,22,243 रुपये दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि हुई है। जांच में दोषी पाए गए तीनों लोगो से बराबर - बराबर धनराशि की वसूली कराए जाने का निर्देश सीडीओ और डीपीआरओ को दिया गया है। इसके साथ ही मनरेगा एक्ट के तहत अभियोजन की कार्रवाई किए जाने के लिए मुकदमा दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया है। 
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